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लोकसभा चुनाव-2019 : बीजेपी के लिए इस बार आसान नहीं है राह, बहाना पड़ेगा पसीना

राजस्थान में बीजेपी संगठन।

राजस्थान में बीजेपी संगठन।

लोकसभा चुनाव-2014 में प्रदेश की सभी 25 सीटों पर कब्जा जमाने वाली बीजेपी के लिए इस बार यह इतना आसान नहीं होगा.

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लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों में सरगर्मियां बढ़ गई हैं. काफी समय से लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे राजनीतिक दलों के पास अब सीमित समय बचा है. प्रदेश में अभी तक किसी भी पार्टी ने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है. अभी प्रत्याशियों के चयन के लिए माथापच्ची की जा रही है.

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लोकसभा चुनाव-2014 में प्रदेश की सभी 25 सीटों पर कब्जा जमाने वाली बीजेपी के लिए इस बार यह इतना आसान नहीं होगा. लोकसभा चुनाव-2014 में मोदी लहर में प्रदेश की सभी सीटें को अपनी झोली में डालने वाली बीजेपी को हाल ही में विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा है. इससे पहले गत वर्ष अजमेर और अलवर लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में भी बीजेपी कांग्रेस से मात खा चुकी है. विधानसभा चुनाव-2013 में 200 में से 163 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई बीजेपी को उस चुनाव के बाद पहला झटका लोकसभा चुनावों के तत्काल बाद झुंझुनूं जिले की सूरजगढ़ विधानसभा के लिए हुए उपचुनाव में लग गया था.



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पहले उपचुनाव में ही खानी पड़ी थी मात
सूरजगढ़ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतने वाली विधायक संतोष अहलावत को पार्टी ने लोकसभा चुनाव मैदान में उतारा था. उनके चुनाव जीत जाने के कारण सूरजगढ़ सीट खाली हो गई थी, लिहाजा वहां उपचुनाव हुआ था. वहां बीजेपी ने पार्टी के कद्दावर नेता डॉ. दिगंबर सिंह को चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन विधानसभा चुनावों में दो-तिहाई से ज्यादा बहुमत लेने वाली पार्टी डॉ. सिंह को चुनाव नहीं जीता पाई. वहीं कोटा दक्षिण के विधायक ओम बिरला के भी लोकसभा चुनाव जीतने से खाली हुई उस सीट पर भी पहले जितने वोट नहीं जुटा पाई थी. बीजेपी ने उस समय कोटा दक्षिण की सीट पर जीत तो दर्ज कराई, लेकिन जीत का अंतर बेहद कम हो गया था.

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लोकसभा उपचुनाव में अलवर-अजमेर सीट हाथ से निकली
उसके बाद अलवर और अजमेर के तत्कालीन सांसदों के निधन के कारण खाली हुई इन दो सीटें पर भी गत वर्ष हुए उपचुनाव में ये सीटें बीजेपी के हाथ से निकलकर कांग्रेस के खाते में चली गई. इन उपचुनावों के साथ ही भीलवाड़ा के मांडलगढ़ की विधायक कीर्ति कुमारी के निधन से खाली हुई सीट पर हुए उपचुनाव में भी बीजेपी को मात खानी पड़ी. इन उपचुनावों में मात खाने के बाद बीजेपी हाल ही हुए विधानसभा चुनावों में भी 73 सीटों पर ही सिमट गई थी.

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लोकसभा चुनाव एक बड़ी चुनौती
विधानसभा चुनाव में बीजेपी को एक झटका और लगा. प्रदेश की अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित दौसा सीट से जीते उसके सांसद हरीश मीना ने भी पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था. ऐसे में प्रदेश बीजेपी के लिए लोकसभा चुनाव एक बड़ी चुनौती है. उसे लोकसभा चुनावों के लिए काफी पसीना बहाना पड़ेगा.

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