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जयपुर में पतंगबाजी परवान पर, आज भी कल भी जमेंगे दंगल, परिंदों को बचाने को भी जुटे 'भगवान'!

Arbaaz Ahmed | News18 Rajasthan
Updated: January 14, 2020, 10:24 PM IST
जयपुर में पतंगबाजी परवान पर, आज भी कल भी जमेंगे दंगल, परिंदों को बचाने को भी जुटे 'भगवान'!
परिंदों को बचाने के लिए वक्त पर इलाज के साथ-साथ सतर्कता भी बहुत जरूरी है.

राजधानी जयपुर में पतंगबाजी (kite flying) पूरे परवान पर है और यह सिलसिला मकर संक्रांति (Makar Sankranti) यानी 15 जनवरी को भी बदस्तूर जारी रहने वाली है. लेकिन इस पतंगबाजी के दौरान सैंकड़ों परिंदे पतंग की डोर या मांझे का शिकार हो जाते हैं. इन परिंदों को बचाने के लिए वक्त पर इलाज के साथ-साथ सतर्कता भी बहुत जरूरी है.

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जयपुर. राजधानी जयपुर में मंगलवार को पतंगबाजी (kite flying) पूरे परवान पर है और यह सिलसिला मकर संक्रांति (Makar Sankranti) यानी 15 जनवरी को भी बदस्तूर जारी रहने वाली है. लेकिन इस पतंगबाजी के दौरान सैंकड़ों परिंदे पतंग की डोर या मांझे का शिकार (Kite-String Injuries) हो जाते हैं. कईयों के पंख टूट जाते हैं तो कई बेमौत मारे जाते हैं. ऐसे में मांझे से घायल होने वाले परिंदों को बचाने के लिए अल्बर्ट हॉल के पास के पास एक विशेष कैंप लगाया गया है. इस कैंप में देश के अलग-अलग हिस्सों से कई विशेषज्ञ चिकित्सक यानी इन जख्मी परिंदों को फिर से जीवनदान देने वाले 'भगवान' पहुंचे हैं जो घायल परिंदों को समय पर उपचारित कर बचाने की कोशिशें कर रहे हैं. मुंबई से आई डॉक्टर रीना देव का कहना है इन परिंदों को बचाने के लिए वक्त पर इलाज के साथ-साथ सतर्कता भी बहुत जरूरी है.

पंख कट जाए, गले पर चोट आए तो?

डॉ. देव कहती हैं कि मांझे से अक्सर परिंदों का या तो पूरा पंख कट जाता है या गले के हिस्से पर चोट आती है. ऐसे में यह परिंदे बहुत ज्यादा सदमे में होते हैं. इन हालात में घायल होने पर किसी परिंदे को सीधे हाथ से उठाकर लाने के बजाय पहले उसकी आंखों को किसी कपड़े ढक देना सही होता है.

Save Birds from Kite-String
पतंगबाजी के दौरान सैंकड़ों परिंदे पतंग की डोर या मांझे का शिकार हो जाते हैं.


पक्षी को बचाने के लिए ऐसा नहीं करना!

कुछ लोग घायल परिंदो को तुरंत ही कुछ खिलाने या पानी पिलाने की कोशिश करते हैं, जो ग़लत है. ऐसा नहीं करना चाहिए. ऐसा करने के बजाय पहले किसी कागज के गत्ते के डिब्बे में उसे रखा जाना चाहिए फिर उसे नज़दीकी जगह इलाज के लिए ले जाया चाहिए.

Save Birds from Kite-String
जयपुर में पतंगबाजी पूरे परवान पर है और यह सिलसिला मकर संक्रांति यानी 15 जनवरी को भी बदस्तूर जारी रहने वाली है.
खुद मांझा सुलझाने में परिंदों को नुकसान

जयपुर में इलाज के दौरान कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिनमे लोग मांझे में उलझे परिदों को सुलझाने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनकी सुलझाने की कोशिश में ही परिदों को नुकसान पहुंच जाता है. सामान्यतौर पर परिदों को इलाज के लिए समय पर पहुचाना ज़रूरी होता है, लेकिन उसका तरीका ऐसा न हो कि पक्षियों को परेशानी हो.

यहां लेकर पहुंचे घायल परिंदों को

जयपुर में चारदीवारी के पास अल्बर्ट हॉल, वैशाली नगर, जवाहर नगर, मालवीय नगर, मानसरोवर के कई जगह कैम्प लगाए गए हैं. वहां घायल पक्षियों को पहुचाया जा सकता है. सबसे ज़्यादा ज़रूरी है कि जागरूकता लाई जाए. अगर लोग पतंगबाजी में मांझे का इस्तेमाल बंद कर देंगे, तो ऐसे हालात ही पैदा नहीं होंगे.

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First published: January 14, 2020, 4:55 PM IST
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