राजस्थान विधानसभा में बिना माइक वाली 50 सीटों को लेकर बढ़ा विवाद, पायलट गुट के विधायक ने लगाए गंभीर आरोप

सरकार ने मेट्रो का दायरा बढ़ाने के सुझाव मांगे हैं.

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Rajasthan News: विधानसभा में बिना माइक वाली सीटों को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. सरकार के सचेतक महेश जोशी (Mahesh Joshi) ने इस विवाद को शांत करने की कोशिश की है, लेकिन बात बनती नहीं दिख रही है.

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हरीश मलिक

जयपुर. बीजेपी और कांग्रेस विधायकों (BJP and Congress MLAs) में गुटबाजी खत्म होने का नाम नहीं ले रही. दोनों दलों के विधायक गुटबाजी को हवा देने का कोई मौका छोड़ नहीं रहे हैं. पहले बीजेपी विधायकों ने स्थगन प्रस्ताव लगाने में पक्षपात पर अपने ही नेता को घेरा. इस बार सचिन पायलट गुट (Sachin Pilot Group) के विधायक रमेश मीणा ने विधानसभा में बिना माइक वाली सीटों पर एससी-एसटी विधायकों को बिठाने के मामले में भेदभाव का आरोप जड़ दिया.

हालांकि, मुख्य सचेतक महेश जोशी ने इसे गलत बताते हुए स्पष्ट किया है कि 200 विधायकों वाली विधानसभा में 50 विधायकों को बिना माइक वाली सीटें मिली हैं. इनमें कांग्रेस, बीजेपी और निर्दलीय विधायक शामिल हैं. नाराज रमेश मीणा को बातचीत कर मना लिया जाएगा.

कोविड-19 के चलते 33% सीटें खाली
दरअसल, कोविड गाइडलाइन के तहत सदन की 33 फीसदी सीटें खाली हैं. इस कारण 50 से ज्यादा विधायकों को बिना माइक वाली सीटों पर बैठना पड़ रहा है. इनमें सभी दलों के विधायक शामिल हैं. जहां तक सदन में बैठने की व्यवस्था का सवाल है तो आगे से लेकर पीछे की पंक्ति में बैठने के लिए सदस्य की वरिष्ठता और पार्टी में वरिष्ठता और उपयोगिता आदि के पैमानों को देखा जाता है. अगर कोई पहली बार जीता हुआ विधायक पार्टी में हैसियत रखता है तो उसे आगे भी बैठाया जाता है और ज्यादा बार जीतने वाले विधायक को कई बार पीछे भी बैठना पड़ता है.

रमेश मीणा का आरोप- एससी-एसटी के कारण भेदभाव

पायलट गुट के समर्थक विधायक रमेश मीणा ने बैठने की व्यवस्था को एससी-एसटी के साथ भेदभाव से जोड़कर गुटबाजी को नई हवा दे दी. उन्होंने अपनी ही पार्टी पर आरोप लगाया कि एससी-एसटी से भेदभाव के कारण उन्हें बिना माइक की सीट दी गई है, ताकि वे अपने क्षेत्र के मुद्दे पुरजोर आवाज में न उठा सकें. रमेश मीणा ने कहा कि उन्हें सचेतक महेश जोशी और पार्टी अध्यक्ष दोनों से ही बैठने की व्यवस्था और माइक न होने की बात कही थी, क्योंकि दोनों के सामंजस्य से विधायकों की सीटों का आवंटन होता है.



आश्वासन के बाद भी नहीं बदली सीट

मीणा का दावा है कि अध्यक्ष ने दो दिन पूर्व उन्‍हें व्यक्तिगत रूप से आश्वस्त किया था कि उनकी सीट बदल दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. रमेश मीणा ने आरोप लगाया कि उन्होंने प्रश्न पूछने के लिए माइक की व्यवस्था के लिए कहा था, लेकिन अध्यक्ष जी ने उनकी बात को नहीं सुना उल्टा उनका ही अपमान किया. सदन में एससी-एसटी की बात को दबाया जा रहा है.

कॉविड खत्म होने पर सभी को मिलेगा माइक

सरकारी मुख्य सचेत महेश जोशी ने कहा कि सदन में किसी भी दल के किसी भी विधायक की बात को नहीं दबाया जा रहा है. कोविड के चलते सीटें खाली रखने के नियम के कारण ऐसा हुआ है. उन्होंने कहा कि विधानसभा के बजट सत्र की 7 या 8 बैठकें ही अब और होनी हैं. ऐसे में बीच में सिटिंग व्यवस्था बदलने से बाकी विधायक विरोध कर सकते हैं. आगे जब कोविड खत्म हो जाएगा तो किसी भी विधायक को बिना माइक की सीट पर नहीं बैठना पड़ेगा.

माइक बंद करने का यह है प्रावधान

विधायकों की सीट के माइक अक्सर मत-विभाजन प्रक्रिया, सदन के अंदर धरने-प्रदर्शन के दौरान अध्यक्ष या सभापति की सहमति से बंद कराने का प्रावधान है. इसके पीछे मंशा यही है कि सदन में हो-हल्ला न हो और शांति बनी रहे. इसके साथ ही प्रोसीडिंग या सदन में मौजूद लोगों के बीच कोई गलत बात या संदेश न चला जाए. सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए अक्सर ऐसे कदम उठाए जाते हैं.
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