जयपुर: सरकार ने राजस्थान हाउसिंग बोर्ड को बनाया जबर्दस्त 'पावरफुल', अब ये शक्तियां मिलेंगी
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जयपुर: सरकार ने राजस्थान हाउसिंग बोर्ड को बनाया जबर्दस्त 'पावरफुल', अब ये शक्तियां मिलेंगी
बोर्ड की ओर से लंबे समय से कानून में संशोधन की कवायद की जा रही थी.

राज्य सरकार (State government) ने राजस्थान हाउसिंग बोर्ड (Rajasthan Housing Board) को जबर्दस्त पावरफुल (Powerful) बना दिया है. गुरुवार को विधानसभा (Assembly) में राजस्थान आवासन बोर्ड (संशोधन) विधेयक, 2020 पारित (Passed) कर दिया गया.

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जयपुर. राज्य सरकार (State government) ने राजस्थान हाउसिंग बोर्ड (Rajasthan Housing Board) को जबर्दस्त पावरफुल (Powerful) बना दिया है. गुरुवार को विधानसभा (Assembly) में राजस्थान आवासन बोर्ड (संशोधन) विधेयक, 2020 पारित (Passed) कर दिया गया. अब निर्धारित समय पर बकाया नहीं चुकाने पर हाउसिंग बोर्ड भी बकायादार की संपत्ति कुर्क कर सकेगा. इसके लिए बोर्ड को राजस्थान भू राजस्व अधिनियम के तहत शक्तियां मिलेंगी. अतिक्रमण की शिकायतों पर अंकुश लगाने के लिए बोर्ड में विजीलेंस विंग भी गठित होगी, जिसमें पुलिस के अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर काम करेंगे.

लंबे समय से कानून में संशोधन की कवायद की जा रही थी
यह विंग नोटिस देकर सम्पत्ति के खिलाफ सील व तोड़फोड़ की कार्रवाई भी कर सकेगी. राजस्थान आवासन मण्डल के अधिनियम-1970 में इन प्रावधानों के लिए 4 नई धाराएं जोड़ी जा रही हैं. गुरुवार को विधानसभा में राजस्थान आवासन बोर्ड संशोधन अधिनियम-2020 पर सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने बताया कि बोर्ड की ओर से लंबे समय से कानून में संशोधन की कवायद की जा रही थी.

ये धाराएं जोड़ी जाएंगी



धारा 51-क


राजस्थान बोर्ड अधिनियम में धारा 51-क नई जोड़ी जाएगी. इसके तहत बोर्ड को भू राजस्व अधिनियम-1956 की धाराओं के तहत बकाया वसूली के अधिकार मिलेंगे. इसमें नियत तिथि पर बकाया नहीं देने पर बोर्ड आवंटी के खिलाफ सख्ती से कानूनी कार्रवाई कर सकेगा. इसमें संपत्ति कुर्क भी की जा सकेगी.

धारा 51-ख

 

इस धारा के तहत बोर्ड की संपत्ति पर अतिक्रमण करने पर उसके खिलाफ जुर्माना और कारावास की सजा अर्थात दोनों से दण्डित किया जा सकेगा. कारावास कम से कम 3 माह और अधिकतम 3 साल का होगा. जबकि जुर्माना 30 हजार से 50 हजार रुपए तक हो सकेगा.

धारा 51-ए
बोर्ड अधिनियम में धारा 51-ए को जोड़कर भी उसे और शक्तियां दी जाएंगी. इसमें बोर्ड का प्राधिकृत अधिकारी किसी भी समिति के पारित किए गए निर्णय की वैधता के बारे में निर्णय कर सकेगा. इसके साथ ही भविष्य में भी उसे निर्देशित करता रहेगा.

धारा 51-घ
बोर्ड को पुलिस की शक्तियां देने के लिए कानून में 51-घ की धारा जोड़ी जाएगी. इसके तहत बोर्ड में निरीक्षक रैंक के पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में विजीलेंस शाखा बनेगी. यह विंग समय समय पर आने वाली शिकायतों के संबंध में जांच कर निर्णय ले सकेगी और संबंधित पुलिस थाने में अपराध की प्रक्रिया के तहत दोषी को दण्ड दिलाने का कार्य कर सकेगी.

कानून में संशोधन की क्यों पड़ी जरूरत ?
बोर्ड को विभिन्न आवासीय योजनाएं बनाने और निष्पादित करने की शक्तियां दी गई हैं. योजनाओं को मूर्त रूप देने से लेकर उनके निस्तारण में काफी समय लगता है. इस दौरान भूमि पर माफियाओं की ओर से कब्जा कर लिया जाता है. इस बाधा को दूर करने के लिए और दोषी को दण्ड दिलाने के लिए अधिकारों की जरूरत पड़ती है. साथ ही किश्तों में आवंटित किए जाने वाले मकान की बकाया राशि वसूली के लिए भी बोर्ड को सख्त निर्णय लेने होते हैं.

 

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