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निकाय चुनाव: BJP ने शुरू की युद्धस्तर पर तैयारियां, पार्टी के सामने ये हैं बड़ी चुनौतियां

Sudhir sharma | News18 Rajasthan
Updated: October 31, 2019, 1:02 PM IST
निकाय चुनाव: BJP ने शुरू की युद्धस्तर पर तैयारियां, पार्टी के सामने ये हैं बड़ी चुनौतियां
वर्ष 2014 के निकाय चुनाव के बाद वर्ष 2019 में पूरा परिदृश्य बदल चुका है. यह परिदृश्य सरकार और वार्ड दोनों ही स्तरों पर बदल गया है.

प्रदेश में इस बार के निकाय चुनाव (Local Body Election) में फतह हासिल करना बीजेपी (BJP) के लिए चुनौती (Challenge) भरा वाला है. इसकी वजह बड़ी साफ है कि वर्ष 2014 में हुए निकाय चुनाव के दौरान प्रदेश में बीजेपी की सरकार (BJP government) थी, लेकिन इस बार प्रदेश में कांग्रेस की सरकार (Congress Government) है.

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जयपुर. प्रदेश में 49 निकायों के चुनावों (Local body elections) के लिए हलचल तेज हो गई है. बीजेपी (BJP) ने निकाय चुनावों में फतह हासिल करने के लिए युद्धस्तर पर तैयारियां शुरू कर दिया है. लेकिन पिछले निकाय चुनावों की अपेक्षा इस बार के चुनाव में फतह हासिल करना उसके लिए चुनौती (Challenge) भरा वाला है. इसकी वजह बड़ी साफ है कि वर्ष 2014 में हुए निकाय चुनाव के दौरान प्रदेश में बीजेपी की सरकार (BJP government)  थी, लेकिन इस बार प्रदेश में कांग्रेस की सरकार (Congress Government) है. वहीं कांग्रेस सरकार ने पिछड़े सवर्णों को देय 10 प्रतिशत आरक्षण (EWS Reservation) से संपत्ति संबंधी प्रावधान (Property provision)  को हटाकर बड़ा दांव भी खेल डाला है.

सरकार और वार्ड दोनों ही स्तरों पर बदल गया है परिदृश्य
वर्ष 2014 के निकाय चुनाव के बाद वर्ष 2019 में पूरा परिदृश्य बदल चुका है. यह परिदृश्य सरकार और वार्ड दोनों ही स्तरों पर बदल गया है. परिसीमन के बाद प्रदेश में 9 नए निकायों का गठन हो चुका है. इनमें 3 नए नगर निगम भी शामिल हैं. बीजेपी वार्डों के नए परिसमीन को लेकर प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर सवालिया निशान रही है. बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया का कहना है कि वर्ष 2011 की जनसंख्या के आधार पर वार्डों का पुनसीमांकन हो चुका था तो फिर से कांग्रेस सरकार ने ऐसा क्यों किया ? कांग्रेस ने अपने वोट बैंक के आधार पर वार्डों का परिसीमन कर दिया है.

बीजेपी कांग्रेस सरकार को मान रही है सबसे बड़ी चुनौती

बीजेपी के सामने शहरों में अपनी सरकार को बचाने की बड़ी चुनौती है. बीजेपी अपने सामने बड़ी चुनौती के रूप में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार को मान रही है. बीजेपी का आरोप है कि अभी तक राजस्थान में ऐसा कभी नहीं हुआ है कि पार्षदों के चुनाव के एक सप्ताह बाद निकाय अध्यक्ष और उपाध्यक्षों के चुनाव हुए हों. प्रदेशाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार अपना आंकड़ा बढ़ाने के लिए तमाम तरह की कोशिश करेगी. इसमें बाड़ाबंदी से लेकर डराने धमकाने तक का काम किया जाएगा.

बीजेपी के सामने ये भी हैं बड़ी चुनौतियां
- उपचुनाव के बाद कांग्रेस मजबूत स्थिति में आई है.
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- अब अनुछेच्छ 370 हटाने का असर भी कमजोर होने लगा है.
- महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों का भी मनोवैज्ञानिक असर पड़ रहा है.
- पार्टी में अंसतुष्टों का भी बड़ा धड़ा है. उससे भीतरघात की आशंका है.
- पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने पार्टी कार्यक्रमों से दूरियां बना रखी है.
- नवनियुक्त अध्यक्ष सतीश पूनिया अभी तक नई टीम नहीं बना पाए हैं.
- शहरों में कांग्रेस पार्टी की स्थिति में सुधार हुआ है.

बगावत का खतरा भी बरकरार है
हालांकि पार्टी में निष्ठावान कार्यकर्ताओं में सतीश पूनिया के अध्यक्ष बनने के बाद जोश का संचार हुआ है, लेकिन टिकट के दावेदारों की संख्या ज्यादा होने से बगावत का खतरा बरकरार है. उसे थामना पूनिया और उनकी टीम के सामने बड़ी चुनौती होगी. अगले 6 दिन बीजेपी के लिए खासे निर्णायक होंगे. पार्टी 1 नवंबर तक प्रत्याशियों के पैनल तैयार करेगी. नामांकन की आखरी तारीख 5 नवंबर है और 16 नवंबर को मतदान होगा. चुनाव प्रक्रिया में वक्त इतना कम है कि पार्टी में आपाधापी मची है. विधायकों से लेकर जिलाध्यक्षों तक के हाथ पांव फूले हुए हैं. देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी अपने शहरी किलों को कांग्रेसी आक्रमण से कितना महफूज रख पाती है.

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First published: October 31, 2019, 12:59 PM IST
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