BSP से कांग्रेस में आए विधायकों ने बढ़ाई गहलोत की टेंशन, आपस में मीटिंग की; पायलट से बात की

सचिन पायलट से उनके समर्थक कांग्रेस विधायकों के मुलाकात करने को गहलोत सरकार के संकट में घिरने से जोड़कर देखा जा रहा है (फाइल फोटो)

डेढ़ वर्ष पूर्व बहुजन समाज पार्टी (BSP) से पाला बदलकर कांग्रेस में आए सभी छह विधायकों ने सोमवार को विधायक संदीप यादव के जयपुर स्थित आवास पर बैठक की. मीटिंग में लाखन सिंह समेत तीन विधायक मौजूद रहे जबकि शेष तीन विधायक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से जुड़े

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जयपुर. राजस्थान में जारी सियासी घमासान गहराता जा रहा है. सोमवार को सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) से कांग्रेस में शामिल हुए विधायकों से फोन पर बातचीत की है. सूत्रों के मुताबिक पायलट ने इन विधायकों से कहा कि वो अपना पक्ष मजबूती से रखें. सोमवार को ही बीएसपी (BSP) से कांग्रेस में आए सभी छह विधायकों ने मीटिंग की. यह बैठक जयपुर (Jaipur) में विधायक संदीप यादव (MLA Sandeep Yadav) के आवास पर हुई. बैठक में लाखन सिंह समेत तीन विधायक मौजूद रहे जबकि शेष तीन विधायक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से जुड़े.

बैठक में इन विधायकों ने मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम और खुद को अभी तक मंत्री नहीं बनाए जाने पर चर्चा की. संदीप यादव ने कहा कि कई विभागों में मंत्री नहीं हैं इसलिए मंत्रिमंडल का विस्तार होना चाहिए. उन्होंने आशा जाहिर करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जल्दी मंत्रिमंडल का विस्तार करेंगे. डेढ़ वर्ष पूर्व बीएसपी छोड़कर आए विधायकों को मंत्री बनाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमने कांग्रेस में शामिल होकर गहलोत सरकार को स्थायित्व दिया, इसलिए अब मुख्यमंत्री को हमारे मान और सम्मान को देखना है.

वहीं, विधायक राजेंद्र गुढ़ा ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा कि जब 11 महीने पहले सचिन पायलट की अगुवाई में 19 विधायक छोड़कर चले गए थे तब अगर हम छह विधायक और अन्य 10 निर्दलीय विधायक साथ नहीं देते तो गहलोत सरकार की आज पहली बरसी होती है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस आलाकमान को यह गणित समझ में क्यों नहीं आ रहा कि यह सरकार तो उसी वक्त चली जाती, लेकिन हमने इसे बचा ली थी.

बता दें कि पिछले वर्ष जुलाई में सचिन पायलट की बगावत के बाद इन छह विधायकों के समर्थन से ही गहलोत सरकार संकट से बच गई थी. तब इन विधायकों में से तीन को मंत्री बनाने और बाकी को आयोग-बोर्ड में जिम्मेदारी देने की बात कही गई थी. हालांकि यह विधायक कह रहे हैं उन्होंने बिना शर्त सरकार को अपना समर्थन दिया था. लेकिन अब लोग मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर दबाब बना रहे हैं.

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