लाइव टीवी

YouTube से सीखी शूटिंग की बारीकियां और गुलेल से प्रेक्टिस कर बन गई नेशनल शूटर, अब मदद की है दरकार
Jaipur News in Hindi

Asif Khan | News18 Rajasthan
Updated: January 26, 2020, 8:55 PM IST
YouTube से सीखी शूटिंग की बारीकियां और गुलेल से प्रेक्टिस कर बन गई नेशनल शूटर, अब मदद की है दरकार
कलयुग के इस एकलव्य का नाम है उर्मिला राठौड़. उर्मिला बूंदी की रहने वाली है और किसान की बेटी है.

आधुनिक युग में भी एक एकलव्य है जो आर्थिक तंगी (Financial crisis) के हालात से जूझते हुए गुलेल से निशाना लगाते लगाते अब अंतरराष्ट्रीय स्तर (International) पर दस्तक देने लगी है. इस एकलव्य ने शूटिंग की बारिकियों को यूट्यूब (Youtube) पर विडियो देखकर अपने लक्ष्य को साधा है.

  • Share this:
जयपुर. महाभारत में एकलव्य (Ekalavya) की कहानी सबने सुनी है. बिना गुरु के एकलव्य ने तीरंदाजी (Archery) में वो महारथ हासिल की जो अर्जुन शिक्षा पाकर भी नहीं कर पाया. लेकिन द्रोणाचार्य (Dronacharya) ने एकलव्य का अंगूठा दक्षिणा में मांगकर अर्जुन को सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बना दिया. आधुनिक युग में भी एक 'एकलव्य' है जो आर्थिक तंगी (Financial crisis) के हालात से जूझते हुए गुलेल से निशाना लगाते लगाते अब अंतरराष्ट्रीय स्तर (International) पर दस्तक देने लगी है. इस एकलव्य ने शूटिंग की बारिकियों को यूट्यूब (Youtube) पर वीडियो देखकर अपने लक्ष्य को साधा है.

बूंदी की रहने वाली है उर्मिला राठौड़
कलयुग के इस 'एकलव्य' का नाम है उर्मिला राठौड़. उर्मिला बूंदी की रहने वाली है और किसान की बेटी है. उर्मिला बचपन से ही गुलेल से निशाना लगाती रही है. आहिस्ता-आहिस्ता उर्मिला की गुलेल का निशाना पूरे इलाके में मशहूर हो गया. उर्मिला की पढ़ने से ज्यादा निशाना लगाने में रुचि थी. उर्मिला ने तय कि वो निशानेबाजी में ही अपना करियर बनाएगी. गरीब किसान पिता ज़मीन बेचकर उर्मिला के जुनून को हकीकत में बदलने में लग गया. लेकिन अब जब उर्मिला राष्ट्रीय स्तर पर मेडल ला चुकी है और दुनिया में निशानेबाजी के लिए जाना चाहती है, तो उसके पास मदद का कोई सहारा नहीं है. उर्मिला के पास ना खुद की राइफल है और ना ही विदेश जाने के खर्चे का इंतज़ाम.

प्रधानमंत्री को चिठ्ठी लिखकर लगाई मदद की गुहार

उर्मिला की ये कहानी यहीं खत्म नहीं होती है. उर्मिला ने प्रधानमंत्री को चिठ्ठी लिखी और मदद की गुहार लगाई. पीएम ऑफिस की तरफ से जवाब भी आया लेकिन ठोस परिणाम नहीं निकला. स्थानीय नेताओं से लेकर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला तक से उर्मिला अपने पिता के साथ मिलकर गुहार लगा चुकी है, लेकिन राइफल के पैसों का इतंज़ाम कहीं से नहीं हो रहा. उर्मिला मायूस ज़रूर हुई है, लेकिन हार मानने को तैयार नहीं है. कोशिश करते करते उर्मिला एक प्राइवेट शूटिंग एकेडमी पहुंची. वहां के कोच अमरीश सिंह ने फिलहाल टूर्नामेंट खेलने के लिए अपनी राइफल देने का वादा किया है. कुछ हद तक उर्मिला की मुश्किल कम हुई है, लेकिन रास्ता अभी बहुत लंबा है.

यूट्यूब पर विडियो देखकर अपने निशाने को साधा
ये कहानी बिल्कुल एकलव्य से मेल खाती है. एकलव्य अपने दम पर तीरंदाज़ बना वैसे ही उर्मिला ने पहले गुलेल पकड़ी और बाद में बिना कोच के यूट्यूब पर वीडियो देखकर अपने निशाने को साधा. उम्मीद है कि उर्मिला की आवाज़ दूर तक पहुंचेगी और इसे भी अपने सपनों को पूरा करने में मदद मिलेगी. आज नहीं कल सही.ये भी पढ़ें--

JLF-2020: बिना संसाधनों के भी प्रतिभा को मुकाम पर पहुंचाया जा सकता है

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में लगे 'हमको चाहिए आजादी' के नारे, मचा हड़कंप

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए जयपुर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 26, 2020, 7:03 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर