राजस्थान: गरीब किसान की बेटी भावना ने पक्का किया टोक्यो ओलंपिक का टिकट, यहां पढ़ें संघर्ष की कहानी

भावना के पिता किसान हैं और उनके पास सिर्फ दो बीघा जमीन है.

राजसमंद जिले के रेलमगरा के पास स्थित काबरा गांव निवासी भावना जाट (Bhavna Jat) ने नेशनल चैंपियनशिप (National championship) में 20 किलोमीटर पैदल चाल में राष्ट्रीय रिकॉर्ड (National record) बनाते हुए टोक्यो ओलंपिक-2020 (Tokyo Olympics) का टिकट पक्का कर लिया है.

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जयपुर. प्रदेश की एक और लाडली बेटी ने ओलंपिक (olympic) कोटा हासिल कर लिया है. राजसमंद जिले के रेलमगरा के पास स्थित काबरा गांव निवासी भावना जाट (Bhawna Jat) ने नेशनल चैंपियनशिप (National championship) में 20 किलोमीटर पैदल चाल में राष्ट्रीय रिकॉर्ड (National record) बनाते हुए टोक्यो ओलंपिक-2020 (Tokyo Olympics) का टिकट पक्का कर लिया है. भावना ने एक घंटे 29 मिनट और 54 सैकंड में 20 किलोमीटर पैदल चलकर नया नेशनल रिकॉर्ड अपने नाम किया है. भावना ने नई दिल्ली में चल रहे नेशनल चैंपियनशिप में यह उपलब्धी हासिल की.

10 साल से इसकी तैयारी कर रही थी
भावना के पिता किसान हैं और उनके पास सिर्फ दो बीघा जमीन है. आर्थिक तंगी के कारण भावना को कॉलेज की पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी. भावना गत 10 साल से इसकी तैयारी कर रही थी. वह नेशनल लेवल पर सिल्वर मेडल जीत चुकी थी. इन दिनों भावना हावड़ा में टिकट निरीक्षक के पद पर कार्यरत है. शुरूआती दिनों में उसने जयपुर में रहकर भी पैदल चाल की तैयारी की थी. भावना के परिवार में उससे बड़े दो भाई हैं. पिता घर भी बमुश्किल से चला पाते हैं.

भावना का यह सफर बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा
भावना ऐसे इलाके से ओलंपिक तक पहुंची है, जहां महिला शिक्षा अब भी बहुत बुरे हाल में हैं. इसके साथ ही नाता प्रथा जैसी कुप्रथा भी इस इलाके में सदियों से चली आ रही है. भावना का ओलंपिक तक का सफर न केवल मेवाड़, बल्कि प्रदेश में अभावों से जूझ रही बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा. उम्मीद है आने वाले दिनों में वो प्रदेश की बेटियों के लिए रोल मॉडल बनकर उभरेगी.

बेटियां खेलों में देश-विदेश में सफलता का परचम लहरा रही हैं
उल्लेखनीय है कि पिछले काफी समय से प्रदेश की बेटियां खेलों में देश-विदेश में अपनी सफलता का परचम लहरा रही हैं. सफलता की नित नई ऊंचाइयां छू रही बेटियों ने अब समाज को साफ संदेश दे दिया है कि बेटे ही नहीं बेटियां भी किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है. फिर वह चाहे पढ़ाई और या फिर खेल का मैदान. अगर उसे अवसर मिला तो वह उसे गंवाएंगी नहीं, बल्कि परिवार का नाम रोशन करके ही दम लेंगी.

 

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