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जेल कोरोना विस्फोट: हाई कोर्ट ने दिखाई सख्ती, रिमांड मिलते ही अब आरोपियों का कराना होगा Covid-19 टेस्ट

उप्र में कोरोना संक्रमण की वजह से अब तक हुई 169 लोगों की मौत.

उप्र में कोरोना संक्रमण की वजह से अब तक हुई 169 लोगों की मौत.

राजस्थान (Rajasthan) के जयपुर (Jaipur) सेंट्रल जेल (Jail) में कोरोनो (Corona) विस्फोट मामले में हाई कोर्ट (High Court) ने प्रसंज्ञान लिया.

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जयपुर. राजस्थान (Rajasthan) के जयपुर (Jaipur) सेंट्रल जेल (Jail) में कोरोनो (Corona) विस्फोट मामले में हाई कोर्ट (High Court) ने प्रसंज्ञान लिया. इसके लिए रविवार को कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए. राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि जब भी किसी कैदी को पुलिस या जेल कस्टडी मिलती है तो पहले उसका कोरोना टेस्ट करवाया जाए. टेस्ट नेगेटिव आने पर ही उसे जेल में भेजा जाएगा. यह आदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत माहन्ती की खंडपीठ ने दिया. अदालत ने मामले की गंभीरता को समझते हुए छुट्टी के दिन रविवार को सुनवाई की.

जयपुर सेंट्रल जेल में 13 अप्रेल को लाए गए एक कैदी के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद एक के बाद एक कैदी कोरोना पॉजिटिव होते चले गए. हालात यह हो गए कि मात्र 48 घंटे में जेल सुप्रीडेंट सहित 129 कैदी कोरोना पॉजिटिव हो गए. जिससे जेल प्रशासन की व्यवस्थाओं की पोल खुल गई.

अधिकारियों को किया था तलब
मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत माहन्ती ने पूरे मामले में प्रसंज्ञान लेते हुए गहरी नाराजगी प्रकट की थी. वहीं एसीएस होम राजीव स्वरूप और डीजी जेल एन आरके रेड्डी को तलब किया था. दोनों अधिकारियों ने खंडपीठ के समक्ष पेश होकर कोरोना फैलने और उसके बाद किए गए आवश्यक उपायों की जानकारी कोर्ट को दी.

हाई कोर्ट ने मामले में दिए अहम निर्देश
सीजे की खंडपीठ ने पूरे मामले में उच्च मानक अपनाने को कहा- जब भी किसी कैदी की कस्टडी हो तो उसका कोरोना टेस्ट करना अनिवार्य है. टेस्ट नेगेटिव आने पर ही उसे जेल में लाया जाए. जेल में उसे पहले 21 दिन आइसोलेशन वार्ड में रखा जाए. जहां जेल चिकित्सक उसका नियमित चेकअप करके रिपोर्ट बनाए. 21 दिन बाद उसमे कोरोना सिम्टम्स नहीं पाए जाने पर ही उसे जनरल कैदियों के साथ रखा जाए, जो स्टाफ आइसोलेशन वार्ड में सेवाएं दें उसकी और उसके परिवार की भी रेंडम जांच हो, जिससे उन्हें कोरोना से बचाया जा सके. जिले का मेडिकल ऑफिसर जेल का निरीक्षण करके अपने सुझाव दे. इन सुझावों के आधार पर जेल प्रशासन आइसोलेशन वार्ड में सुधार करें.

हाई कोर्ट मामले में किया कमेटी का गठन
पूरे मामले में हाई कोर्ट ने एक कमेटी का गठन किया है. इस कमेटी में लीगल एड का सचिव, सीएमएचओ और स्थानीय बार के अध्य्क्ष अथवा महासचिव होंगे. यह समिति अपने क्षेत्र की सेंट्रल जेल, जिला जेल और सब जेल का निरीक्षण करके यह देखेगी की जेलों में कोविड महामारी से बचाव के लिए दी गई केंद्र, राज्य और रालसा की गाइडलाइन की पालना हो रही है या नहीं। सभी कमेटियां अपनी रिपोर्ट रालसा के सदस्य सचिव को सौपेंगी. वहीं सदस्य सचिव और जेलों पर काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता स्मिता चक्रवर्ती अपने सुझावों के साथ रिपोर्ट कोर्ट में सब्मिट करेंगे। वहीं मामले की अगली सुनवाई 27 मई को होगी.

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