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पूर्व सीएम वसुंधरा राजे से बंगला नं-13 खाली नहीं करवाएगी गहलोत सरकार

महाधिवक्ता ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश के बाद पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने सरकारी वाहन और अन्य सभी सुविधाएं लौटा दी हैं.

महाधिवक्ता ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश के बाद पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने सरकारी वाहन और अन्य सभी सुविधाएं लौटा दी हैं.

राज्य सरकार (State government) पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Former CM Vasundhara Raje) से राजधानी जयपुर का बंगला नं.13 खाली नहीं कराएगी. उन्हें एमएलए कोटे से यह बंगला आवंटित (Allotted) किया जाएगा. इसे लेकर सरकार जल्द ही पॉलिसी (Policy) बनाने जा रही है.

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जयपुर. राज्य सरकार (State government) पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Former CM Vasundhara Raje) से राजधानी जयपुर का बंगला नं. 13 खाली नहीं कराएगी. उन्हें एमएलए कोटे से यह बंगला आवंटित (Allotted) किया जाएगा. इसे लेकर राज्य सरकार (State government) जल्द ही पॉलिसी (Policy) बनाने जा रही है. यह जानकारी महाधिवक्ता एमएस सिंघवी ने सोमवार को हाई कोर्ट (High Court) में दी. वरिष्ठ पत्रकार मिलापचंद डांडिया की ओर से हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर दायर अवमानना याचिका (Contempt petition) पर सोमवार को जस्टिस सबीना की खण्डपीठ में सुनवाई की गई.

राजे ने सरकारी वाहन और अन्य सभी सुविधाएं लौटा दी हैं
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश के बाद पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने सरकारी वाहन और अन्य सभी सुविधाएं लौटा दी हैं. इसके अलावा जिस बंगले में वो रह रही हैं, वह सरकार उन्हें एमएलए कोटे से आवंटित करने जा रही है. इसे लेकर जल्दी ही पॉलिसी बनाई जाएगी. इसके अलावा पूर्व सीएम जगन्नाथ पहाड़िया को बंगला खाली करने के लिए 15 दिन का नोटिस भेजा जा चुका है.

यह है पूरा मामला
पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार ने राजस्थान मंत्री वेतन अधिनियम-1956 में संशोधन करके पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी सुविधाओं का हकदार बनाया था. लेकिन 4 सितंबर, 2019 को हाई कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था. इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है. दूसरी तरफ हाईकोर्ट के आदेश की पालना नहीं होने पर वरिष्ठ पत्रकार मिलापचंद डांडिया ने 16 नवंबर को हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी. वहीं 6 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की एसएलपी खारिज कर दी. उसके बाद सोमवार को हाई कोर्ट में अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई. अब इस मामले में 17 फरवरी को अगली सुनवाई होगी.

पूर्व मुख्यमंत्रियों को ये दी जा रही थी सुविधाएं
राजस्थान मंत्री वेतन अधिनियम-1956 में संशोधन के बाद पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगले समेत 10 लोगों का लिपकीय स्टॉफ दिया जा रहा था. इसके साथ ही 3 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और चालक सहित सरकारी गाड़ी की सुविधा भी प्रदान की गई थी. गाड़ी का राज्य और राज्य के बाहर भरपूर इस्तेमाल की छूट भी इसमें शामिल थी. पूर्व मुख्यमंत्री के अलावा उनका परिवार भी इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकता था.



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