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राजस्थान: इंजीनियरों ने 5000 की जगह 26 हजार गांवों की भेज दी सूचना, फर्जी रिपोर्ट से लटक गई योजना

राजस्थान जल विभाग के इंजीनियरों की केंद्र सरकार को पाइप्ड वॉटर सप्लाई पर रिपोर्ट भेजने के मामले में बड़ी लापरवाही सामने आई है

राजस्थान जल विभाग के इंजीनियरों की केंद्र सरकार को पाइप्ड वॉटर सप्लाई पर रिपोर्ट भेजने के मामले में बड़ी लापरवाही सामने आई है

जलदाय विभाग ने जेजेएम योजना में पाइप्ड वाटर सप्लाई (Piped Water Supply) वाले गांवों की संख्या 5,000 गांव की जगह 26,000 गांव भेज दी है. जबकि वास्तव में राजस्थान में सिर्फ 5,000 गांव ऐसे हैं, जहां पर पाइप्ड वाटर सप्लाई है. वहीं 21,000 गांव ऐसे हैं जहां पर सिंगल हैंडपंप लगे हैं या सतही स्रोत्र से राज्य सरकार की सिंगल प्वाइंट पेयजल वितरण व्यवस्था है

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जयपुर. राजस्थान (Rajasthan) में इंजीनियरों द्वारा केंद्र सरकार को पाइप्ड वॉटर सप्लाई (Piped Water Supply) वाले गांवों की संख्या की गलत सूचना भेजने की बात सामने आई है. इंजीनियरों की इस लापरवाही के कारण केंद्र की हर घर में नल कनेक्शन देने की जल जीवन मिशन योजना (Jal Jeevan Mission Yojna) अब राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) के मुश्किल बन सकती है. इससे केंद्र की ओर से मिलने वाली राशि जारी नहीं हो सकी है. जलदाय विभाग ने जेजेएम योजना में पाइप्ड वाटर सप्लाई वाले गांवों की संख्या 5,000 गांव की जगह 26,000 गांव भेज दी है. जबकि वास्तव में राजस्थान में सिर्फ 5,000 गांव ऐसे हैं, जहां पर पाइप्ड वाटर सप्लाई है. वहीं 21,000 गांव ऐसे हैं जहां पर सिंगल हैंडपंप लगे हैं या सतही स्रोत्र से राज्य सरकार की सिंगल प्वाइंट पेयजल वितरण व्यवस्था है.

जानकारी के अनुसार IMIS पोर्टल पर Non-PWS और PWS गांवों का रिकॉर्ड जो केंद्र सरकार को भेजा गया है उसमें 21,000 Non-PWS गांवों को भी PWS श्रेणी में भर दिया गया है. केंद्र सरकार को भेजी रिपोर्ट के अनुसार जलदाय विभाग के रिकॉर्ड में राजस्थान में 26,000 गांवों में पाइप्ड वाटर सप्लाई सिस्टम पूरा हो चुका है.

इंजीनियरों ने प्रदेश के कुल करीब 45,000 गांवों में से जलदाय विभाग के इंजीनियरों ने 26,000 में पेयजल योजना सप्लाई इंफ्रास्ट्र्क्चर को पूरी तरह से तैयार बताया है. राज्य सरकार द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार 26,000 गांवों में पेयजल सप्लाई के लिए पाइपलाइन बिछा दी गई है और सभी घरों में नल कनेक्शन कर दिए गए हैं. 26,000 से ज्यादा गांवों के सभी घरों में भूजल या सतही स्रोत्र से पेयजल आपूर्ति नियमित रूप से की जा रही है.

मार्च 2021 तक केंद्र सरकार ने बंद किया पोर्टल 

PHED मुख्य अभियंता, ग्रामीण जलदाय विभाग रामकरण मीणा के अनुसार पोर्टल पर जो रिपोर्ट भेजी है उसे मार्च 2021 तक केंद्र सरकार ने बंद कर दिया है. केंद्र इस रिपोर्ट पर प्लानिंग कर रही है और अप्रैल 2021 में इस पोर्टल को फिर से खोलेगी. वहीं, बताया जा रहा है कि यदि मार्च 2021 के पहले यह आंकड़े संशोधित नहीं हो पाए तो राजस्थान के 21,000 से ज्यादा गांवों की पेयजल योजनाओं को केंद्र सरकार की हिस्से की राशि नहीं मिल सकेगी.

जलदाय विभाग के इंजीनियरों ने जो फर्जी आंकड़े केंद्र सरकार के सामने पेश किए हैं वो गलत तो हैं ही साथ ही बेहद शर्मनाक भी हैं, क्योंकि जो रिपोर्ट भेजी गई है उसमें कई जिलों में जितने कुल गांव की संख्या है उससे तीन गुना ज्यादा गांवों में पाइप्ड वाटर स्कीम को पूरा बता दिया गया है.

केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के जल जीवन मिशन को भेजी गई जिलेवार पाइप्ड वाटर सप्लाई वाले गांवों के आंकड़े हैरान करने वाले हैं. जलदाय महकमे के अनुसार बांसवाड़ा जिले में कुल 368 गांव हैं जबकि बांसवाड़ा जिले के 1,176 गांवों को पाइप्ड वाटर सप्लाई योजना से जोड़ दिया गया है. ऐसा ही हाल झुंझुनूं जिले का है जहां IMIS पोर्टल पर गांवों की कुल संख्या 686 है जबकि जिले भर के 1,178 गांवों में पेयजल योजना को लागू बता दिया गया है.

आधा दर्जन से ज्यादा जिलों के गांवों की संख्या को फर्जी दिखाया गया है जिससे इन जिलों के 21,000 से ज्यादा गांव में जल जीवन मिशन योजना को नजरअंदाज किया जा सकता है. जिलेवार जलदाय विभाग की लापरवाही राज्य सरकार को भारी पड़ सकती है.

जिले का नाम – जिले में कुल गांव- जिले में PWS गांव

बांसवाड़ा- 368 – 1176
झुंझुनूं- 686 – 1178
डूंगरपुर- 162 – 434
प्रतापगढ़- 47 – 108
सवाईमाधोपुर -234 – 288
बूंदी- 103 – 118
झालावाड़- 1055 – 1058

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