रेयर डिजीज से जूझ रहे बच्चे का जयपुर के अस्पताल में 4 करोड़ की दवा से किया जा रहा उपचार
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रेयर डिजीज से जूझ रहे बच्चे का जयपुर के अस्पताल में 4 करोड़ की दवा से किया जा रहा उपचार
बच्चे का इलाज कर रहे डॉक्टरों के मुताबिक यह दुर्लभ बीमारी प्रति 11 हजार में किसी एक को होती है (प्रतीकात्मक फोटो)

स्पाइनल मस्कुलर अट्रोफी बीमारी से जूझ रहे इस बच्चे का जेकेलोन अस्पताल के दुर्लभ बीमारी केंद्र में उपचार शुरू किया गया है. पीड़ित को काफी महंगी रिस्डिप्लाम (एवरेसडी) दवाई दी जा रही है. जिसकी कीमत चार करोड़ रुपए प्रति वर्ष है, और इसे यह आजीवन देने की आवश्यकता है

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  • Last Updated: August 31, 2020, 4:54 PM IST
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जयपुर. पिंक सिटी जयपुर (Jaipur) के जेके लोन अस्पताल (JK Lone Hospital) में डॉक्टरों को दुर्लभ बीमारियों (Rare Diseases) के इलाज में एक और कामयाबी हासिल हुई है. जेकेलोन अस्पताल के दुर्लभ बीमारी केंद्र में स्पाइनल मस्क्युलर अट्रोफी नामक रेयर डिजीज़ (दुर्लभ बीमारी) से पीड़ित एक बच्चे का उपचार शुरू किया गया है. इस बच्चे को काफी महंगी रिस्डिप्लाम (एवरेसडी) दवाई दी जा रही है. इस दवा की कीमत चार करोड़ रुपए प्रति वर्ष है, और इसे यह आजीवन देने की आवश्यकता है. अस्पताल के अधीक्षक और रेयर डिजीज़ के इंचार्ज डॉ. अशोक गुप्ता ने बताया कि पीड़ित बच्चे को अनुकंपा उपयोग कार्यक्रम के माध्यम से यह दवाई (Medicine) उपलब्ध कराई गई है. देश में यह दवा दूसरी बार किसी रोगी को शुरू की गई है.

चार करोड़ रुपए है दवा की कीमत 
रिस्डिप्लाम (एवरेसडी) दो महीने की उम्र से बड़े बच्चों के लिए मुंह से रोजाना ली जाने वाली दवा है. यह दवा सभी प्रकार के स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी के बच्चों को दी जा सकती है. यह एक स्मॉल मोलेक्युल ओरल ड्रग है जिसे बच्चे को घर पर ही दिया जाता है. बीते सात अगस्त को अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) द्वारा रिस्डिप्लाम को मंजूरी दी गई है, जो चार वर्षों के भीतर उपलब्ध स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी के लिए तीसरी दवा है.

बीमारी से पीड़ित बच्चा उत्तर प्रदेश का रहने वाला
पीड़ित बच्चा उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर का रहने वाला है. इसे विशेष उपचार के लिए जयपुर के जेके लोन अस्पताल लाया गया है. बीमारी के तहत बच्चे के पैरों में हरकत कम थी और ढीलापन था. समय बीतने पर जब बच्चे ने खड़ा होना और चलना शुरू नहीं किया तो परिवार ने उसे डॉक्टरों को दिखाया और जेनेटिक टेस्टिंग कराई तब इस बीमारी का पता चला. डॉक्टरों के मुताबिक स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी (एसएमए) एक आनुवांशिक (जेनेटिक) बीमारी है जो नर्वस सिस्टम और स्वैच्छिक मांसपेशियों के काम को प्रभावित करती है.



यह बीमारी लगभग प्रति 11 हजार में से किसी एक बच्चे में पाई जाती है, और यह किसी भी जाति या लिंग को प्रभावित कर सकती है. कुछ में यह लक्षण वयस्क होने तक स्पष्ट नहीं होते हैं. हाथ, पैर और श्वसन तंत्र की मांसपेशियां आम तौर पर पहले प्रभावित होती हैं. इसकी वजह से रोगी में निगलने की समस्या, स्कोलियोसिस इत्यादि उत्पन्न हो सकती है. एसएमए वाले व्यक्तियों को सांस लेने और निगलने जैसे कार्यों में कठिनाई होने लगती है. ज्यादातर मरीज रेस्पिरेटरी फेलियर की वजह से समय से पहले मर जाते हैं.

यह दवा बच्चों में एसएमए के सुडो जीन को एक्टिवेट कर के एसएमएन प्रोटीन को पुनः बनाने की क्षमता विकसित करता है. इसलिए उम्मीद है कि इस उपचार के बाद बच्चा नॉर्मल जिंदगी जी पाएगा. इस दुर्लभ बीमारी के निदान की सुविधा अब जयपुर के जेके लोन अस्पताल में उपलब्ध हो गई है.
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