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JLF-2020: कांग्रेस नेता शशि थरूर ने केन्द्र और आरएसएस पर कुछ यूं साधे निशाने

Mahendra Singh | News18 Rajasthan
Updated: January 24, 2020, 8:58 PM IST
JLF-2020: कांग्रेस नेता शशि थरूर ने केन्द्र और आरएसएस पर कुछ यूं साधे निशाने
थरूर ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि पहली बार ऐसी सरकार आई है जो लोगों को सोशियली डिवाइड कर रही है.

राजधानी जयपुर (Jaipur) में चल रहे जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) के दूसरे दिन शुक्रवार को डिग्गी पैलेस (Diggy Palace) के फ्रंट लॉन में आयोजित सेशन 'शशि ऑन शशि' में कांग्रेस नेता शशि थरूर (Congress leader Shashi Tharoor) ने केन्द्र और आरएसएस (Center and RSS) पर निशाने साधे.

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जयपुर. राजधानी जयपुर (Jaipur) में चल रहे जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) के दूसरे दिन शुक्रवार को डिग्गी पैलेस (Diggy Palace) के फ्रंट लॉन में आयोजित सेशन 'शशि ऑन शशि' में कांग्रेस नेता शशि थरूर (Congress leader Shashi Tharoor) ने केन्द्र और आरएसएस (Center and RSS) पर निशाने साधे. माइकल ड्वायर से बात करते हुए थरूर ने कहा कि आज देश में अलग तरह का माहौल चल रहा है. उन्होंने कहा कि गांधीजी (Gandhiji) को जिसने मारा वो आरएसएस था. इस पर लोगों की सोच आज भी बदली नहीं है.

थरूर बोले सरकार लोगों को सोशियली डिवाइड कर रही है
शशि थरूर ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि पहली बार ऐसी सरकार आई है जो लोगों को सोशियली डिवाइड कर रही है. यह उचित नहीं है. थरूर ने केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने ओनम पर ट्वीट किया 'हैप्पी वामना पूजा'. थरूर ने आरोप लगाया कि उनको यह नहीं पता की ओनम क्यों मनाया जाता है ? उन्होंने कहा कि ओनम केरला का सबसे बड़ा त्योहार है जो हिंदू, मुस्लिम, ईसाई सब मिलकर मनाते हैं.

'केटल क्लास' कमेंट पर थरूर ने कहा लोगों ने उनको गलत समझा

थरूर ने पूर्व में दिए गए अपने 'केटल क्लास' कमेंट पर कहा कि वो उन्होंने मज़ाक में कहा था ना की किसी को नीचा दिखाने के लिए. पर लोगों ने उनको गलत समझा. यहां तक कि राजस्थान के मुख्यमंत्री ने मुझे इस्तीफ़ा देने के लिए तक कह दिया. बकौल थरूर पॉलिटिक्स में आप क्या बोलते हैं, आपका इंटेंशन क्या है उससे कोई मतलब नहीं है. लोग खुद ही समझते हैं जो वो सोचते हैं.

विभिन्न सत्रों में कई वक्ताओं ने निभाई सहभागिता
फेस्टिवल में शुक्रवार को भी कई सत्र आयोजित किए गए. इनमें कई वक्ताओं ने सहभागिता निभाई. फेस्टिवल में इससे पहले सुबह राजस्थानी भाषा पर भी विशेष सत्र आयोजित किया गया. इस सत्र में साहित्य के मंच से राजस्थानी भाषा का दर्द छलका. वक्ताओं ने राजस्थानी भाषा को मान्यता नहीं मिलने पर राजनीतिक इच्छाशक्ति पर सवाल उठाए. 

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First published: January 24, 2020, 8:57 PM IST
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