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Rajasthan: नवनिर्वाचित 50 निकाय प्रमुखों में से 10 केवल साक्षर, 4 आठवीं तो 13 दसवीं पास

आज उप सभापति और पालिका उपाध्यक्षों का चुनाव होगा.
आज उप सभापति और पालिका उपाध्यक्षों का चुनाव होगा.

प्रदेश के 50 निकायों में चुने गए निकाय प्रमुखों में से 20 फीसदी महज साक्षर (Literate) हैं. वहीं चार निकाय प्रमुख आठवीं और 13 दसवीं पास हैं. शेष इनसे ज्यादा पढ़े-लिखे (Educated) हैं.

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जयपुर. प्रदेश के 12 जिलों के 50 स्थानीय निकायों के चुनावों में कांग्रेस (Congress) का दबदबा रहा. कांग्रेस 36 निकायों में अपने प्रमुख बनाने में सफल रही, जबकि बीजेपी (BJP) के 12 निकायों में अपना प्रमुख बना सकी हैं. 2 निकायों में निर्दलीय अध्यक्ष/सभापति चुने गए हैं. चुने गये इन निकाय प्रमुखों में से 10 निकायों में अध्यक्ष/सभापति केवल साक्षर हैं. जबकि 4 निकाय प्रमुख आठवीं और 13 दसवीं पास हैं. इन सभी पर शहरों और कस्बों के विकास का बड़ा जिम्मा है.

चुनाव आयोग के अनुसार नव निर्वाचित निकाय प्रमुखों के शिक्षा का स्तर देखें तो इनमें में 10 केवल साक्षर हैं. 4 निकाय प्रमुख आठवीं और 13 दसवीं पास हैं. इनके अलावा शेष ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट तक पढ़े लिखे हैं. इन 50 निकाय प्रमुखों से 28 पुरुष और 22 महिला हैं. इन स्थानीय निकायों में 7 नगर परिषद और 43 नगरपालिकायें शामिल हैं. इन 7 नगर परिषदों में से 5 पर कांग्रेस ने अपना कब्जा जमाया है. वहीं एक में 1 बीजेपी और 1 में निर्दलीय सभापति काबिज हुये हैं.

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आज उप सभापति और पालिका उपाध्यक्षों का चुनाव 


राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार इन सभी निकायों के 1775 वार्डों में से 620 पर कांग्रेस ने जीत दर्ज कराई है. जबकि 548 में बीजेपी ने और 595 में निर्दलीय पार्षद जीते हैं. वहीं 7 वार्ड बसपा के खाते में आये हैं. 7 सीपीआई, 2, सीपीआईएम और 1 वार्ड में आरएलपी के प्रत्याशी ने जीत हासिल की है. अब सोमवार को इन 50 निकायों में उप सभापति और पालिका उपाध्यक्षों का चुनाव होगा.

कांग्रेस की जीत और बीजेपी की हार
उल्लेखनीय है कि इन चुनावों में कांग्रेस के पास महज 15 निकायों में ही स्पष्ट बहुमत था. लेकिन उसने निर्दलीयों की मदद से 36 निकायों में अपने प्रमुख बना लिये. जबकि बीजेपी के पास भी महज 4 निकायों में साफ बहुमत था. लेकिन उसने भी निर्दलीयों का सहयोग लेकर बहुमत से तीन गुणा ज्यादा 12 निकायों में अपने निकाय प्रमुख बना लिये हैं. लेकिन इन चुनावों में इस बार बीजेपी का बड़ा नुकसान है, जबकि कांग्रेस ने बड़ी छलांग लगाई है. वर्ष 2015 में बीजेपी के पास इन 50 निकायों में 34 में उसके अध्यक्ष/सभापति थे. कांग्रेस ने गत बार की तुलना में करीब तीन गुणा ज्यादा निकाय सभापति और पालिकाध्यक्ष बनाए हैं.
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