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स्थानीय निकाय चुनाव: जयपुर में करीब 3000 दावेदार मांग रहे हैं पार्षद का टिकट

Goverdhan Chaudhary | News18 Rajasthan
Updated: October 17, 2019, 12:31 PM IST
स्थानीय निकाय चुनाव: जयपुर में करीब 3000 दावेदार मांग रहे हैं पार्षद का टिकट
कांग्रेस में पार्षद के टिकट जिला स्तर पर ही तय होंगे. फिलहाल टिकट वितरण के मापदंड तय नहीं किए गए हैं. फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

स्थानीय निकाय चुनाव (Local body elections) के नजदीक आने के साथ ही कांग्रेस (Congress) में पार्षद की टिकट (Councilor's ticket) मांगने वाले दावेदारों (Claimants) की भरमार हो गई है. सत्ताधारी पार्टी (Ruling party) होने के कारण कांग्रेस में पार्षद का टिकट लेने के लिए गहमागहमी ज्यादा है.

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जयपुर. स्थानीय निकाय चुनाव (Local body elections) के नजदीक आने के साथ ही कांग्रेस (Congress) में पार्षद की टिकट (Councilor's ticket) मांगने वाले दावेदारों (Claimants) की भरमार हो गई है. सत्ताधारी पार्टी (Ruling party) होने के कारण कांग्रेस में पार्षद का टिकट लेने के लिए गहमागहमी ज्यादा है. बड़ी संख्या में दावेदारों की संख्या कांग्रेस के लिए चुनौती (Challenge) से कम नहीं है. जिन नेताओं को टिकट नहीं मिलेंगे उनसे भीतरघात और बगावत (rebellion) का खतरा भी रहेगा.

दावेदारों ने बायोडाटा देना शुरू किया
कांग्रेस में पार्षद के टिकट जिला स्तर पर ही तय होंगे. फिलहाल टिकट वितरण के मापदंड तय नहीं किए गए हैं, लेकिन दावेदारों ने बायोडाटा देना शुरू कर दिया है. कांग्रेस के जिलाध्यक्षों के पास बड़ी संख्या में पार्षद की टिकटों के दावेदारों के बायोडाटा पहुंच रहे हैं. राजधानी जयपुर में टिकटों के दावेदार सबसे ज्यादा हैं. राजधानी में 3000 के करीब दावेदार पार्षद का टिकट मांगने के लिए कतार में खड़े हैं. जयपुर के अलावा बड़े शहरों और जिला मुख्यालयों के निकायों के लिए भी पार्षद की टिकट मांगने वाले दावेदारों की फेहरिस्त काफी लंबी है.

हर वार्ड में औसतन 15 से 20 दावेदार हैं

पार्षद की टिकटों का फैसला जिलों में ही होने के आसार ज्यादा होने के कारण जिलाध्यक्ष की राय मायने रखेगी. फिलहाल पार्षद टिकटों के लिए हर शहरी निकाय में एक अनार सौ बीमार वाली स्थिति है. हर वार्ड में औसतन 15 से 20 दावेदार हैं. चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद पार्षद की टिकटों के लिए हलचल तेज होगी.

निकाय चुनाव के लिए हुए हैं दो अहम बदलाव
आपको बता दें कि प्रदेश में इस साल के अंत से चार चरणों में निकाय चुनाव होने हैं. निकाय चुनाव का पहला चरण अगले माह होना प्रस्तावित है. इस बार निकाय प्रमुख का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से नहीं होकर अप्रत्यक्ष प्रणाली से होंगे. यानी निकाय प्रमुख का चुनाव सीधे जनता नहीं करेंगी, बल्कि पार्षद ही करेंगे. वहीं निकाय प्रमुख के लिए अब पार्षद होना जरूरी भी नहीं होगा. पार्षद का चुनाव नहीं लड़ने वाला और हारा हुआ प्रत्याशी भी निकाय प्रमुख का चुनाव लड़ सकेंगे। राज्य सरकार ने हाल ही में नियमों में बदलाव किया है.
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First published: October 17, 2019, 12:15 PM IST
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