राजस्थान: मतदाताओं ने पढ़े-लिखों को सौंपी गांव की 'सरकार', 282 MA और 158 प्रोफेशनल बने सरपंच
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राजस्थान: मतदाताओं ने पढ़े-लिखों को सौंपी गांव की 'सरकार', 282 MA और 158 प्रोफेशनल बने सरपंच
राज्य के मतदाताओं ने अपने विवेक को काम लेते हुए पंचायत चुनाव में पढ़े-लिखे प्रत्याशियों को ही सरपंच चुना.

राजस्थान (Rajasthan) में इस बार भी गांव की कमान पढ़े लिखे जनप्रतिनिधियों के हाथ में रहेगी. राज्य में गत माह 3 चरणों में हुए पंचायत चुनाव (Panchayat Election) में निर्वाचित 6,755 सरपंचों (Sarpanchs) में से 6,554 सरपंच पढ़े लिखे हैं

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जयपुर. राजस्थान (Rajasthan) में इस बार भी गांव की कमान पढ़े लिखे जनप्रतिनिधियों (Public representatives) के हाथों में रहेगी. राज्य में बीते माह तीन चरणों में हुए पंचायत चुनाव (Panchayat Election) में निर्वाचित 6,755 सरपंचों (Sarpanchs) में से 6,554 सरपंच पढ़े-लिखे (शिक्षित) हैं. राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार सिर्फ 201 सरपंच अंगूठा छाप हैं. नवनिर्वाचित सरपंचों में 282 एमए, 158 प्रोफेशनल्स और एक पीएचडी होल्डर शामिल हैं.

मतदाताओं ने विवेक से चुने पढ़े-लिखे सरपंच
पिछली वसुंधरा सरकार ने पंचायत राज चुनाव में आठवीं पास होने की शैक्षणिक बाध्यता लगाई थी. वसुंधरा सरकार का तर्क था कि पढ़े-लिखे सरपंच गांव का विकास बेहतर ढंग से कर सकेंगे. सरकार की योजनाओं को जमीनी धरातल पर उतार सकेंगे. वहीं अशोक गहलोत सरकार ने कहा कि शैक्षणिक योग्यता के आधार पर किसी को चुनाव लड़ने से वंचित नहीं किया जा सकता और उन्होंने दिसंबर 2018 में सत्ता में आते ही पंचायती राज चुनाव में शैक्षणिक बाध्यता हटा दी थी. इन दोनों सरकारों के तर्क-वितर्क के बीच  राज्य के मतदाताओं ने अपने विवेक से काम लेते हुए पढ़े-लिखे सरपंचों को ही वोट दिया.

एक नजर नव निर्वाचित सरपंच की योग्यता पर



अनपढ़ - 201


शिक्षित - 2351
पांचवी पास - 501
आठवीं पास - 819
दसवीं पास - 922
12वीं पास - 753
बीए पास - 786
एमए पास - 282
प्रोफेशनल - 158
पीएचडीधारी - 01

उदयपुर में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे सरपंच निर्वाचित, अजमेर में सबसे कम 
प्रथम चरण में 2726 सरपंच निर्वाचित हुए. दूसरे चरण में 2332 और तीसरे चरण में 1697 सरपंच निर्वाचित हुए हैं. दूसरे चरण में उदयपुर जिले में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे 224 सरपंच निर्वाचित हुए हैं, जबकि अजमेर जिले में पढ़े-लिखे 13 सरपंच ही निर्वाचित हुए. चुनाव के तीसरे चरण में पाली जिले में सबसे ज्यादा 116 सरपंच पढ़े-लिखे निर्वाचित हुए हैं. वहीं सबसे कम 33 सरपंच अजमेर जिले में निर्वाचित हुए हैं. प्रथम चरण में एक सरपंच पीएचडी होल्डर है.

अधिकारियों की मनमानी पर लगेगा अंकुश
पढ़े-लिखे सरपंच निर्वाचित होने से अधिकारियों की मनमानी पर अंकुश लगेगा. सरपंच किसी के हाथ की कठपुतली नहीं बनेंगे. सरपंच को योजनाओं के ऑनलाइन अपडेशन से लेकर ऑनलाइन ही लाभार्थियों को पेमेंट करना होता है. विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों और निर्माण कार्यों के ठेकेदारों को सरपंच के हस्ताक्षर के बाद ही पैसा जारी होता है.

ग्राम पंचायत को प्रतिवर्ष कई मदों में बजट मिलता है
पंचायतों को राज्य वित्त आयोग से 25 लाख रुपये, केंद्रीय वित्त आयोग से 20 लाख रुपये, विधायक कोष से 70 लाख रुपये, सांसद कोष से सवा करोड़ रुपये, स्वच्छ भारत मिशन से पांच लाख रुपये, नरेगा योजना से 35 लाख और आवास योजना मद में 15 लाख रुपये प्रतिवर्ष मिलते हैं. सरकार की तमाम लोक कल्याणकारी योजनाओं को आम जन तक पहुंचाने में ग्राम पंचायत की अहम भूमिका रहती है.

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