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jaipur sikar rail route going to be 100 years old both are connected by rail in july 1922 unsurpassed achievement of nwr irctc rjsr

सुखद घड़ी: 100 बरस का होने जा रहा है जयपुर-सीकर रेल मार्ग, जुलाई 1922 में जुड़े थे दोनों शहर

जयपुर सबसे पहले 1916 में रींगस के साथ जुड़ा था. उसके बाद रींगस तक आई हुई रेल लाइन को 1922 में सीकर तक जोड़ दिया गया.

जयपुर सबसे पहले 1916 में रींगस के साथ जुड़ा था. उसके बाद रींगस तक आई हुई रेल लाइन को 1922 में सीकर तक जोड़ दिया गया.

जयपुर और सीकर आपस में जुलाई 1922 में रेल मार्ग से जुड़े थे: उत्तर पश्चिम रेलवे के लिये बेहद रोमांचक घड़ी आने वाली है. इस रेलवे जोन का जयपुर-सीकर रेल मार्ग (Jaipur-Sikar Rail Route) आगामी जुलाई में 100 बरस का होने जा रहा है. वर्ष 1922 में जयपुर से सीकर का सफर तय करने में काफी लंबा वक्त लग जाता था. लेकिन अब इसी रूट पर महज दो घंटे में पहुंचा जा सकता है. यहां ब्रोडगेज बनने तक का सफर बेहद दिलचस्प रहा है.

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जयपुर. उत्तर पश्चिम रेलवे एक नायाब उपलब्धि हासिल करने जा रहा है. इस रेलवे जोन के तहत आने वाला राजस्थान का जयपुर-सीकर रेल मार्ग (Jaipur-Sikar Rail Route) 100 बरस पूरे करने जा रहा है. देश में ऐसे गिने-चुने ही रेल मार्ग हैं जो 100 बरस पुराने हैं. क्योंकि तब महानगरों और चुनिंदा शहरों में ही रेल लाइन बिछी थी. लेकिन राजस्थान के जयपुर और सीकर वो खुशकिस्मत शहर रहे जो उस समय छोटे होते हुए भी महानगरों से जुड़ गये थे. सीकर के अलावा रींगस ने भी रिकॉर्ड बनाया है क्योंकि रींगस और जयपुर के मार्ग को 106 बरस बीत चुके हैं.

उत्तर पश्चिम रेलवे ने एक लघु डॉक्यूमेंट्री बनाई है. यह जयपुर-रींगस और सीकर के 100 बरस पुराने रेल मार्ग के बनने की कहानी और उसके लगातार विकास को दर्शाती है. बहुत कम लोग जानते होंगे कि सीकर और जयपुर के बीच बिछी रेल लाइन को जुलाई में 100 बरस पूरे होने जा रहे हैं. जयपुर सबसे पहले 1916 में रींगस के साथ जुड़ा था. उसके बाद रींगस तक आई हुई रेल लाइन को 1922 में सीकर तक जोड़ दिया गया. इस तरह 2022 जुलाई में इस रूट को 100 साल पूरे हो जाएंगे.

यहां ब्रोडगेज बनने तक का सफर बेहद दिलचस्प रहा है
उत्तर पश्चिम रेलवे के सीपीआरो कैप्टन शशि किरण के अनुसार शुरुआती दौर में जयपुर से सीकर के बीच बहुत ही कम स्पीड में मीटर गेज लाइन शुरू की गई थी. जयपुर से सीकर का सफर तय करने में 1922 में काफी लंबा वक्त लग जाता था. लेकिन अब इसी रूट पर दो घंटे में जयपुर से सीकर पहुंचा जा सकता है. यहां ब्रोडगेज बनने तक का सफर बेहद दिलचस्प रहा है. ब्रॉडगेज शुरू होने के बाद शेखावाटी के चूरू, झुंझूनूं और सीकर की जैसे मानो तस्वीर ही बदल गई.

रेलवे के इतिहास का दस्तावेज है ये मार्ग
ये रेल मार्ग रेलवे के इतिहास का वो दस्तावेज है जिसने गुलाम भारत से आजाद भारत का सफर देखा है और तेजी से बढ़ते भारत का साक्षी बना. देश में पहली रेल 1853 में चली थी. उसके बाद कुछ ही मार्गों पर ट्रेनों का शुरू किया गया था. सीकर ऐसे ही मार्ग में शामिल हुआ और 100 बरस का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया.

Tags: Indian Railway news, Jaipur news, Rajasthan news, Sikar news

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