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BJP-Congress Politics: किसान आंदोलन और उपचुनाव ने दोनों दलों को एकजुट होकर चलने का दिया मंत्र

राजस्थान में चिट्ठी बम, धार्मिक यात्रा, गुटबाजी के बाद अब किसान महापंचायत और उपचुनाव ने दोनों दलों को एकजुटता के साथ चलने का मंत्र दिया. (सांकेतिक तस्वीर)

राजस्थान में चिट्ठी बम, धार्मिक यात्रा, गुटबाजी के बाद अब किसान महापंचायत और उपचुनाव ने दोनों दलों को एकजुटता के साथ चलने का मंत्र दिया. (सांकेतिक तस्वीर)

राजस्थान में जल्द ही 4 विधानसभा सीटों के उपचुनाव की घोषणा होगी. ऐसे में दोनों दलों में गुटबाजी छोड़कर एकजुट दिखाई देने लगे हैं. गहलोत-पायलट के जगजाहिर विवाद के बाद बर्फ कुछ पिघलने लगी है. वहीं भाजपा में भी अब सब कुछ सामान्य दिखाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 27, 2021, 2:41 PM IST
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रिपोर्ट - हरीश मलिक

जयपुर. पांच राज्यों में चुनाव का शंखनाद हो चुका है. जल्द ही राजस्थान में उपचुनाव की भी घोषणा होगी. राजनीति में उलटबांसियां जगत प्रसिद्ध हैं. खासकर चुनाव जीतने के लिए नेताजी कुछ भी करने को तत्पर रहते हैं. कुछ ऐसा ही हाल आजकल राजस्थान के राजनीतिक पटल पर हो रहा है. एक ओर भाजपा में चिट्ठी बम और धार्मिक यात्रा निकलने की शोशेबाजी के बाद अब सब कुछ सामान्य दिखाने की कोशिशें हो रही हैं, दूसरी और कांग्रेस में गहलोत-पायलट के जगजाहिर विवाद के बाद बर्फ कुछ पिघलने लगी है. और ऐसा हो भी क्यों ना...अगले माह चार विधानसभा क्षेत्रों में उप चुनाव की तारीख जो आने वाली है.

पहले बात भाजपा के चिट्ठी बम की. विधानसभा में बजट सत्र चल रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे समर्थित विधायकों की ओर से एक खत प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां से लेकर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को भेजा है. करीब 20 विधायकों की हस्ताक्षरित चिट्ठी में सदन में नहीं बोलने देने का आरोप नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और और उपनेता राजेंद्र राठौड़ पर लगाया गया है. जिसे इन नेता-द्वय ने सिरे से ख़ारिज कर दिया है. इसके उलट राजे ग्रुप पर पार्टी लाइन से इतर जाकर अकेले धार्मिक यात्रा निकालने का आरोप मढ़ा.



गुटबाजी और विरोध के स्वर आलाकमान तक पहुंचने ही थे. पहले राजे करीब डेढ़ साल बाद प्रधानमंत्री मोदी से राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक के पश्चात मिली. फिर जयपुर में कोर कमेटी की बैठक में प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह के समक्ष खेमेबाजी उभरी. सिंह ने चिट्ठी लिखने वाले प्रताप सिंह सिंघवी, यूनुस खान, कालीचरण सर्राफ, अशोक परनामी समेत 20 विधायकों की पीड़ा सुनी. साथ ही दोनों पक्षों को उपचुनाव के दृष्टिगत एकजुट रहने के निर्देश दिए. उपचुनाव को जीतने के लिए पार्टी को एकजुटता के साथ एड़ी-चोटी का जोर लगाना है.
अब बात सत्तारूढ़ कांग्रेस की. पिछले साल कोरोनाकाल में तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की बगावत और सुलह के बावजूद भी सब कुछ सामान्य नहीं था. उप चुनाव की दस्तक और राहुल गांधी के इसी माह हुए दो दिवसीय दौरे के बाद दोनों खेमों के बीच तनावपूर्ण रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलने लगी है. प्रदेश में सियासी संकट के बाद बारह फरवरी को गंगानगर के किसान सम्मेलन में पहली बार गहलोत-पायलट साथ नजर आए. किसान आंदोलन के समर्थन में पायलट की सभाओं में गहलोत के भी पोस्टर नजर आए.

प्रदेश प्रभारी अजय माकन के 24 फरवरी से चार दिवसीय दौरे के बीच भी उन्होंने दोनों ग्रुपों को साथ चलने के निर्देश दिए. मेवाड़ की 2 सीटों सहाड़ा और राजसमंद के जातिगत समीकरण ऐसे हैं कि पायलट की उपस्थिति उपचुनाव में कांग्रेस को लाभ दे सकती है. सहाड़ा कांग्रेस के पास थी तो राजसमंद भाजपा के खाते में थी. दोनों सीटें कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण मानी जा रही हैं. चूरू और मेवाड़ की किसान महापंचायत में पायलट और गहलोत एक बार फिर साथ नजर आ सकते हैं.

बहुमत के किनारे पर बैठी सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए उपचुनाव लिटमस टेस्ट होगा. जानते हैं इसलिए उन्होंने बजट में इन चारों विधानसभाओं में विकास के लिए पैसा देने पर अतिरिक्त फोकस किया है. उधर भाजपा नेता भी मन भेद बुलाकर उपचुनाव को जीतने की कोशिशों में है. उपचुनाव ने दोनों पार्टियों में गुटबाजी और धड़ेबंदी को कुछ समय के लिए ही सही दूर कर दिया है.
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