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VIDEO: 'भारत में अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र सबसे बड़ा मजाक'

VIDEO: 'भारत में अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र सबसे बड़ा मजाक'

बॉलीवुड डायरेक्टर करण जौहर ने  देश में अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र को सबसे बड़ा मजाक बताया है.

  • News18
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    बॉलीवुड डायरेक्टर करण जौहर ने  देश में अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र को सबसे बड़ा मजाक बताया है.

    करण ने यह विवादास्पद बयान गुरुवार को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में दिया. फेस्ट के पहले दिन करण ने यह बयान शोभा डे के साथ बातचीत में दिए. उनकी आत्मकथा 'द अनसूटेबल बॉय' लिखने वाली पूनम सक्सेना भी इस सत्र में उनके साथ थी.

    डिग्गी पैलेस के फ्रंट लोन में दोपहर बाद के इस सेशन में करण जौहर बचपन की फेमनिन फीलिंग, फिल्मों में समलैंगिगता, शाहरुख खान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर खुलकर बोले. पूनम सक्सेना के साथ करण जौहर से संवाद करने वाली शोभा डे के सवालों पर उन्होंने कई मुद्दों पर राय व्यक्त की. पढ़िए, 40 मिनट के इस सेशन में उनकी कही 10 बातें-

    वो दस बातें जो करण जौहर ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में कही

    अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहां? हमेशा कानूनी नोटिस का डर

    करण ने कहा कि देश में अभिव्यक्त की आजादी मजाक लगती है. आज मेरा जैसा फिल्म डायरेक्टर को हमेशा डर लगा रहता है कि कहीं किसी बात पर कोई नोटिस न थमा दे. ऐसे ही एक मामले में राष्ट्रगान पर 14 साल से कानून लड़ाई में उलझा हुआ हूं.

    शाहरुख के रिश्ते पर बोले, असहिष्णुता पर बचाव किया

    करण ने कहा कि वे शाहरुख खान आज भी प्यार करते हैं और उनकी पत्नी और बच्चे मेरे परिवार का हिस्सा हैं. हालांकि हमारे रिश्तों में उतार चढ़ाव रहे हैं. करण ने असहिष्णुता पर शाहरुख का बचाव करते हुए कहा कि जैसा उनके बारे कहा जा रहा है वैसे शाहरुख नहीं हैं.

    वो शब्द जिसने मुझे बचपन में कुरेदा

    मुझे पैन्सी (समलैंगिग पुरुष) शब्द से नफरत है, मैंने बचपन में इसे बहुत सुना है. मैं बचपन में थोड़ा फेमनिन था और इस वजह से मुझे स्कूल में इसे सुनना पड़ता था. इसी बोझ के साथ में घर लौटता था.

    जब दक्षिण मुंबई में पला बढ़ा

    दक्षिण मुंबई, जहां मैं पला बढ़ा हिंदी फिल्मों को बहुत हेय दृष्टि से देखा जाता था. अपने दोस्तों को मैंने अपने पिता के बारे में सच नहीं बताया कि वो फिल्म बनाते हैं, बस बिजनेसमैन ही बताता था. लेकिन तब कोई नहीं जानता था कि मैं हिंदी फिल्मों का कितना बड़ा फैन था और चुपके-चुपके बॉलीवुड सॉन्ग्स पर डांस किया करता था.

    हिंदी फिल्मों के गानों का जुनून

    मैं बचपन में श्रीदेवी और जयाप्रदा की तरह डांस किया करता था. जब घर पर कोई मेहमान आता पापा 'ढपलीवाले' पर डांस करने को कहते और मैं ढफली लेता और कहता मैं जया प्रदा हूं और उन्हीं के स्टेप्स करने लगता.

    मुझे स्कैंडल की जरूरत क्यों कि खबरों में रहना है

    करण ने कहा कि मुझे स्कैंडल चाहिए, क्यों कि आखिर मैं शो बिजनेस का कारोबार करता हूं. इसके लिए मैं कहीं भी जा सकता हूं, जहां मीडिया हो.

    बनावटी है फिल्मी दुनिया

    फिल्म इंडस्ट्री में बहुत कुछ असल में बनावटी है. फिल्म निर्माताओं के बीच अपनत्व का अभाव है. यहां गला काट प्रतिस्प्रद्धा है और यहां कोई बिरादरी नहीं.

    मेरे पिता के अनुभवों मुझे जमीनी आदमी बनाया

    एक सवाल के जवाब में करण बोले, मुझे लगता है कि मैं गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्में नहीं बना सकता, क्यों कि मैं सपने बेचता हूं और लेकिन जीवन की सच से भी वाकिफ हूं. ये मेरे पिता के अनुभवों ने मुझे जमीनी आदमी बनाए रखा है.

    बॉलीवुड के समलैंगिक हैं, सामने न आएं बेहतर

    ये ठीक भी है कि वे छिपकर कर रह रहे हैं. हमारे देश में ऐसा कानून है जो वे सबके सामने आएं. सामने आ जाएंगे तो 377 बार प्रताड़ित किया जाएगा.

    सबसे पसंदीदा फिल्म 'कभीअलविदा ना कहना'

    करण ने कहा कि मेरी बनाई फिल्मों में से मुझे 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर' पसंद है. वैसे ऑल टाइम फेवरेट फिल्म 'कभीअलविदा ना कहना' ही है.

    फोटो: रविशंकर व्यास

    Tags: Aamir khan, Anupam kher, Intolerance, Jaipur literature festival, Karan johar, Kiran Rao, Sakshi maharaj

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