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Local bodies elections: कांग्रेस ने फाइनल किये नाम, बगावत के डर से फिर गुपचुप थमाये जा रहे हैं सिंबल

बताया जा रहा है कि विवाद की आशंका के चलते सूची सार्वजनिक नहीं की जा रही है. लेकिन इस फार्मूले पर अब सवाल भी उठ रहे हैं.
बताया जा रहा है कि विवाद की आशंका के चलते सूची सार्वजनिक नहीं की जा रही है. लेकिन इस फार्मूले पर अब सवाल भी उठ रहे हैं.

Local bodies elections: कांग्रेस ने नगर निगम और पंचायती राज चुनाव की तर्ज पर निकाय चुनावों के लिये प्रत्याशियों के नाम फाइनल कर उन्हें गुपचुप में सिंबल (Symbol) देने का काम शुरू कर दिया है.

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जयपुर. प्रदेश के 50 शहरी निकायों (Local bodies elections) में 11 दिसंबर को होने जा रहे पार्षद चुनावों के लिए कांग्रेस ने उम्मीदवार चयन (Candidate selection) का काम पूरा कर लिया है. ज्यादातर जगहों पर सिंबल बांटने (Symbol) का काम शुरू कर दिया गया है. शुक्रवार को पार्षद चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने का आखिरी दिन है. इसलिए गुरुवार को ही सिंबल बांटने का काम पूरा किया जा रहा है. पार्षदों के लिये 11 दिसंबर को मतदान होगा. उसके बाद 20 दिसंबर को नगरपालिका अध्यक्षों का चुनाव होना है.

पार्षद टिकट में भी विधायकों की ही चली
कांग्रेस ने निकाय चुनाव के टिकट वितरण में भी नगर निगम और पंचायत चुनाव वाला ही फार्मूला अपनाया है. टिकट वितरण में विधायकों की राय को ही ज्यादा महत्व दिया गया है. इससे पहले 6 नगर निगमों के चुनावों और 21 जिलों में हो रहे पंचायतीराज चुनावों में भी टिकट वितरण में यही फार्मूला अपनाया गया था. निकाय चुनाव परिणाम हो या पंचायत चुनाव दोनों में ही विधायकों और विधायक उम्मीदवारों की प्रतिष्ठा दांव पर है. 50 निकायों के चुनाव में कांग्रेस के सामने इनमें बोर्ड बनाने की बड़ी चुनौती रहेगी.

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सार्वजनिक घोषणा की जगह गुपचुप उम्मीदवारों को दिये जा रहे हैं सिंबल
कांग्रेस ने इस बार भी उम्मीदवारों की सूची मीडिया में सार्वजनिक करने की बजाय गुपचुप सिंबल देने का फार्मूला अपनाया है. इससे पहले पंचायत चुनाव में भी मीडिया में उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक नहीं की गई थी. बताया जा रहा है कि विवाद की आशंका के चलते सूची सार्वजनिक नहीं की जा रही है. लेकिन इस फार्मूले पर अब सवाल भी उठ रहे हैं. पर्यवेक्षकों के मुताबिक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके उम्मीदवार की घोषणा की बजाय गुपचुप सिंबल देने से अफवाहें फैलने के साथ असंतोष और तेज होता है. भितरघात की आशंका बढ़ती है. पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनावों में तो कई जगह सीधे रिटर्निंग ऑफिसर के पास सिंबल पहुंचाए गए थे.
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