लाइव टीवी

JLF-2020: साहित्य के महाकुंभ का हुआ समापन, यादें संजोकर विदा हुए देसी-विदेशी मेहमान
Jaipur News in Hindi

Asif Khan | News18 Rajasthan
Updated: January 27, 2020, 7:52 PM IST
JLF-2020: साहित्य के महाकुंभ का हुआ समापन, यादें संजोकर विदा हुए देसी-विदेशी मेहमान
5 दिन तक चले JLF में सैंकड़ों सेशंस में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई. सेलिब्रिटी, साहित्यकार, लेखक, फिल्मकार, डिजाइनर और बुद्धिजिवीयों ने खुलकर अपने मन की बात रखी.

पिंकसिटी जयपुर में चल रहे पांच दिवसीय जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) के आखिरी दिन सोमवार को भी लोगों का जबर्दस्त जमावड़ा (Huge crowd) लगा रहा. अंतिम दिन अलग-अलग विषयों पर कई सेशन (Session) हुए.

  • Share this:
जयपुर. पिंकसिटी जयपुर में चल रहे पांच दिवसीय जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) के आखिरी दिन सोमवार को भी लोगों का जबर्दस्त जमावड़ा (Huge crowd) लगा रहा. अंतिम दिन अलग-अलग विषयों पर कई सेशन (Session) हुए. इनमें दो महत्वपूर्ण सेशन 'द लैंड इस आवर लैंड' और 'जर्नी ऑफ द सोल' में वक्ताओं (Speakers) ने श्रोताओं (Listeners) को बांधे रखा और विचार विमर्श के लिए उनको आमंत्रित किया.

सैंकड़ों सेशंस में विभिन्न विषयों पर हुई चर्चा
डिग्गी पैलेस में आयोजित साहित्य के महाकुंभ जेएलएफ का सोमवार को समापन हो गया. पांच दिन तक चले इस फेस्टिवल में सैंकड़ों सेशंस में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई. सेलिब्रिटी, साहित्यकार, कवि, लेखक, फिल्मकार, डिजाइनर और बुद्धिजीवियों ने खुलकर यहां अपने मन की बात रखी. सबके अपने अपने अलग विचार थे. इस आयोजन की खासियत है कि विपरीत विचारधाराएं भी एक छत के नीचे आमने-सामने अपने-अपने विचार रखती हैं. फेस्टिवल के अंतिम दिन विशेष सेशन 'द लैंड इस आवर लैंड' शीर्षक से आयोजित किया गया. यह कहानी थी उन गुजरातियों की जो गुजरात से तीन चार पीढ़ियों पहले रहने और व्यापार के सिलसिले में विदेश चले गए थे. उन्हीं में से एक सुकेतु मेहता इस सेशन का हिस्सा बने और गुजरात के अलावा भारत की राजनीति पर भी खुलकर बोले.

'जर्नी ऑफ द सोल' ने बांधे रखा दर्शकों

इसके बाद नंबर आया 'जर्नी ऑफ द सोल' का. इस कहानी को गाकर, पढ़कर, संगीत और नाच के जरिए बयां किया गया. बेहद खूबसूरत तरीके से विदेश की रहने वाली सोलेह वोल्पी ने बताया कि एक रूह की यात्रा कैसे होती है ? दर्शक सांस रोके इस कहानी को सुन और देख रहे थे. वीणा और तबले पर उनका साथ दिया अल्लाहरखा ख़ान और शफ़त हुसैन ने.

अगले साल फिर सजेगा साहित्य का मेला
जेएलएफ एक बार फिर बेहद संजोने वाली यादें देकर चला गया. फेस्टिवल में देश विदेश से आए मेहमान सोमवार को यहां से रवाना होना शुरू हो गए. अगले साल एक बार फिर से साहित्य का दरबार सजेगा और विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियां जुटेंगी. जेएलएफ में इस बात का पूरा ख्याल रखा गया कि बाहर से आने वाले सैलानियों और मेहमानों को राजस्थान की रंगत अच्छे से नजर आए. फिर चाहे वो खाने का मामला हो या फिर यहां की कारीगरी. 

बेमिसाल: दोनों हाथ नहीं होने के बावजूद मोहिनी JLF में बनाती रही लाइव पेंटिंग्स

 

कई भाषाओं में गाते हैं लोक गायक अनवर खान, सरकार नवाजेगी 'पद्मश्री' पुरस्कार से

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए जयपुर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 27, 2020, 7:47 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर