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जयपुर: राज्य की नई आबकारी नीति जारी, शराब की दुकानों की संख्या में नहीं होगी बढ़ोतरी
Jaipur News in Hindi

Prem Meena | News18 Rajasthan
Updated: February 8, 2020, 3:41 PM IST
जयपुर: राज्य की नई आबकारी नीति जारी, शराब की दुकानों की संख्या में नहीं होगी बढ़ोतरी
नई आबकारी नीति में वार्षिक लाइसेंस फीस में बदलाव किया गया है.

प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार (Ashok Gehlot Government) ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए नई आबकारी नीति (Excise Policy) जारी कर दी है. राज्य के वित्त विभाग ने शनिवार को इसके आधिकारिक आदेश जारी (Order issued) कर दिए हैं.

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जयपुर. प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार (Ashok Gehlot Government) ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए नई आबकारी नीति (Excise Policy) जारी कर दी है. राज्य के वित्त विभाग ने शनिवार को इसके आधिकारिक आदेश जारी (Order issued) कर दिए हैं. नई आबकारी नीति में आबकारी बंदोबस्त की अवधि का जिक्र किया गया है. नई नीति के अनुसार 1 अप्रैल, 2020 से लाइसेंस (License) एक साल के लिए होगा. उसके बाद आगे एक साल की अवधि के लिए लाइसेंस रिन्यू किया जा सकेगा. नई आबकारी नीति के अनुसार वित्तीय वर्ष 2020-21 में 5 ड्राई-डे (Dry day) रहेंगे. इनमें गणतंत्र दिवस, महात्मा गांधी की पुण्यतिथि, महावीर जयंती, स्वतंत्रता दिवस और महात्मा गांधी जयंती को सूखा दिवस रहेगा.

शराब और भांग के ठेकों की लॉटरी निकाली जाएगी
गहलोत सरकार ने सामाजिक सरोकारों का दायित्व निभाते हुए मदिरापान को कम करने के मकसद से शराब की दुकानें नहीं बढ़ाने का फैसला लिया है. नगरीय क्षेत्र में इस बार भी पिछली बार की तरह शराब की 1000 ही दुकानें रहेंगी. 10 लाख रुपए तक निर्धारित वार्षिक राशि वाले समूह के लिए 25,000 आवेदन शुल्क रखा गया है. 10 लाख रुपए से अधिक निर्धारित वार्षिक समूह वाले के लिए 30 हजार रुपए आवेदन शुल्क रखा गया है. नई आबकारी नीति में अवैध शराब पर शिकंजा कसने की बात भी कही गई है. इस बार प्रदेश में शराब और भांग के ठेकों की लॉटरी निकाली जाएगी. शराब की दुकानों के लाइसेंस के लिए तय की गई 4.% धरोहर राशि राजकोष में जमा करानी होगी.

नई आबकारी नीति के ये हैं अहम बिन्दु

- इस बार प्रदेश में दुकानों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं होगी.
- नगरीय क्षेत्र में 1000 शराब की दुकानें ही रहेंगी.
- वार्षिक लाइसेंस फीस में किया बदलाव.- जयपुर और जोधपुर के लिए सालाना बेसिक लाइसेंस फीस 26 लाख रुपए रहेगी.
- शेष 5 संभाग मुख्यालयों समेत माउंट आबू और जैसलमेर के लिए यह 22 लाख रुपये होगी.
- अलवर, सीकर, भीलवाड़ा, पाली और गंगानगर जिला मुख्यालय के लिए बेसिक लाइसेंस फीस 16 लाख रुपए होगी.
- शेष जिला मुख्यालय और कोटपुतली, ब्यावर, किशनगढ़, कुचामन सिटी, मकराना, देवली, रामगंज मंडी, झालरापाटन, भवानी मंडी, आबूरोड़, बालोतरा, भीनमाल, गंगापुर सिटी, हिंडौन सिटी, निम्बाहेड़ा, फलौदी, सागवाड़ा और सूरतगढ़ नगरपालिका/ नगरपरिषद क्षेत्र में लाइसेंस फीस 15 लाख रुपए रहेगी.

- चतुर्थ श्रेणी की नगरपालिकाओं को छोड़कर शेष पालिकाओं में 13 लाख रुपए लाइसेंस फीस होगी.

कमेटी की सिफारिशों को सरकार ने स्वीकारा
गहलोत सरकार ने नई आबकारी नीति को लेकर जो कमेटी बनाई थी उस कमेटी ने अनुशंसा की है कि सरकार शराब के दुष्परिणामों के बारे में जन जागरूकता अभियान चलाए. माना जा रहा है कि कमेटी की सिफारिशों को सरकार ने स्वीकार कर लिया है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश पर वित्त विभाग और आबकारी विभाग के अधिकारियों की एक कमेटी का गठन किया गया था. कमेटी ने बिहार का दौरा कर वहां जारी शराबबंदी का अध्ययन किया था. अब कमेटी गुजरात का भी दौरा करेगी और शराबबंदी का अध्ययन करेगी.

सामाजिक सरोकारों का पूरा ध्यान रखा
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मदिरापान को हतोत्साहित करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए इसे अब जमीनी जमीनी धरातल पर उतार दिया है. नई आबकारी नीति में सामाजिक सरोकारों का पूरा ध्यान रखा गया है. संभवत यही कारण है कि सरकार ने शराब के ठेकों की संख्या नहीं बढ़ाई है.

 

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First published: February 8, 2020, 3:02 PM IST
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