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जयपुर: करोड़ों का कीटनाशक गटक चुकी 'टिड्डियां', फिर भी बरकरार है 'खौफ'
Jaipur News in Hindi

Dinesh Sharma | News18 Rajasthan
Updated: February 4, 2020, 6:20 PM IST
जयपुर: करोड़ों का कीटनाशक गटक चुकी 'टिड्डियां', फिर भी बरकरार है 'खौफ'
कृषि क्षेत्र में टिड्डियों पर नियंत्रण के लिए बेन्डियोकार्ब, क्लोरपायरीफॉस, डेल्टामेथ्रिन, डिफ्लूबेन्जूरोन और लेम्बडासाइलोथ्रिन जैसे कीटनाशक उपयोग किए जा रहे हैं.

सरहद पार पाकिस्तान (Pakistan) से आए उड़ते आतंक 'टिड्डियों' (Locusts) ने प्रदेश के सामने कई समस्याएं खड़ी कर दी हैं. टिड्डी टेरर (Locusts terror) पर नियंत्रण पाने के लिए करोड़ों रुपया खर्च करने के बावजूद इनका खतरा (Risk) बरकरार है और किसानों को अपनी फसल को बचाना मुश्किल हो रहा है.

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जयपुर. सरहद पार पाकिस्तान (Pakistan) से आए उड़ते आतंक 'टिड्डियों' (Locusts) ने प्रदेश के सामने कई समस्याएं खड़ी कर दी हैं. टिड्डी टेरर (Locusts terror) पर नियंत्रण पाने के लिए करोड़ों रुपया खर्च करने के बावजूद इनका खतरा (Risk) बरकरार है और किसानों को अपनी फसल को बचाना मुश्किल हो रहा है. आपको जानकर हैरानी होगी कि ये टिड्डियां अब तक करोड़ों रुपए का कीटनाशक (Pesticide) गटक चुकी है. प्रदेश में कीटनाशक की सालाना खपत करीब साढ़े 3 लाख मीट्रिक टन होती है. लेकिन किसान (Farmer) टिड्डियों से अपनी फसल को बचाने के लिए ही अब तक करीब 1 लाख मीट्रिक टन कीटनाशक का उपयोग कर चुके हैं.

पशु-पक्षियों पर संकट हो सकता है
टिड्डियों को नियंत्रित करने के लिए बड़े स्तर पर कीटनाशकों का प्रयोग किया जा रहा है. आने वाले दिनों में इनसे कई खतरों की भी आशंकाएं जाहिर की जा रही है. जहरीले कीटनाशकों से पर्यावरण, पशु-पक्षी और भूजल के लिए खतरा हो सकता है. इसके साथ ही मानव स्वास्थ्य पर भी ये विपरीत प्रभाव डाल सकते हैं. कीटनाशकों से जो टिड्डियां मारी जा रही हैं उनका भी सही निस्तारण नहीं होने से इन्हें खाने वाले पशु-पक्षियों पर संकट हो सकता है.

इन कीटनाशकों का किया जा रहा है उपयोग



कृषि क्षेत्र में टिड्डियों पर नियंत्रण के लिए बेन्डियोकार्ब, क्लोरपायरीफॉस, डेल्टामेथ्रिन, डिफ्लूबेन्जूरोन और लेम्बडासाइलोथ्रिन जैसे कीटनाशक उपयोग किए जा रहे हैं. वहीं मैलाथियान 96 प्रतिशत जो बेहद जहरीला कीटनाशक है उसका उपयोग टिड्डी नियंत्रण संगठन द्वारा गैर कृषि क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण के लिए किया जा रहा है. इस कीटनाशक के छिड़काव के लिए आधुनिक मशीनों के साथ ही सावधानी की बेहद जरुरत होती है.

यह है टिड्डी टेरर के हालात
- प्रदेश के 12 जिले टिड्डी के प्रकोप से प्रभावित हैं.
- इनका 5 लाख 81 हजार हैक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र टिड्डियों की चपेट में है.
- अब तक 5 लाख 25 हजार हैक्टेयर क्षेत्र को उपचारित किया जा चुका है.
- टिड्डी नियंत्रण संगठन द्वारा बड़े स्तर पर कीटनाशक का प्रयोग किया जा रहा है.
- 3 लाख 88 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में कीटनाशक का छिड़काव किया गया है.
- विभागीय अनुदान से 51 हजार 592 किसानों ने कीटनाशक का प्रयोग किया है.
- राज्य सरकार द्वारा इन कीटनाशकों पर 100 फीसदी अनुदान दिया जा रहा है.
- किसानों ने अपने स्तर पर 16 हजार 449 हैक्टेयर क्षेत्र उपचारित किया.

सरकार का करोड़ों रुपया बर्बाद हो चुका है
इतने बड़े स्तर पर कीटनाशकों के प्रयोग के बावजूद टिड्डियां अभी काबू में नहीं आ पा रही है और कीटनाशकों का छिड़काव लगातार जारी है. कीटनाशकों के साथ ही दूसरे संसाधनों पर भी सरकार का करोड़ों रुपया बर्बाद हो चुका है, लेकिन टिड्डियों का खौफ अभी बरकरार है.

 

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First published: February 4, 2020, 6:17 PM IST
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