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निकाय चुनाव: BJP-कांग्रेस के साथ BSP, माकपा, AAP और शिव सेना भी कूदी मैदान में

छत्तीसगढ़ में 151 नगरीय निकायों के लिए मतगणना मंगलवार सुबह 9 बजे से शुरू हो गई है.

छत्तीसगढ़ में 151 नगरीय निकायों के लिए मतगणना मंगलवार सुबह 9 बजे से शुरू हो गई है.

निकाय चुनाव (Local body elections) में बीजेपी-कांग्रेस (BJP-Congress) को थर्ड फ्रंट (Third front) की भी कड़ी चुनौती (Challenge) मिलेगी. बहुजन समाज पार्टी (BSP), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M), आम आदमी पार्टी (AAP) और शिवसेना (Shiv Sena) इस चुनाव में किस्मत आजमा रही है. RLP निकाय चुनाव में मैदान से बाहर है.

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जयपुर. निकाय चुनाव (Local body elections)  में बीजेपी-कांग्रेस (BJP-Congress) को थर्ड फ्रंट (Third front) की भी कड़ी चुनौती (Challenge) मिलेगी. विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस बार निकाय चुनाव में किस्मत आजमाने का फैसला किया है और अपने प्रत्याशी भी उतारे हैं. खास तौर से बहुजन समाज पार्टी (BSP), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) , आम आदमी पार्टी (AAP) और शिवसेना (Shiv Sena) इस चुनाव में किस्मत आजमा रही है. वहीं विधानसभा और लोकसभा चुनाव (Assembly and Lok Sabha elections) में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) निकाय चुनाव में मैदान से बाहर है.

इन चुनावों के जरिए बढ़ाया जा सकता है शक्ति और जनाधार
विधानसभा और लोकसभा चुनाव में चुनौती पेश करने के बाद अब थर्ड फ्रंट के दल निकाय चुनाव में भी बीजेपी-कांग्रेस को टक्कर दे रहे हैं. इन राजनीतिक दलों का मानना है कि वार्ड पार्षद के चुनाव में पार्टी के टिकट से ज्यादा प्रत्याशी की छवि और संपर्क ज्यादा मायने रखते है. ऐसे में अपनी शक्ति और जनाधार इन चुनावों के जरिए बढ़ाया जा सकता है.

पार्टियां अंदरुनी चुनौतियों से जूझ रही हैं
बसपा, आम आदमी और शिव सेना ने सभी निकायों में अपने प्रत्याशी उतारने का दावा किया है. माकपा अपने प्रभाव वाले जिलों में चुनिंदा सीटों पर चुनाव लड़ रही है. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी निकाय चुनाव के मैदान से बाहर है. इन पार्टियों ने निकाय चुनाव में अपने उम्मीदवार तो उतारे हैं, लेकिन प्रदेश में वर्तमान में थर्ड फ्रंट का ज्यादा बड़ा दायरा नहीं है. इतना ही नहीं ये पार्टियां वर्तमान में अपनी-अपनी खुद की अंदरुनी चुनौतियों से भी जूझ रही हैं.



बसपा में घमासान और आप के पास वजूद का संकट
बसपा ने विधानसभा चुनाव में 6 सीटें जीती थी, लेकिन अब ये सभी विधायक कांग्रेस का दामन थाम चुके हैं. इतना ही नहीं हाल ही में पार्टी के अंदर भी बड़े स्तर पर घमासान देखने को मिला है. ऐसे में मतदाताओं के बीच जाना बसपा के लिये बड़ी चुनौती होगी. आम आदमी पार्टी अभी तक प्रदेश के किसी भी चुनाव में उल्लेखनीय प्रदर्शन नहीं कर पाई है और राज्य में वजूद के संकट से जूझ रही है. माकपा ने विधानसभा चुनाव में दो सीटें जीती थी, लेकिन पार्टी का जनाधार कुछ ही जिलों तक सीमित है.

बड़ी पार्टियों का कर सकती है नुकसान
उधर, शिवसेना का अभी प्रदेश में कोई खास वजूद नहीं है और पार्टी पहली बार निकाय चुनाव में अपने प्रत्याशी उतार रही है. निकाय चुनाव में भी ये पार्टियां चौंकाने वाला प्रदर्शन कर पाएंगी इसकी संभावनायें कम ही हैं. लेकिन बीजेपी-कांग्रेस के समीकरणों को ये कुछ हद तक प्रभावित कर सकती हैं. बसपा कांग्रेस के लिए और शिवसेना बीजेपी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है.

बीजेपी ने रालोप को कहा 'ना'
थर्ड फ्रंट के लिहाज से सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने वाली रालोपा चुनाव मैदान में नहीं है. पार्टी ने विधानसभा चुनाव में 3 सीटें जीती थीं जबकि लोकसभा चुनाव में भी हनुमान बेनीवाल नागौर से सांसद बने थे. रालोपा ने पहले बीजेपी के साथ गठबंधन जारी रखते हुए चुनाव लड़ने का ऐलान किया था, लेकिन बाद में बीजेपी की ओर से 'ना' होने के बाद पार्टी ने चुनाव मैदान से बाहर रहना ही उचित समझा है.

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