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जयपुर: सदन में CAA, NRC और NPR के खिलाफ संकल्प पेश, ये हैं मुख्य बिन्दु
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Goverdhan Chaudhary | News18 Rajasthan
Updated: January 25, 2020, 4:39 PM IST
जयपुर: सदन में CAA, NRC और NPR के खिलाफ संकल्प पेश, ये हैं मुख्य बिन्दु
संकल्प में लिखा है कि सीएए संविधान की मूल भावना का उल्लंघन करता है.

राजस्थान विधानसभा (Rajasthan Legislative Assembly) में शनिवार को सीएए, एनआरसी और एनपीआर (CAA, NRC and NPR) तीनों के खिलाफ संकल्प (Resolution) पेश किया गया. संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने इसे सदन में पेश किया. संकल्प पेश करते ही बीजेपी (BJP) ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई.

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जयपुर. राजस्थान विधानसभा (Rajasthan Legislative Assembly) में शनिवार को सीएए, एनआरसी और एनपीआर (CAA, NRC and NPR) तीनों के खिलाफ संकल्प (Resolution) पेश किया गया. संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने इसे सदन में पेश किया. संकल्प पेश करते ही बीजेपी (BJP) ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई. नाराज  बीजेपी विधायकों ने वेल में आकर नारेबाजी शुरू कर दी. सीएए, एनआरसी और एनपीआर इन तीनों के खिलाफ संकल्प लाने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है. अब तक केरल (Kerala) और पंजाब (Punjab) विधानसभा में सीएए के खिलाफ ही प्रस्ताव पारित हुआ है.

सीएए संविधान की मूल भावना का उल्लंघन करता
संकल्प में लिखा है कि सीएए संविधान की मूल भावना का उल्लंघन करता है. देश के एक बड़े वर्ग में आशंका है कि एनपीआर और एनआरसी की प्रस्तावना एक ही है. एनपीआर के नए प्रावधानों को वापस लेने के बाद ही जनगणना के काम हो. नागरिकता संशोधन अधिनियम के माध्यम से हाल में किए गए संशोधन धार्मिक आधार पर लोगों में विभेद करते हैं. यह व्यक्तियों के एक वर्ग को भारत की नागरिकता से वंचित करने के लिए बनाए गए हैं.

लोगों के मन में उपजी ऐसी आशंकाओं को दूर करें

इसके अलावा देश में रह रहे सभी लोगों से चाही जाने वाली प्रस्तावित अतिरिक्त सूचना से बड़े पैमाने पर जनसंख्या को बड़ी असुविधा होने की संभावना है. इसका कोई वास्तविक लाभ नहीं होगा. आसाम राज्य इसका जीवंत उदाहरण है. इसलिए केंद्र सरकार सीएए के संशोधन वापस लेने के साथ लोगों के मन में उपजी ऐसी आशंकाओं को भी दूर करें जो एनपीआर में अपडेट के लिए चाही गई हैं. उन्हें भी वापस लेना चाहिए. एनपीआर में संशोधन वापस लेने के बाद ही उसके अधीन जनगणना का काम हाथ में लेना चाहिए.

सीएए का लक्ष्य धर्म के आधार पर अवैध प्रवासियों में विभेद करना है
संकल्प में लिखा है कि हमारे देश के संविधान में यह स्पष्ट कथन है कि भारत एक पंथ निरेपक्ष देश हैं. यह संविधान की आधारभूत विशेषता है और इसे बदला नहीं जा सकता. इसके साथ ही संविधान का अनुच्छेद-14 स्पष्ट रूप से यह निश्चित करता है भारत के राज्य क्षेत्र में कोई व्यक्ति विधि के समक्ष समता या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं होगा. नागरिकता संशोधन अधिनियम-2019 यानी सीएए का लक्ष्य धर्म के आधार पर अवैध प्रवासियों में विभेद करना है. धर्म के आधार पर ऐसा विभेद संविधान के प्रतिष्ठित पंथ निरपेक्ष आदर्शों के अनुरूप नहीं है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है. 

 

पहली बार कोई ऐसा कानून लाया गया है
संकल्प में कहा गया है कि आजादी के बाद देश के इतिहास में पहली बार कोई ऐसा कानून लाया गया है जो धर्म के आधार पर लोगों में विभेद करता है. इससे देश का पंथ निरपेक्ष ताना बाना खतरे में पड़ जाएगा. इसके अलावा अन्य पड़ोसी देश श्रीलंका, म्यांमार, नेपाल और भूटान देशों से आने वाले प्रवासियों के संबंध में सीएए में कोई प्रावधान नहीं किया गया है. ऐसा क्यों किया गया ? इसकी आशंका भी जनमानस में है. यही कारण है कि सीएए का देशभर में व्यापक विरोध हुआ है. राजस्थान में इसके खिलाफ प्रदर्शन देखे गए हैं लेकिन वो शांतिपूर्ण रहे हैं.

 

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First published: January 25, 2020, 12:43 PM IST
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