जयपुर बम ब्लास्ट: नवंबर तक टली 71 मौतों के जिम्मेदार 4 आतंकियों की फांसी, आड़े आई कोर्ट की ये प्रक्रिया

कोर्ट ने नवंबर तक फांसी की सजा टाल दी है. (सांकेतिक तस्वीर)
कोर्ट ने नवंबर तक फांसी की सजा टाल दी है. (सांकेतिक तस्वीर)

Jaipur Bomb Blast: राजस्थान (Rajasthan) के जयपुर (Jaipur) के गुनहगारों की फांसी नवंबर तक टल गई है. दोषियों की अर्जी पर मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत माहन्ती की खण्डपीठ ने सुनवाई नवम्बर के अंत तक टाल दी है.

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जयपुर. राजस्थान (Rajasthan) के जयपुर (Jaipur) के गुनहगारों की फांसी नवंबर तक टल गई है. दोषियों की अर्जी पर मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत माहन्ती की खण्डपीठ ने सुनवाई नवम्बर के अंत तक टाल दी है. दोषियों की ओर से हाई कोर्ट में अर्जी पेश करके कहा गया था कि पूरे मामले में निचली कोर्ट ने चार लोगों को फांसी की सज़ा सुनाई है. ऐसे में 8 मामलों में हर एक दोषी की ओर से अपील पेश होनी है. वहीं मामलें में कुल 21 हज़ार पेज है, जिनका अनुवाद भी अंग्रेजी में होना है. ऐसे में दोषियों को अपील पेश करने के लिए समय दिया जाए. इसके बाद कोर्ट ने बीते मंगलवार को हुई सुनवाई में फांसी नवंबर तक टालने का निर्णय लिया.

मिली जानकारी के मुताबिक पूरे मामलें में चारों दोषियों की ओर से कुल 32 अपीलें दायर होंगी. सभी दोषियों को स्पेशल कोर्ट ने 8 अलग-अलग मामलों में फंसी की सज़ा सुनाई थी. ऐसे में एक आरोपी 8 अपील दायर करेगा. इस तरह से पूरे मामले में कुल 32 अपीलें दायर होंगी. कोर्ट में दोषियों के वकीलों ने भी इसे ही आधार बनाया. उन्होंने कहा कि पूरे मामले में करीब 21 हजार पेज होने के कारण अपीलों को तैयार करने में समय लगना स्वाभाविक है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सभी दस्तावेजों का अंग्रेजी में अनुवाद किया जाना चाहिए. इस पर कोर्ट ने अर्जी को स्वीकार करते मामले सुनवाई टाल दी.

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11 साल बाद मिला था न्याय
जयपुर में 13 मई 2008 को हुए सीरियल बम ब्लास्ट में करीब 71 लोगों की मौत हुई थी. वहीं 185 लोग घायल हो गए थे. ब्लास्ट के 11 साल बाद जयपुर बम ब्लास्ट की विशेष अदालत ने आतंक फैलाने वाले 4 आरोपियों को फांसी की सज़ा सुनाई थी. 18 दिसम्बर 2019 को जज अजय कुमार शर्मा प्रथम ने चारों आरोपियों मोहम्मद सैफ, सरवर आजमी, सलमान और सैफुर्रहमान को बम ब्लास्ट का दोषी करार दिया था, वहीं मुजाहिद्दीन के नाम से धमाकों की जिम्मेदारी लेने वाले आरोपी मोहम्मद शहबाज हुसैन को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था. 20 दिसम्बर 2019 को इन चारों आरोपियों को फांसी की सज़ा सुनाई गई थी.
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