नगर निगम ग्रेटर विवाद: मेयर ने कहा- नहीं दिया सुनवाई का मौका, सरकार बोली- सुनवाई की जरूरत नहीं

जयपुर में नगर निगम ग्रेटर विवाद अब कोर्ट में पहुंच गया है, जिसकी आज पहली सुनवाई हुई.

जयपुर में नगर निगम ग्रेटर विवाद अब कोर्ट में पहुंच गया है, जिसकी आज पहली सुनवाई हुई.

जयपुर ग्रेटर नगर निगम की निलंबित मेयर सौम्या गुर्जर की याचिका पर हाईकोर्ट जयपुर सुनवाई कर रही है. गुर्जर ने कोर्ट में स्वायत्त शासन विभाग के निलंबन आदेश को चुनौती दे रखी है.

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जयपुर. नगर निगम ग्रेटर विवाद मामलें में आज हाईकोर्ट जयपुर में सुनवाई अधूरी रही. अब सोमवार को सुबह 9 बजे मामलें में आगे की सुनवाई होगी. आज जस्टिस पंकज भंडारी की खंडपीठ ने मामलें में करीब साढ़े 4 घंटे सुनवाई की. आज सबुह सुनवाई शुरू होते ही वरिष्ठ अधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद और आशीष शर्मा ने याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष रखा. इसके बाद राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता एमएस सिंघवी ने बहस शुरू की, लेकिन कोर्ट का समय पूरा होने तक उनकी बहस अधूरी रही. जिसके बाद कोर्ट ने मामला सोमवार तक टाल दिया. अदालत निलंबित मेयर सौम्या गुर्जर की याचिका पर सुनवाई कर रही है. गुर्जर ने कोर्ट में स्वायत्त शासन विभाग के निलंबन आदेश को चुनौती दे रखी है.

निलंबन के लिए सुनवाई की जरूरत नहीं- सरकार

आज सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता एमएस सिंघवी ने कहा कि अभी जांच प्राथमिक स्तर पर है, ऐसे में हम सभी को सुने यह जरूरी नहीं है. सरकार को एक्ट में निलम्बन की शक्तियां प्राप्त हैं. वहीं याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं की ओर से कहा गया है कि एक्ट के जिस सेक्शन-39 में FIR दर्ज होने पर निलबंन का प्रावधान है. वह संविधान के आर्टिकल 14 और 19 का उल्लंघन करता है, क्योंकि अगर मामलें में आगे चलकर कोर्ट याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप साबित नहीं मानती है तो इससे याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकारों का हनन होता है. वहीं पूरे मामलें में जांच अधिकारी ने याचिकाकर्ता को प्रत्यक्षदर्शी के तौर पर बुलाया था, लेकिन उलटा यहां उन्हीं पर कार्रवाई कर दी गई.

यह था पूरा मामला
दरअसल 4 जून को शहर में डोर टू डोर कचरा संग्रहण करने वाली BVG कंपनी के भुगतान को लेकर मेयर ने आयुक्त को अपने चेम्बर में बात करने के लिए बुलाया. वहां पहले से सफाई समिति चैयरमेन सहित अन्य पार्षद मौजूद थे. आयुक्त का आरोप है कि मेयर की मौजूदगी में तीन पार्षदों ने उनके साथ बदसूलकी की. नौबत हाथापाई तक भी आना बताया जाता है. इसके बाद आयुक्त ने तीन पार्षदों के खिलाफ थाने में मामला दर्ज करवा दिया था. वहीं सरकार ने पूरे मामलें की जांच करवाकर डॉ सौम्या गुर्जर सहित तीनों पार्षदों को निलंबित कर दिया था, जिसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है.

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