Jaipur Bomb Blast: 11 साल बाद भी बम धमाकों के छर्रे लिए घूम रही है अलीना
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Jaipur Bomb Blast: 11 साल बाद भी बम धमाकों के छर्रे लिए घूम रही है अलीना
18 दिसंबर को जयपुर ब्लास्ट केस के आरोपियों को दोषी करार दिया गया.

13 मई 2008 को जयपुर में हुए बम धमाकों (jaipur bomb blast) को एक दशक से ज्यादा वक्त गुज़र गया है, लेकिन उन परिवारों के जख्म आज भी हरे हैं, जिन लोगों ने इन धमाकों अपनों को खोया.

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जयपुर. 13 मई 2008 को जयपुर में हुए बम धमाकों (Jaipur Bomb Blast) को एक दशक से ज्यादा वक्त गुज़र गया है, लेकिन उन परिवारों के जख्म आज भी हरे हैं, जिन लोगों ने इन धमाकों अपनों को खोया. 13 मई के दिन ही दो मासूम बहन चांदपोल हनुमानजी के मंदिर (Shri Chandpole Hanuman Ji Temple) के पास एक दुकान से दही लेने गई हुई थीं, जब वो वहां पहुंची उसी वक्त धमाका हुआ एक बहन इल्मा इस दुनियां को अलविदा कह गई. दूसरी बहन अलीना के जिस्म में आज भी उस धमाके से निकले छर्रे मौजूद हैं. अलीना और इल्मा की मां अनीसा उन यादों से पीछा छुड़ाने के लिए अपना घर बदल चुकी हैं लेकिन उस मन को कहां ले जाएं जिस में आज भी हर एक याद जख्म की तरह हरी है.

मेरी मासूम बच्ची ने किसी का क्या बिगाड़ा था? 
चांदपोल में रहने वाली अनीसा अब अपना घर बदल चुकी हैं, वो अब सांगानेरी गेट के पास मटका कुआ इलाके में एक छोटे से कमरे वाले मकान में जैसे जैसे गुज़र बसर कर रहीं हैं. इल्मा का नाम ज़ुबान आने के बाद पूरा बाहर भी नहीं आया था कि उससे पहले आंसू बह निकले... रुंधे हुए गले बस एक सिसिकती आवाज़ निकली, मेरी मासूम बच्ची ने किसी का क्या बिगाड़ा था? मेरी बच्ची पर हुए जुल्म का हिसाब तो बस कयामत के दिन अल्लाह के सामने होगा, जब मेरा हाथ होगा और उन दरिंदों का गिरेबान जिन्होंने इस खौफनाक़ जुर्म को अंजाम दिया.

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जयपुर में हुए बम धमाकों (jaipur bomb blast) को एक दशक से ज्यादा वक्त गुज़र गया है.

धमाके के बाद बहन इल्मा का हाथ छूट गया था



अनीसा के साथ ही अलीना भी मौजूद थी, जो उस धमके की चश्मदीद गवाह भी है, अलीना का कहना था कि इतना याद है कि बस एक धमाका हुआ, जिसमें कई जगह चुभन सी महसूस हो रही थी, जहां धमाका हुआ वहां जमीन धंस गई थी, चारों ओर से चीखने चिल्लाने और दर्द से कराहने की आवाजें आ रहीं थीं, लेकिन धूल के गु़बार में नज़र कुछ नहीं आ रहा था. धमाके के बाद बहन इल्मा का हाथ छूट गया था, ऐसा लगा जिस हलवाई से दही लेने गईं थी वहां गैस की टंकी फट गई हो. अचानक एक गाड़ी आई और जमीन पर बिखरे पड़े लोगों को गाड़ी में पटक कर ले जाने लगी. जिस्म से बह रहे खून की वजह से दो लोगों ने अलीना को भी उठाया और गाड़ी में डालने लगे, डर के मारे अलीना भागी और घर पहुंचने तक रुकी ही नहीं. उस वक्त न अलीना को पता था न ही उसके घर वालों को कि इल्मा अब इस दुनियां में नहीं रही है.

लहूलुहान जिस्म मिला जिसमें जान नहीं थी

पूरा परिवार रात दो बजे तक इल्मा को इधर उधर तलाशता रहा लेकिन जब अलीना को इलाज के लिए सवाई मानसिंह अस्पताल ले गए, तो कुछ लोगों ने सलाह दी कि एक बार मुर्दाखाना भी देख लो क्या पता वहां हो. घर वाले जब मुर्दाखाना पहुंचे तो अंदर कई लाशों के नीचे इल्मा का लहूलुहान जिस्म मिला जिसमें जान नहीं थी. उस धमाके के बाद कई दिनों अलीना को भी आईसीयू में रखा गया.

अलीना और इल्मा दोनों एक ही स्कूल में चौथी क्लास में साथ में पढ़ती थीं, अलीना को ऐसा सदमा लगा कि आगे नहीं पढ़ पाईं. सब कुछ भुलाने के लिए अनीसा ने भी अपना घर बदल लिया. हर साल जब भी अखबारों में जयपुर बम धमाकों की खबर आती तो सारा मंजर फिर से आंखों के सामने आ जाता.

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