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लोकसभा चुनाव से पहले गहलोत सरकार का 'गौरक्षा' पर मास्टर स्ट्रोक!

प्रतिकात्मक तस्वीर.
प्रतिकात्मक तस्वीर.

लोकसभा चुनाव की आचार संहिता से पहले तुरत-फुरत में आयोजित होने जा रहे गौरक्षा सम्मेलन को राजस्थान की गहलोत सरकार का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है.

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लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश में कांग्रेस बीजेपी से गाय का मुद्दा हथियाना चाहती है. प्रदेश में पहली बार गौरक्षा सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है. आचार संहिता से पहले तुरत-फुरत में आयोजित होने जा रहे इस सम्मेलन को गहलोत सरकार का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है.

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वीहिन्दू धर्म में पूज्य मानी गई गाय अब चुनाव में बड़ा मुद्दा बनती जा रही है. बीजेपी के कोर इश्यू कहे जाने वाले इस मुद्दे को अब प्रदेश में कांग्रेस हथियाने की कवायद कर रही है. प्रदेश में पहली बार गौरक्षा सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है. लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से पूर्व होने जा रहे इस गौरक्षा सम्मेलन को सियासी मायनों में भी काफी अहम माना जा रहा है. इस गौरक्षा सम्मेलन के जरिये कांग्रेस बीजेपी के परम्परागत वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश करेगी.



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सम्मेलन में गौशालाओं के प्रतिनिधियों से गायों के संरक्षण और संवर्द्धन के साथ ही गौशालाओं के समुचित रुप से संचालन के लिए सुझाव लिए जायेंगे. गौशालाओं के प्रतिनिधियों को लिखित में ये सुझाव लाने को कहा गया है. एक दर्जन से ज्यादा प्रतिनिधियों को मंच से भी अपने सुझाव रखने का मौका मिलेगा. गोपालन विभाग के मंत्री प्रमोद जैन भाया के साथ ही पशुपालन विभाग के मंत्री लालचन्द कटारिया भी सम्मेलन में शामिल होंगे.

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इस सम्मेलन में तीन आदर्श गौशालाओं को राज्यस्तरीय पुरस्कार भी प्रदान किये जाएंगे. इसके साथ ही डेयरी के जो नए पांच हजार बूथ प्रदेश में खोले जाने हैं उनके कुछ आवंटन पत्र भी सम्मेलन में प्रदान कर इसकी शुरुआत की जा सकती है. राज्य सरकार द्वारा तुरत-फुरत में इस गौरक्षा सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है. दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री ने इसमें आने की सहमति दी है जिसके बाद गोपालन विभाग के स्तर पर आयोजन की बड़े स्तर पर तैयारियां की जा रही है.

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दरअसल राज्य सरकार की मंशा आचार संहिता लगने से पहले यह आयोजन करने की है ताकि लोकसभा चुनाव में इसका लाभ लिया जा सके. गौरतलब है कि हाल ही में राज्य सरकार ने आवारा गौवंश का संरक्षण करने वालों को सम्मानित किये जाने की भी शुरुआत की है. कांग्रेस सरकार की इन कवायदों को सियासी लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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