Rajasthan Crisis: 'बगावत' में पायलट का मददगार बना मोबाइल एप, CM गहलोत को नहीं लगी भनक
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Rajasthan Crisis: 'बगावत' में पायलट का मददगार बना मोबाइल एप, CM गहलोत को नहीं लगी भनक
(फाइल फोटो)

Rajasthan Crisis: मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) की नजर से बचने के लिए सचिन पायलट (Sachin Pilot) गुट के विधायकों को कुछ खास एहतियात बरतने के लिए कहा गया था.

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जयपुर. मुख्‍यमंत्री की कुर्सी को लेकर अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) और सचिन पायलट (Sachin Pilot) के बीच तनानती राजस्‍थान में विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस की जीत के साथ ही शुरू हो गई थी. कई दिनों चली जद्दोजहद के बाद पार्टी आलाकमान ने सचिन पायलट को उपमुख्‍यमंत्री की कुर्सी के लिए मना लिया. फिर अशोक गहलोत की ताजपोशी बतौर मुख्‍यमंत्री कर दी गई.

आलाकमान के दबाव में उस समय सचिन पायलट ने मुस्‍कुराते हुए यह फैसला स्‍वीकार कर लिया, लेकिन उनके दिल में मुख्‍यमंत्री की कुर्सी को लेकर टीस लगातार बनी रही. करीब दो साल बाद अब सचिन पायलट की टीस बाहर आई, तो उन्‍होंने 30 विधायकों के समर्थन का दावा कर सरकार के खिलाफ बगावत का खुल कर ऐलान कर दिया है.

राजनैतिक सूत्रों की मानें तो ऐसा नहीं है कि मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत को सचिन पायलट की टीस का अहसास नहीं था. मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत को बखूबी पता था कि सचिन पायलट उनके लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकते हैं. राज्‍य में पहले भी तीन बार ऐसे मौके आए, जब सचिन पायलट ने अपने इरादों का अहसास खुलकर गहलोत को कराया था. इस बार, सचिन पायलट को यह अहसास था कि पूर्व में हुए विवादों के चलते अशोक गहलोत बेहद चौकन्‍ना हैं. उनकी हर गतिविधि पर सबकी पैनी निगाह है. शक तो यहां तक था कि सचिन पायलट और उसके समर्थक विधायकों को फोन टेप किया जा रहे हैं. लिहाजा, इस बार बेहद सावधानी बरतते हुए सरकार के खिलाफ बगावत की साजिश रची.



विधायकों से ये एहतियात बरतने के थे निर्देश
सचिन पायलट का समर्थन कर रहे विधायकों को आशंका थी कि उनके फोन सर्विलांस पर हो सकते हैं. लिहाजा, उनकी रणनीति के बाबत किसी को पता न चले, यह सुनिश्चित करने के लिए सभी विधायक लगातार वॉट्सएप कॉलिंग और मैसेंजर का इस्‍तेमाल कर रहे थे. योजना के तहत, पायलट का समर्थन कर रहे सभी विधायकों ने अपने फोन स्विच ऑफ कर दिए थे.

इस कारण पायलट समर्थक विधायकों की लोकेशन और बातचीत के रिकॉर्ड का पता नहीं चल रहा था. फोन स्चिव ऑफ होने का सिलसिला शनिवार शाम से शुरू हुआ था. रविवार शाम होते होते सचिन पायलट के समर्थन में खड़े सभी विधायकों के फोन स्विच ऑफ हो चुके थे. अब सभी के बीच संपर्क का एक ही जरिया था वॉट्सएप कॉलिंग. इसकी मदद से ही पायलट अपने समर्थकों से लगातार अपडेट लेते रहे थे, लेकिन अंत में 'जादूगर' गहलोत के आगे यह रणनीति ध्वस्त हो गई.
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