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जयपुर: वर्तमान परिस्थितियों में IPC में है संशोधन की सख्त आवश्यकता- डॉ. मनोज आहूजा
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News18 Rajasthan
Updated: February 24, 2020, 1:34 PM IST
जयपुर: वर्तमान परिस्थितियों में IPC में है संशोधन की सख्त आवश्यकता- डॉ. मनोज आहूजा
डॉ. आहूजा ने कहा कि वर्तमान में बलात्कार और पोक्सो एक्ट के तहत बहुत सारे झूठे मुकदमे दर्ज हो रहे हैं. इसके पीछे मुख्य उद्देश्य दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-357-ए के तहत मिलने वाली मुआवजा राशि प्राप्त करना है.

इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स (Indian Association of Lawyers) की आंध्रप्रदेश इकाई की ओर से विजयवाड़ा में आयोजित 10वीं राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस (National conference) में राजस्थान (Rajasthan) के अजमेर के एडवोकेट डॉ. मनोज आहूजा ने भारतीय दंड संहिता (IPC) में संशोधन (Amendment) की सख्त आवश्यकता जताई है.

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जयपुर. इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स (Indian Association of Lawyers) की आंध्रप्रदेश इकाई की ओर से विजयवाड़ा में आयोजित 10वीं राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस (National conference) को संबोधित करते हुए राजस्थान (Rajasthan) के अजमेर के एडवोकेट डॉ. मनोज आहूजा ने 1860 में बनी भारतीय दंड संहिता (IPC) में संशोधन (Amendment) की आवश्यकता जताई है. डॉ. आहूजा ने कहा कि संहिता में जुर्माने और सजा (Fines and punishment) की जो राशि बताई गई है वो तात्कालीन परिस्थितियों में तो ठीक थी, लेकिन वर्तमान में यह अपर्याप्त (Insufficient) है. इनमें संशोधन किया जाना चाहिए.

वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप इनमें संशोधन किया जाना चाहिए
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध रोधी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष
डॉ. मनोज आहूजा ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा-279 में मात्र एक हजार रुपये जुर्माना है. इसी प्रकार धारा-510 में मात्र 50 रुपये का जुर्माना है. जो व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर शांति भंग करता है उस पर सिर्फ 10 रुपये का जुर्माना होता है. यह अपर्याप्त है. वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप इनमें संशोधन किया जाना चाहिए.



पोक्सो एक्ट के तहत बहुत सारे झूठे मुकदमे दर्ज हो रहे हैं
डॉ. आहूजा ने कहा कि वर्तमान में बलात्कार और पोक्सो एक्ट के तहत बहुत सारे झूठे मुकदमे दर्ज हो रहे हैं. इसके पीछे मुख्य उद्देश्य दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-357-ए के तहत मिलने वाली मुआवजा राशि प्राप्त करना है. इसके अलावा रंजिशवश मुकदमा दर्ज करवाकर अपनी स्वार्थ सिद्धी करना है. ऐसे झूठे मुकदमे दर्ज करवाने वालों के खिलाफ भी प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए.

झूठा मुकदमा दर्ज करवाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए
उन्होंने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा-182 में भी संशोधन करते हुए कम से कम 7 साल की सजा मुकर्रर होनी चाहिए. क्योंकि जिस व्यक्ति के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज हो जाता है उसे उसका पूरा परिवार भुगतता है. ऐसी स्थिति में जब तक झूठा मुकदमा दर्ज करवाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं होगी तब तक झूठे मुकदमे दर्ज होना बंद नहीं होंगे. डॉ मनोज आहूजा अजमेर जिले के केकड़ी के रहने वाले हैं.

 

 

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First published: February 24, 2020, 1:30 PM IST
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