खान महाघूस कांड: पूर्व IAS अशोक सिंघवी ने किया सरेंडर, डेढ़ साल से जांच एजेंसियां कर रही थी तलाश
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खान महाघूस कांड: पूर्व IAS अशोक सिंघवी ने किया सरेंडर, डेढ़ साल से जांच एजेंसियां कर रही थी तलाश
एसीबी ने चित्तौड़गढ़ में बंद पड़ी 6 खानों को चालू करने की एवज में हुई 22 करोड़ की डील का खुलासा किया था.

करीब डेढ़ साल की फरारी काटने के बाद सोमवार को पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक सिंघवी (Former IAS Ashok Singhvi) ने ईडी मामलों की विशेष अदालत में सरेंडर (surrendered) कर दिया. सिंघवी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और ईडी (Anti-Corruption Bureau and ED) मामलों में फरार चल रहे थे.

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जयपुर. करीब डेढ़ साल की फरारी काटने के बाद सोमवार को पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक सिंघवी (Former IAS Ashok Singhvi) ने ईडी मामलों की विशेष अदालत में सरेंडर (surrendered) कर दिया. सिंघवी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और ईडी (Anti-Corruption Bureau and ED) मामलों में फरार चल रहे थे. सरेंडर के बाद जज अरुण कुमार अग्रवाल प्रथम ने उन्हें 15 जून तक न्यायिक हिरासत (judicial custody) में भेज दिया. सिंघवी के जमानत प्रार्थना पत्र पर मंगलवार को सुनवाई होगी.

यह था पूरा मामला
सितंबर 2015 में एसीबी ने खान विभाग में चल रहे महाघूस कांड मामले का खुलासा किया था. एसीबी ने चित्तौड़गढ़ में बंद पड़ी 6 खानों को चालू करने की एवज में 22 करोड़ की डील का खुलासा किया था. एसीबी ने इस मामले में दलाल को ढ़ाई करोड़ की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया था. पूरे मामले में एसीबी के साथ ईडी ने पूर्व आईएएस अशोक सिंघवी सहित अन्य आरोपियों पर मनी लॉड्रिंग की धाराओं में केस भी दर्ज किया था. इस पर ईडी कोर्ट ने जनवरी 2019 को प्रसंज्ञान लेते हुए सभी आरोपियो को गिरफ्तारी वारंट से तलब किया था. लेकिन तभी से सभी आरोपी फरार चल रहे थे.

मामले में बनाए गए थे कुल 8 आरोपी



पूरे मामले में ईडी कोर्ट ने 8 लोगों को आरोपी बनाया था. इसमें से पांच ने पहले ही ईडी कोर्ट में सरेंडर कर दिया था. वहीं मामले में अभी भी राशिद शेख और तमन्ना बेगम फरार चल रहे हैं.



30 नवंबर 2015 को दर्ज किया गया था केस
30 नवंबर 2015 को ईडी ने पूर्व आईएएस अशोक सिंघवी सहित अन्य पर मनी लांड्रिंग का केस दर्ज किया था. ईडी की जांच में सामने आया कि नवंबर 2014 से जनवरी 2015 में 600 खानों का आवंटन नियम विपरीत हुआ है. अधिकारियों ने आवंटन की रोक के सकुर्लर को अनदेखा किया. अधिकारियों, सीए और खनन माफिया ने गठजोड़ बनाकर 2.55 करोड़ रु. की रिश्वत का ताना-बाना बुना. खान विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव अशोक सिंघवी समेत अन्य अफसरों ने खनन पट्टों का आवंटन किया.

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