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केंद्र को घेरने की कोशिश में लगी गहलोत सरकार से हो गई बड़ी चूक, जानिए पूरा मामला

करीब 35,000 करोड़ की ERCP परियोजना से राजस्थान के हिस्से आने वाले यमुना नदी के पानी को नहरों के माध्यम से पूर्वी राजस्थान तक लाया जाएगा (फाइल फोटो)

करीब 35,000 करोड़ की ERCP परियोजना से राजस्थान के हिस्से आने वाले यमुना नदी के पानी को नहरों के माध्यम से पूर्वी राजस्थान तक लाया जाएगा (फाइल फोटो)

Rajasthan News: राज्यसभा में ERCP को लेकर केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने संसद में बताया कि जल राज्य का विषय है. प्रोजेक्ट के संबंध में आर्थिक कार्य विभाग से जलशक्ति मंत्रालय को कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है.

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जयपुर. ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट को बड़ा मुद्दा बनाकर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश में लगी राजस्थान सरकार की बड़ी चूक सामने आई है. केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत (Gajendra Singh Shekhawat) द्वारा संसद में दी गई जानकारी में यह बात सामने आयी है कि अब तक प्रदेश की ओर से इस संबंध में केंद्र को प्रस्ताव भी नहीं भेजा गया है. प्रदेश के लिए बेहद जरूरी और महत्वाकांक्षी ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ERCP) का मुद्दा अब राजनीतिक बन चुका है. मुख्यमंत्री से लेकर प्रदेश के मंत्री आए दिन इस मामले को लेकर केंद्र पर आरोप लगाते हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रोजेक्ट के संबंध में आर्थिक कार्य विभाग से जलशक्ति मंत्रालय को कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है.

सांसद रामकुमार वर्मा के सवाल पर राज्यसभा में दिया जवाब

राज्यसभा में ईआरसीपी को लेकर सांसद रामकुमार वर्मा ने प्रश्न पूछा था, जिसके उत्तर में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि जल राज्य का विषय है. इसलिए सिंचाई और पेयजल का विकास संबंधित राज्य सरकारों के कार्यक्षेत्र में आता है. इस प्रकार सिंचाई और पेयजल परियोजनाओं की प्लानिंग, निष्पादन, संचालन और रख-रखाव राज्यों द्वारा अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार अपने स्वयं के संसाधनों से किया जाता है. उन्होंने बताया कि जलशक्ति मंत्रालय सिंचाई और बहुउद्देशीय परियोजनाओं के लिए तकनीकी-आर्थिक दृष्टि से मंजूरी देने से पहले इनकी अंतर-राज्य तथा अन्य तकनीकी पहलुओं की दृष्टि से जांच करता है.

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि राज्य सरकारें अपनी आवश्यकताओं के अनुसार बाहरी सहायता के माध्यम से वित्त पोषण के लिए प्रस्ताव आर्थिक कार्य विभाग को भेजती हैं. यह मंत्रालय, जब कभी ऐसे प्रस्ताव आर्थिक कार्य विभाग से प्राप्त होते हैं, उनकी जांच केंद्रीय जल आयोग में करवाता है. शेखावत ने स्पष्ट किया कि ईआरसीपी के संबंध में आर्थिक कार्य विभाग से ऐसा कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है.

2017 में प्रस्तुत किया गया था तकनीकी आर्थिक मूल्यांकन

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि ईआरसीपी के लिए राजस्थान सरकार ने तकनीकी-आर्थिक मूल्यांकन 28 नवंबर 2017 को प्रस्तुत किया था. इस प्रस्ताव में पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों और रास्ते में पड़ने वाले कस्बों, गांवों और टैंकों के साथ-साथ निकटवर्ती कमान क्षेत्र को पेयजल, सिंचाई व औद्योगिक जल उपलब्ध करने की परिकल्पना की गई है. इस प्रोजेक्ट की 50 प्रतिशत भरोसेमंद मुनाफे पर योजना बनाई गई है. सीडब्ल्यूसी द्वारा यह सुझाव दिया गया है कि या तो इस परियोजना को 75 प्रतिशत भरोसेमंद मुनाफे के आधार पर संशोधित किया जाए या यदि राजस्थान अभी भी इस परियोजना को 50 प्रतिशत भरोसेमंद मुनाफे के आधार पर बनाना चाहता है तो मध्य प्रदेश सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) करना होगा.

प्रदेश का बड़ा राजनीतिक मुद्दा

ईस्टर्न राजस्थान कैनल प्रोजेक्ट पिछले चार साल से प्रदेश का सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कई बार इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर प्रदेश को सहयोग न करने के आरोप लगा चुके हैं. करीब 35,000 करोड़ की इस परियोजना से राजस्थान के हिस्से आने वाले यमुना नदी के पानी को नहरों के माध्यम से पूर्वी राजस्थान तक लाया जाएगा. इस परियोजना के पूरे होने के बाद पूर्वी राजस्थान के करीब 14 जिलों को पेयजल सिंचाई और औद्योगिक काम में लेने के लिए इस परियोजना से पानी मिल सकेगा.

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