लोकसभा चुनाव-2019: बीजेपी और आरएलटीपी का गठबंधन, ऐसे बनी बात...
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लोकसभा चुनाव-2019: बीजेपी और आरएलटीपी का गठबंधन, ऐसे बनी बात...
फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी और आरएलटीपी का गठबंधन होने के पीछे कई कारण रहे हैं. बीजेपी की नागौर में मजबूत जाट चेहरे की जरूरत और बेनीवाल की महत्वकांक्षाओं के मेल से प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों का उदय हुआ.

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लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी और खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का गठबंधन होने के पीछे कई कारण रहे हैं. बीजेपी की नागौर में मजबूत जाट चेहरे की जरूरत और बेनीवाल की महत्वकांक्षाओं के मेल से प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों का उदय हुआ है.

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दरअसल बीजेपी के पास नागौर में कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति मिर्धा के मुकाबले कोई जीताऊ उम्मीदवार नहीं था. मौजूदा सांसद सीआर चौधरी सर्वे में हार रहे थे. बीजेपी के कई पूर्व विधायक और मंत्री सीआर चौधरी का विरोध कर रहे थे. जिले के बड़े बीजेपी नेता युनुस खान, विजय सिंह और मानसिंह किनसरिया समेत कई नेता सीआर चौधरी से खफा थे. ऐसे में पार्टी के पास दूसरा कोई मजबूत जाट चेहरा नहीं था.



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दूसरी तरफ अपनी नवगठित पार्टी आरएलटीपी के जरिए राजनीति के मैदान में नई पारी की शुरुआत कर रहे खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल के सपने उस समय चकनाचूर हो गए जब चुनावी नतीजों में कांग्रेस बहुमत के आंकड़े के पास पहुंच गई. खंडित जनादेश मिलने की संभावनाओं के चलते खुद के लिए बड़ी भूमिका तैयार करने में जुटे हनुमान बेनीवाल के लिए यह तगड़ा झटका था. आरएलटीपी के कार्यकर्ता नई सरकार के गठन के बाद इस बात से परेशान थे कि आखिर उनका नेता सरकार का हिस्सा बने बिना कैसे पार्टी को मजबूत करेगा.

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ज्योति मिर्धा को टिकट मिलने के बाद बदले हालात
इन्हीं ऊहापोह के हालात के बीच लोकसभा चुनाव सिर पर आ गए. इस पर हनुमान ने पहले कांग्रेस से करीबियां बढ़ाई, लेकिन उनकी शर्तों के आगे वह झुकी नहीं. वहीं कांग्रेस ने अटकते अटकाते जब नागौर से पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा का टिकट फाइनल कर दिया तो हनुमान बौखला उठे. कांग्रेस को सबक सिखाने के मकसद से हनुमान ने बीजेपी से संपर्क साधा. दूसरी तरफ बीजेपी खुद हनुमान से नजदीकियां बढ़ाना चाहती थी. इसलिए जैसे ही हनुमान और बीजेपी नेता आपस में मिलने लगे तो पार्टी के बड़े नेताओं की बांछें खिल गईं और बात बन गई.

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