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बाड़मेर और सीकर पर टिकी हैं मतदाताओं की निगाहें, जानिए क्यों खास हैं ये सीटें

मानवेन्द्र सिंह। फाइल फोटो।

मानवेन्द्र सिंह। फाइल फोटो।

प्रदेश में दो चरणों में हुए लोकसभा चुनाव में मारवाड़ की बाड़मेर और शेखावाटी की सीकर सीटें जबर्दस्त चर्चा में है. ये वो सीटें हैं जहां बीजेपी को अपने ही पुराने धुंरधंरों से जूझना पड़ा है.

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प्रदेश में दो चरणों में हुए लोकसभा चुनाव में मारवाड़ और शेखावाटी की दो सीटें जबर्दस्त चर्चा में है. ये वो सीटें हैं जहां बीजेपी को अपने ही पुराने धुंरधंरों से जूझना पड़ा है. मारवाड़ में बाड़मेर और शेखावाटी में सीकर दोनों सीटों पर इस बार बीजेपी छोड़कर गए दो दिग्गजों ने कांग्रेस के सिंबल पर बीजेपी को चुनौती दी है. ये दोनों ही लोकसभा क्षेत्र प्रदेश में राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम हैं. इन
दोनों ही जगहों पर पीएम नरेन्द्र मोदी ने चुनावी सभाएं कर सियासी समीकरण साधे हैं.

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पश्चिमी राजस्थान में बॉर्डर इलाके में स्थित बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने इस बार मानवेन्द्र सिंह को चुनाव मैदान में उतार रखा है. मानवेन्द्र सिंह बीजेपी के संस्थापक सदस्य रहे पूर्व केन्द्रीय मंत्री जसवंत सिंह के पुत्र हैं. मानवेन्द्र बाड़मेर-जैसलमेर से पूर्व में बीजेपी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़कर रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज करा चुके हैं. उसके बाद वे बाड़मेर के शिव विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के विधायक भी चुने गए. लेकिन गत लोकसभा चुनाव में पिता जसवंत सिंह का टिकट कटने के बाद उन्होंने पार्टी से दूरी बना ली. बाद में पिछले दिनों हुए विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने बीजेपी को अलविदा कह दिया और कांग्रेस के खेमे में आ गए थे. यहां मानवेन्द्र को चुनौती देने के लिए बीजेपी ने बायतू के पूर्व विधायक कैलाश चौधरी को चुनाव मैदान में उतार हुआ है.

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महरिया तीन बार सांसद रह चुके हैं 
कुछ ऐसा ही हाल सीकर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार सुभाष महरिया का है. दिग्गज नेता सुभाष महरिया पूर्व में बीजेपी के टिकट पर तीन बार सीकर से सांसद का चुनाव जीत चुके हैं. वे अटल सरकार में केन्द्र में राज्यमंत्री रहे. लेकिन गत चुनाव में पार्टी ने जब उनका टिकट काटा तो वे बगावत पर उतर आए और निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए थे. हारने के बाद उन्होंने भी कांग्रेस का दामन थाम लिया. कांग्रेस ने उनको सीकर से उम्मीदवार बनाया. महरिया का यह सातवां चुनाव है. वे लगातार पांच लोकसभा चुनाव बीजेपी से लड़े. छठी बार वे निर्दलीय चुनाव मैदान और अब कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव मैदान में हैं. उनका मुकाबला बीजेपी के मौजूदा सांसद स्वामी सुमेधानंद से है. महरिया के चाचा रामदेव सिंह महरिया कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं. वे कई बार धोद विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे और बाद में मंत्री भी रहे.

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सुभाष महरिया। फाइल फोटो।


सीकर और बाड़मेर दोनों जगह आकर गए हैं पीएम मोदी
लोकसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी ने प्रदेश में आठ स्थानों पर चुनावी सभाएं की. इनमें से दो सभाएं बाड़मेर और सीकर में हुई. इन दोनों सीटों पर पीएम मोदी की सभाओं में अच्छी खासी भीड़ उमड़ी. यह बात दीगर है कि मोदी की सभा में आई भीड़ वोट बैंक में कितना तब्दील हो पाई. लेकिन इन दोनों स्थानों पर बीजेपी ने अपने पुराने धुंरधरों से जूझने में अच्छा खासा पसीना बहाया है.

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