Jaipur Dairy: देखो सरकार- सुनो पुकार, यहां अपनी क्षमता से 4 गुना ज्यादा काम रहे हैं अधिकारी और कर्मचारी

डेयरी का 10 लाख लीटर की क्षमता वाला नया प्लांट भी अब प्रोसेसिंग में आ चुका है लेकिन इसे चलाने के लिए पर्याप्त संख्या में अधिकारी-कर्मचारी नहीं हैं.
डेयरी का 10 लाख लीटर की क्षमता वाला नया प्लांट भी अब प्रोसेसिंग में आ चुका है लेकिन इसे चलाने के लिए पर्याप्त संख्या में अधिकारी-कर्मचारी नहीं हैं.

Jaipur Dairy: अधिकारियों और कर्मचारियों (Shortage of human resource) की भारी कमी के चलते जयपुर डेयरी में काम को बोझ बढ़ गया है. यहां 1-1 अधिकारी और कर्मचारी 4-4 लोगों जितना काम करने का मजबूर हैं.

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जयपुर. जयपुर डेयरी (Jaipur Dairy) इन दिनों अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी (Shortage of human resource) से जूझ रही है. पिछले बरसों में डेयरी का काम तय क्षमता के मुकाबले चौगुना तक बढ़ गया है, लेकिन अधिकारियों-कर्मचारियों के पद स्वीकृत संख्या के मुकाबले आधे से भी कम रह गये हैं. पिछले कई बरसों से डेयरी में भर्ती की प्रक्रिया अटकी (Recruitment process stuck) हुई है. अब जल्द ही उसके पूरा होने की उम्मीद है.

जयपुर डेयरी की जब स्थापना हुई थी तो यहां ढाई लाख लीटर दूध की प्रोसेसिंग क्षमता का प्लांट लगाया गया था. डेयरी प्लांट की इसी क्षमता के मुकाबले यहां अधिकारियों-कर्मचारियों के पद भी स्वीकृत किये गये थे. लेकिन अब डेयरी में हालात ये बन गये हैं कि प्लांट में प्रोसेसिंग जहां तय क्षमता के मुकाबले करीब चार गुना तक बढ़ गई है वहीं अधिकारी और कर्मचारियों के पद स्वीकृत संख्या के मुकाबले आधे से भी कम रह गये हैं. करीब डेढ़ दशक पहले डेयरी प्लांट की क्षमता ढाई लाख से बढाकर पांच लाख लीटर कर दी गई थी. लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों के पदों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई. डेयरी के प्लांट में अब करीब 10 लाख लीटर दूध की प्रोसेसिंग रोज होती है. लेकिन अधिकारी-कर्मचारी इसके मुकाबले बेहद कम हैं.

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डेयरी में करीब 700 कर्मचारी ठेके पर काम रहे हैं
प्लांट की ढाई लाख लीटर की क्षमता के लिहाज से डेयरी में कुल 488 पद स्वीकृत किए गये थे. एक ओर प्लांट की क्षमता बढ़ती गई दूसरी ओर कर्मचारी सेवानिवृत्त होते रहे. अब डेयरी में नियमित कार्मिकों की संख्या 250 से भी कम है. लम्बे समय से भर्ती नहीं होने के चलते जयपुर डेयरी सेवानिवृत्त और ठेका कर्मचारियों के भरोसे चल रही है. डेयरी में करीब 700 कर्मचारी ठेके पर काम रहे हैं और डेयरी प्लांट लगभग पूरी तरह इन्हीं के हवाले है. डेयरी में प्रबंधन से लेकर अकाउंट, सेल्स, मैकेनिक और यहां तक की ऑपरेटर के पद भी खाली पड़े हैं. इसके चलते हर तरह का कामकाज प्रभावित हो रहा है. प्लांट में दुर्घटनायें होने का अंदेशा भी बढ़ रहा है.

अगले 2-3 महीने में भर्ती की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी
डेयरी का 10 लाख लीटर की क्षमता वाला नया प्लांट भी अब प्रोसेसिंग में आ चुका है लेकिन इसे चलाने के लिए पर्याप्त संख्या में अधिकारी-कर्मचारी नहीं हैं. डेयरी में भर्तियां निकले करीब 3 साल से ज्यादा का समय हो गया है लेकिन बार-बार अवरोधों के चलते ये पूरी नहीं हो पाई है. अब सहकारी भर्ती बोर्ड को भर्ती की अभ्यर्थना भेजी जा गई है. उम्मीद है कि अगले 2-3 महीने में भर्ती की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. लेकिन ये भर्ती अगर पूरी होती भी है तो भी डेयरी को जरुरत के अनुपात में कार्मिक नहीं मिल पायेंगे.

नये प्लांट के लिये 350 पदों की मांग थी
दरअसल डेयरी ने नये प्लांट के लिये 350 पदों की मांग की थी जबकि इसके मुकाबले 125 पद ही स्वीकृत किये गये हैं. वहीं कालाडेरा पशु आहार प्लांट के लिये मांगे गये 50 पदों के मुकाबले भी 25 पद ही स्वीकृत किये गये हैं. इसी तरह डेयरी के चालू प्लांट में रिक्त पदों के मुकाबले केवल 24 पद स्वीकृत किये गये हैं जो काफी कम हैं. अभी डेयरी ठेकाकर्मियों के साथ ही अतिरिक्त कार्यभार के भरोसे चल रही है. एक-एक अधिकारी-कर्मचारी पर 3 से 4 लोगों का काम है. वहीं सेवानिवृत्तों को भी फिर से काम पर रखकर काम चलाया जा रहा है.
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