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राजस्थान में अफसरों से परेशान हैं विधायक, विधानसभा के बजट सत्र में छलका दर्द, दिखी नाराजगी
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Sudhir sharma | News18 Rajasthan
Updated: February 29, 2020, 1:26 PM IST
राजस्थान में अफसरों से परेशान हैं विधायक, विधानसभा के बजट सत्र में छलका दर्द, दिखी नाराजगी
विधायकों ने कहा कि अधिकारी निरंकुश हो गए हैं और वे जनप्रतिनिधि का सम्मान नहीं करते.

राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को अधिकारियों के प्रति माननीयों (MLAs) का गुस्सा और नाराजगी जमकर छलकी. अनुदान मांगों पर हुई चर्चा में पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने कहा कि अधिकारी जनप्रतिनिधियों का सम्मान (Respect) नहीं करते.

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जयपुर. राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को अधिकारियों के प्रति माननीयों (MLAs) का गुस्सा और नाराजगी जमकर छलकी. अनुदान मांगों पर हुई चर्चा में पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने कहा कि अधिकारी जनप्रतिनिधियों का सम्मान (Respect) नहीं करते. इसके साथ ही विधायकों ने प्रत्येक 10 साल में अधिकारियों का भी कार्य के आधार पर विश्लेषण (Analysis) करने की मांग उठाई.

अधिकारी जनप्रतिनिधि का सम्मान नहीं करते
विधानसभा में शुक्रवार को लम्बे समय बाद जिला प्रशासन और प्रशासनिक सेवाएं की अनुदान मांगों पर विचार हुआ. इस दौरान चर्चा में विधायकों ने अधिकारियों के प्रति जमकर अपनी नाराजगी और गुस्सा जाहिर किया. खास बात यह रही कि अधिकारियों के बर्ताव को लेकर विपक्ष के साथ ही सत्ता पक्ष और निर्दलीय विधायकों ने भी एक स्वर में अपनी नाराजगी जाहिर की. विधायकों ने कहा कि अधिकारी निरंकुश हो गए हैं और वे जनप्रतिनिधि का सम्मान नहीं करते.

अधिकारियों की मोटिवेशनल ट्रेनिंग करवाई जाए



राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की विधायक इंदिरा देवी ने तो अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए यहां तक कहा कि ऐसे लोगों को अधिकारी बनाकर बैठा दिया है जो विधायकों को पहचानते तक नहीं है. उन्होंने कहा कि पिछले दिनों उनके साथ भी बुरा बर्ताव हुआ, जब अधिकारी ने उन्हें बैठा दिया और खुद झण्डारोहण कर दिया. इंदिरा देवी की इस पीड़ा को सदन का समर्थन मिला और आसन से सभापति ने निर्देश दिए कि सरकार उनकी पीड़ा पर संज्ञान ले. सभापति ने कहा कि अधिकारियों की मोटिवेशनल ट्रेनिंग करवाई जाए ताकि उनमें सेंस ऑफ बिलोंगिंग और अकाउंटिबिलिटी पैदा हो. सभापति ने यह भी कहा कि यह हर सदस्य की पीड़ा है जो मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जाए.



अधिकारी मंत्री तक की नहीं सुनते
चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब हम सदन में इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं तब भी सदन की गैलेरी में कोई अधिकारी मौजूद नहीं है और हम चिल्ला-चिल्ला कर दीवारें पीट रहे हैं. कटारिया ने कहा कि आए दिन अखबारों में मंत्री और सचिव के बीच टकराव की खबरें आती हैं. अधिकारी मंत्री तक की नहीं सुनते, यह लोकतंत्र का अपमान है. उन्होंने कहा कि एक परीक्षा पास कर अधिकारी तुर्रम खां बन जाता है. जब जनता जनप्रतिनिधियों का हर पांच साल में रिव्यू करती है तो अधिकारियों-कर्मचारियों के कार्य का भी हर 10 साल में विश्लेषण होना चाहिए.

अच्छा प्रशासन देना सरकार की जिम्मेदारी है
कांग्रेस विधायक हरीश मीना ने तो यहां तक कहा कि मंत्री परसादीलाल मीणा को मुकदमा दर्ज करवाने जनसुनवाई में जाना पड़ा और ऐसी ही स्थिति मुकदमा दर्ज करवाने के लिए मेरे साथ भी बनी. विधायकों की पीड़ा और आसन से मिले निर्देश को सरकार के मंत्रियों ने भी इसे गंभीरता से लिया. अनुदान मांगों का जवाब देते हुए राजस्व मंत्री हरीश चौधरी और जलदाय मंत्री बीडी कल्ला ने सदन में कहा कि अच्छा प्रशासन देना सरकार की जिम्मेदारी है और विधायकों की पीड़ा केबिनेट की बैठक में रखी जाएगी. उन्होंने कहा कि विधायक इंदिरा देवी के साथ जो बर्ताव हुआ उसकी जानकारी मुख्यमंत्री को दी जाएगी.

 

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First published: February 29, 2020, 12:09 PM IST
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