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Lockdown में बेखौफ हुए शिकारी, राजस्थान के 4 जिलों में 169 मोरों का शिकार, हड़कंप

Lockdown में बेखौफ हुए शिकारी, राजस्थान के 4 जिलों में 169 मोरों का शिकार, हड़कंप

पीएफए ने 169 मोर सहित 194 परिंदों के शिकार की एफआईआर दर्ज कराई है.

पीएफए ने 169 मोर सहित 194 परिंदों के शिकार की एफआईआर दर्ज कराई है.

COVID-19 के चलते लागू Lockdown के बीच बीकानेर, चुरू, नागौर और टोंक जिलों में पिछले 2 महीनों में राष्ट्रीय पक्षी और अन्य परिंदों के शिकार की ताबड़तोड़ घटनाओं से वन विभाग में हड़कंप.

जयपुर. कोरोना वायरस (COVID-19) की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन (Lockdown) में प्रदेश में शिकारी बेखौफ हो गए हैं. लॉकडाउन में वन विभाग की सुस्ती के कारण शिकारियों ने बेखौफ होकर बड़ी संख्या में राष्ट्रीय पक्षी मोर (Peacock) समेत हिरण, तीतर व कमेड़ी सहित कई वन्यजीवों का शिकार किया है. दो महीने में महज 4 जिलों में शिकारियों ने 169 मोरों को मौत के घाट उतार दिया.

सबसे ज्यादा बीकानेर में मारे गए

पीपुल फॉर एनीमल्स के प्रदेश प्रभारी बाबूलाल जाजू ने बताया कि बीकानेर में 8 अप्रैल 2020 को श्रीकोलायत तहसील के लोईया गांव की रोही में एक साथ बड़े पैमाने पर 23 मोर, 20 तीतर और 5 कमेड़ियों का शिकार किया गया है. बीकानेर जिले के ही श्रीडूंगरगढ़ तहसील के सेरुणा की खेत में इससे भी ज्यादा 35 मोरों को मौत घाट उतार दिया गया. इसी तरह बीकानेर के लूणकरणसर तहसील के खोखराज गांव में 15 मोरों का शिकार हुआ. 14 अप्रैल को श्री डूंगरगढ़ रेंज के बिग्गा का बास में 6 मोरों की हत्या हुई.

नागौर, चूरू और टोंक में है ये हालात

नागौर जिले की डेगाना तहसील के गच्छीपुरा में 7 मोर और कुचेरा क्षेत्र के गाजू व ढाढरिया खुर्द सरहद में 14 मोरों का शिकार हुआ. टोंक जिले में मार्च में पीपलू तहसील के ग्राम सिसोला में 15 मोर और 10 अप्रैल को गुराई तहसील के देवली में 10 मोरों का शिकार किया गया. 13 अप्रैल को टोंक के उनियारा तहसील के कल्याणपुरा में 6 मोरों और नासिरदा में मालेड़ा गांव में 20 मार्च को 10 राष्ट्रीय पक्षी की हत्या की गई. मार्च में ही चुरू जिले के छापर चाड़वास गांव के पास 23 मोरों की शिकारियों ने जहरीला दाना डालकर हत्या कर दी.

सभी मामलों में एफआईआर दर्ज

पीएफए ने 169 मोर सहित 194 परिंदों के शिकार की एफआईआर दर्ज कराई है. बाबूलाल जाजू ने बताया कि इन सभी मामलों में पुलिस अधीक्षक बीकानेर, नागौर, टोंक और चूरू को ई-मेल तथा रजिस्टर्ड डाक से शिकायत भेजकर एफआईआर दर्ज कराई गई है. जाजू ने बताया कि मोरों की हत्या में खुलेआम गनशॉट का इस्तेमाल किया जा रहा है. जाल से पक्षी पकड़े जा रहे हैं और जहरीला दाना डाल कर उन्हें मारा जा रहा है. कोरोना काल में इस साल 2 महीने में ही मोरों की रिकॉर्ड तोड़ हत्याएं की गई हैं. दर्ज कराए गए मामले सिर्फ वो हैं जो सामने आए हैं, असल में मामले इससे दोगुने भी हो सकते हैं.

रणथम्भौर नेशनल पार्क में हिरण और चीतल का शिकार

बाबूलाल जाजू ने बताया कि कोरोना लॉकडाउन के चलते न सिर्फ मोर, बल्कि रणथम्भौर नेशनल पार्क में हिरण और चीतल के शिकार की 4 घटनाएं और 50 जगह पेड़ों की कटाई व अवैध खनन के मामले भी सामने आए हैं. जाजू ने बताया कि वन विभाग की गश्त नहीं के बराबर होने से राजस्थान के ज्यादातर जिलों में जंगलों में पेड़ों की कटाई व शिकार की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है.

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Tags: Forest department, Jaipur news, Rajasthan news

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