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जान जोखिम में डाल इस 'तहसीलदार' ने जीत लिया दिल! ग्रामीण हुए मुरीद
Jaipur News in Hindi

Shripal Shaktawat | News18 Rajasthan
Updated: January 28, 2020, 6:43 PM IST
जान जोखिम में डाल इस 'तहसीलदार' ने जीत लिया दिल! ग्रामीण हुए मुरीद
खुद की जान जोखिम डालने के सवाल पर मुकंद सिंह शेखावत कहते हैं कि अच्छा तो तब होता, जब एक जान बच जाती.

राजस्थान के भीलवाड़ा (Bhilwara) जिले में तैनात 46 वर्षीय तहसीलदार मुकंद सिंह शेखावत (Mukand Singh Shekhawat) के चर्चे आज चारों ओर हैं. वजह है जान जोखिम में डाल कुएं से एक बुजुर्ग के शव को निकालने का ऐसा काम किया, जिसे रेस्क्यू टीम (Rescue team) ने भी करने से इंकार कर दिया था.

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जयपुर. राजस्थान (Rajasthan) के भीलवाड़ा (Bhilwara) जिले में तैनात 46 वर्षीय तहसीलदार मुकंद सिंह शेखावत (Mukand Singh Shekhawat) के चर्चे आज चारों ओर हैं. वजह है जान जोखिम में डाल कुएं से एक बुजुर्ग के शव को निकालने का ऐसा काम, जिसे रेस्क्यू टीम (Rescue team) ने भी करने से इंकार कर दिया था. घटना भीलवाड़ा जिले के कोटड़ी (Kotdi) तहसील के खोरी खेड़ी गांव की है. गांव के निवर्तमान सरपंच शोभालाल के अनुसार 80 साल के बालू रैबारी को कुएं से निकालने के लिए तहसीलदार ने जान जोखिम में डालकर जिस तरह हिम्मत दिखाई, उससे हर कोई उनका मुरीद बन गया है.

कुएं में गिरने से हुई मौत
ग्रामीणों के मुताबिक बालू रैबारी की मौत बिना मुंडेर के कुएं में गिरने से हुई. बालू उस वक्त फिसलकर कुएं में गिर गए, जब गेहूं की फसल को पानी पिलाते वक्त आई एक गाय को खेत से निकालने जा रहे थे. 27 जनवरी की शाम घटना की जानकारी मिली तो पूरा प्रशासन भीलवाड़ा के पॉलीटेक्निक कॉलेज में तीसरे चरण के पंचायत चुनाव की तैयारियों में लगा हुआ था. चूंकि मामला एक बुजुर्ग की जिंदगी और कानून-व्यवस्था से जुड़ा था. लिहाजा एक टीम तुरंत रवाना कर दी गई. साथ ही पहले हिन्दुस्तान जिंक द्वारा संचालित होती रही जिले की वेदांता समूह की आगूंचा माइंस से एक रेस्क्यू टीम भेजने का आग्रह भी किया गया. ग्रामीणों के मुताबिक कुएं में पानी कम होने से बुजुर्ग के जिंदा होने की उम्मीद थी. इसलिए उसे निकालने के लिए जहाजपुर के तहसीलदार मुकंद सिंह शेखावत भी मौके पर मय टीम रवाना हो गए. दूसरी तरफ बुजुर्ग के जिंदा होने की उम्मीद में बैठे ग्रामीणों का सब्र जवाब देता जा रहा था.

रेस्क्यू टीम का इंकार



इस बीच मौके पर आगूंचा माइंस की रेस्क्यू टीम भी आ चुकी थी. लेकिन कुएं में जहरीली गैस-मीथेन के होने और कंपनी के डाइरेक्टर जनरल माइनिंग सेफ्टी की कुएं में उतरने की मंजूरी न मिलने के कारण रेस्क्यू टीम ने उसमें उतरने से इंकार कर दिया. गांव के एक बुजुर्ग को अपनी आंखों के सामने मौत के मुंह में देख लोग अधीर हो रहे थे. ऐसे में रेस्क्यू टीम के इंकार से कानून-व्यवस्था का मसला प्रशासन के लिए चुनौती बन रहा था. सबकी चिंता यही थी कि रात के घने अंधेरे में बुजुर्ग बालू को बचाए तो कौन ? लोग सोच ही रहे थे कि इसी बीच कोटड़ी तहसील का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे जहाजपुर तहसीलदार मुकंद सिंह शेखावत ने खुद कुएं में उतर बुजुर्ग को निकालने का फैसला किया.

तहसीलदार को कुएं में उतरते देख कर्मचारी ठिठके
ऑक्सीजन सिलेंडर लगाकर अपने तहसीलदार को कुएं में उतरते देख कर्मचारी ठिठके. देखते ही देखते राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी तहसीलदार मुकंद सिंह शेखावत ने कुएं में उतर बालू को बाहर निकालने का साहसिक कार्य कर दिखाया. शेखावत कहते हैं कि एक तरफ कुएं में जहरीली-मीथेन गैस का डर था. दूसरी तरफ बुजुर्ग के जिंदा मिलने की उम्मीद. उम्मीद आशंका पर भारी पड़ी तो बिना किसी भय के कुएं में उतरने का फैसला कर लिया. सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ इलाके की छोटी रोरू गांव निवासी तहसीलदार शेखावत को इस बात का मलाल है कि वे खुद पहले खेती-बाड़ी से जुड़े रहे हैं. कुएं में उतरने का अनुभव नहीं होने के बावजूद कुएं में उतरे भी, लेकिन चाहकर भी बुजुर्ग बालू को जिंदा नहीं निकाल पाए. खुद की जान जोखिम डालने के सवाल पर मुकंद सिंह शेखावत कहते हैं कि अच्छा तो तब होता, जब एक जान बच जाती.  शेखावत का यही साहसिक कार्य सोशल मीडिया पर कुछ इस तरह छाया है कि गांव के निवर्तमान सरपंच शोभालाल के अंदाज में हर कोई मुकंद सिंह शेखावत को सलाम कर रहा है.

 

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First published: January 28, 2020, 3:21 PM IST
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