लाइव टीवी

हकीकत में बदला सपना, 100 अपंग गायों को इस डॉक्टर ने किया अपने पैरों पर खड़ा

Asif Khan | News18 Rajasthan
Updated: December 9, 2019, 8:54 PM IST
हकीकत में बदला सपना, 100 अपंग गायों को इस डॉक्टर ने किया अपने पैरों पर खड़ा
इस सपने को हकीकत में उतारने के लिए डॉक्टर तपेश ने बहुत लंबा संघर्ष किया है.

इस सपने को हकीकत में उतारने के लिए डॉक्टर तपेश ने बहुत लंबा संघर्ष किया है. इस काम को पूरा करने लिए अच्छे खासे बजट की ज़रूरत थी और गाय पालक इतना खर्चा वहन करने में सक्षम नहीं होते. ऐसे में यह बीड़ा डॉक्टर तपेश ने खुद अपने कंधों पर उठाया.

  • Share this:
जयपुर. डॉक्टर तपेश माथुर (Dr. Tapesh Mathur) पालतू जानवरों का उपचार करते है. वे सरकारी सेवा में है. जानवरों का इलाज करने के दौरान उनके मन में यह विचार आया कि वह ऐसे जानवर जिनके पैर (Legs) टूट जाते हैं, उन्हें कृत्रिम पैर (Artificial limb) लगाकर उनकी जिंदगी आसान बनाई जाए. आए दिन सड़क हादसों में गाय के पैर कटने या उनकी मौत की खबरें आम है. डॉक्टर तपेश गायों के लिए कृत्रिम पैर लैब में तैयार करते हैं. इस सपने को हकीकत में उतारने के लिए डॉक्टर तपेश ने बहुत लंबा संघर्ष किया है. इस काम को पूरा करने लिए अच्छे खासे बजट की ज़रूरत थी और गाय पालक इतना खर्चा वहन करने में सक्षम नहीं होते. ऐसे में यह बीड़ा डॉक्टर तपेश ने खुद अपने कंधों पर उठाया. वर्ष 2014 में एक दुर्घटनाग्रस्त बछड़े को उन्होंने पहला कृत्रिम पैर लगाया. बछड़ा इस कृत्रिम पैर लगाकर दौड़ने लगा. बछड़े के नाम पर ही कृत्रिम पैर का नाम 'कृष्णा लिंब' रख दिया.

डॉ. तपेश की उपलब्धियां

इस नवाचार के लिए इंडियन सोसाइटी फ़ॉर वेटेरिनरी सर्जरी की ओर से गोल्ड मेडल 2014 में और 2015 में बेस्ट फील्ड वेटेरीनेरियन का अवॉर्ड मिला. इसी दौरान केंद्र के वन पर्यावरण जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की प्रायोगिक पशुओं में क्रूरता रोकने के लिए बनी केंद्रीय समिति (सीपीसीएसईए) में भी वो पहले पशु चिकित्सक थे जो सदस्य मनोनीत हुए.

Dr. Tapesh Mathur
डॉ. तपेश माथुर को इस नवाचार के लिए इंडियन सोसाइटी फ़ॉर वेटेरिनरी सर्जरी की ओर से 2014 में गोल्ड मेडल और 2015 में बेस्ट फील्ड वेटेरीनेरियन का अवॉर्ड मिला.


12 राज्यों में जाकर गायों को लगा चुकें हैं कृष्णा लिंब

वेटनरी डॉक्टर तपेश माथुर का कहना है कि मैंने कृष्णा लिंब नि:शुल्क लगाने का फैसला लिया क्योंकि अपंग पशु की सार संभाल में लोग रुचि नहीं लेते हैं. सामान्यत: पशुपालकों के लिए ऐसे पशु अनुपयोगी हो जाते हैं. उन्होंने बताया कि मैंने जन सहयोग से ही काम को जारी रखा. देश के 12 राज्यों (हरियाणा, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तराखण्ड, जम्मू, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब) में सेवाएं दी हैं और 100 पशुओं के लिम्ब लगाया है. डॉ. तपेश ने इस काम के लिए दुनिया के कई हिस्सों से भूटान, श्रीलंका, दुबई और क्रोएशिया से भी लोगों ने संपर्क किया और परामर्श लिया है.

हर रोज 30-40 लोग अपंग पशुओं के लिए डॉ. तपेश से करते हैं संपर्कडॉ. तपेश के अनुसार हर महीने करीब 30-40 लोग अपने अपंग पशुओं के लिए संपर्क करते हैं. जिन मामलों में पैर लगाने की गुंजाइश होती है और पशु पालक पूरा जिम्मा लेने और परामर्श के मुताबिक फिजियोथेरेपी कराने की मेहनत को राज़ी होता है, वहीं कृष्णा लिंब लगाने जाते हैं.

डॉ. तपेश माथुर ने वर्ष 2014 में एक दुर्घटनाग्रस्त बछड़े को उन्होंने पहला कृत्रिम पैर लगाया. बछड़ा इस कृत्रिम पैर लगाकर दौड़ने लगा.



15-20 हजार रुपये का एक लिंब लगाने का आता है खर्च


उन्होंने बताया कि एक पैर को तैयार करने में 10 से 15 हज़ार तक का खर्चा आता है और सप्ताह भर का समय लगता है. इसके अलावा मौके पर जाकर पैर का नाप लेकर आना और वापस जाकर लगाने का अलग खर्चा अलग आता है. ऐसे में लगभग 15 से 20 हज़ार का खर्चा डॉक्टर तपेश खुद अपनी जेब से वहन करते हैं. यदा-कदा उन्हे इस काम के लिए सामाजिक तौर पर थोड़ी बहुत आर्थिक मदद मिलती है लेकिन ये मदद सब गायों के लिए नहीं होती है.

यह भी पढ़ें: देश में 100 बलात्कारियों में से सिर्फ 18 को ही मिलती है सजा: प्रवीण तोगड़िया

‘पानीपत’ फिल्म विवाद पर CM अशोक गहलोत बोले, सेंसर बोर्ड करे हस्तक्षेप

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए जयपुर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: December 9, 2019, 7:44 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर