Rajasthan: किसानों की दुश्मन टिड्डी पर अब 'Air strike' करने की तैयारी, हवा में ही यूं मार गिराया जाएगा

उत्तर प्रदेश में टिड्डी दल के हमले पर आपदा राहत दल का गठन किया गया है
उत्तर प्रदेश में टिड्डी दल के हमले पर आपदा राहत दल का गठन किया गया है

राजस्थान में 50,000 हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाने के बाद मध्यप्रदेश तक पहुंचे टिड्डी दल (Locust) ने केंद्र सरकार की चिंताएं बढ़ा दी है. पाकिस्तान की तरफ से आए किसानों (Farmers) के इस सबसे बड़े दुश्मन पर अब केंद्र सरकार हवाई हमला (Air strike) करने की योजना बना रही है.

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जयपुर. राजस्थान में 50,000 हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाने के बाद मध्यप्रदेश तक पहुंचे टिड्डी दल (Locust) ने केंद्र सरकार की चिंताएं बढ़ा दी है. पाकिस्तान की तरफ से आए किसानों (Farmers) के इस सबसे बड़े दुश्मन पर अब केंद्र सरकार हवाई हमला (Air strike) करने की योजना बना रही है. इसके लिए इंग्लैंड से विशेष उपकरण जल्द ही भारत पहुंचेंगे. नैनो पार्टिकल्स टेक्नोलॉजी पर आधारित इन उपकरणों की मदद से किसी भी क्षेत्र की ओर बढ़ रहे टिड्डी दल को हवा में ही मार गिराया जाएगा.

अब हवा में ही मारने की योजना
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने लॉकडाउन से पहले ही पांच 22-माइक्रोनियर मशीनों और पांच 28-आईवामास मशीनों के इंग्लैंड से आयात को मंजूरी दे दी थी. लॉकडाउन लगने से पहले इन मशीनों का आर्डर भी दे दिया गया था, लेकिन कोरोना संक्रमण के बाद लगे लॉकडाउन के कारण इंग्लैंड से इन मशीनों की आपूर्ति नहीं हो पाई थी. केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने बताया कि अब जब जिंदगी पटरी पर लौट रही है तो ऐसे में इनके जल्द भारत पहुंचने की उम्मीद है.

हेलीकॉप्टरों से भी टिड्डी दल पर केमिकल छिड़काव करने की योजना है
मशीन से केमिकल डालते ही नैनो पार्टिकल्स टेक्नोलॉजी पर आधारित यह मशीन 50 वर्ग मीटर से भी बड़ा एक केमिकल क्लाउड बना देती है. उसमें 96% वॉल्यूम वाला घातक मिलेथिऑन केमिकल होता है. टिड्डी दल जैसे ही उस केमिकल क्लाउड के संपर्क में आता है तो केमिकल टिड्डी के पंखों से होते हुए नर्वस सिस्टम पर अटैक करता है और किसानों की दुश्मन टिड्डी वहीं ढेर हो जाती है. साथ ही कृषि मंत्रालय योजना बना रहा है कि सेना के हेलीकॉप्टरों की भी टिड्डी दल नियंत्रण में मदद ली जाए. मंजूरी मिलते ही सेना के हेलीकॉप्टरों से भी टिड्डी दल पर केमिकल छिड़काव करने की योजना है.



सबकुछ साफ कर देगी डेजर्ट लॉकस्ट टिड्डी
पिछले साल जून में टिड्डी दल ने पाकिस्तान से राजस्थान के रास्ते भारत में प्रवेश किया था. वह टिड्डी की सामान्य ब्रीड थी जो दिन में अधिकतम 50 किलोमीटर तक उड़ सकती थी. रात में घने पेड़ों और लहलहाती फसल पर अपना डेरा डालती थी. एक बार डेरा डालने के बाद रात को किसी भी तरह के शोर या दवाई के छिड़काव के बावजूद उड़ती नहीं थी. कृषि मंत्रालय के विशेषज्ञ बताते हैं कि आईटीडी की ब्रीड का अध्ययन करने पर पता चला है कि इस बार आई डिड्डी की ब्रीड बेहद घातक और चालाक है. डेजर्ट लॉकस्ट ब्रीड की यह टिड्डी 1 दिन में 150 किलोमीटर से 600 किलोमीटर तक की दूरी नाप लेती है. रात को हल्के से शोर से भी उड़ जाती है. ऐसे में रात को भी दवाई का छिड़काव करके इसे खत्म करना चुनौती बन गया है.

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