पायलट के तंज से फिर सियासी हलचल, वसुंधरा की जगह BJP का नेता कौन?

विधानसभा चुनाव 2018 में सत्ता बचाने में नाकाम रही वसुंधरा राजे को बाहर भेजने और प्रदेश में बीजेपी के नेतृत्व पर डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने तंज कसा है. इस बयान ने पार्टी में सुगबुगाहट शुरू कर दी है.

News18Hindi
Updated: April 18, 2019, 8:50 PM IST
पायलट के तंज से फिर सियासी हलचल, वसुंधरा की जगह BJP का नेता कौन?
वसुंधरा राजे. (फाइल फोटो)
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Updated: April 18, 2019, 8:50 PM IST
राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने एक बार फिर वसुंधरा राजे और प्रदेश में बीजेपी नेतृत्व को लेकर तंज कसा है. हाल ही नागौर में चुनावी सभा को संबोधित करते समय पायलट ने पूछा था कि 'वसुंधरा को राजस्थान से बाहर भेज दिया है और अब बीजेपी का नेता कौन है? भाजपाइयों को मालूम नहीं है'. पालयट के इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे कोराष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाने और राज्य के बाहर भेजने का मुद्दा चर्चा में आ गया. विधानसभा चुनाव 2018 में सत्ता बचाने में नाकाम रही वसुंधरा से प्रदेश का नेतृत्व वापस लेने और किसी अन्य नेता को कमान सौंपने की सुगबुगाहट को पायलट ने फिर से हवा दे दी. हालांकि कांग्रेस का इसके पीछे तर्क कुछ भी हो लेकिन लक्ष्य लोकसभा चुनाव का 'मिशन 25' ही है.

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सचिन पायलट ने वसुंधरा राजे को लेकर क्या कहा?

डिप्टी सीएम पायलट ने नागौर लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति मिर्धा की नामांकन रैली में कहा, बीजेपी ने वसुंधरा को राजस्थान से बाहर भेज दिया है. प्रदेश में इनके नेता कौन है इन्हें मालूम नहीं है. अब आपस में झगड़े कर रहे हैं और विरोधाभास भी है. फिर भी भाजपाई अफवाह फैला रहे हैं कि सचिन पायलट और अशोक गहलोत की आपस में बनती नहीं. हकीकत में ऐसा नहीं है.

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वसुंधरा राजे. (फाइल फोटो)


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वसुंधरा को बाहर और प्रदेश में नेतृत्व का मसला
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राजस्थान की 15वीं विधानसभा में सत्ता काबिज रखने में नाकाम रही वसुंधरा राजे ने नतीजा के बाद 11 दिसंबर को ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इसी के साथ शुरू हुआ कयासों का बाजार कि सत्तारुढ़ कांग्रेस के सामने बीजेपी विपक्ष का नेता किसे बनाएगी? क्या पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे नेता प्रतिपक्ष बनेंगी? अथवा किसी अन्य नेता को यह जिम्मेदारी दी जाएगी. विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में वसुंधरा राजे का राजपूत समाज की ओर से विरोध और फिर टिकटों को लेकर जिस कदर केंद्र और स्टेट के बीच चीजें उलझी थी, कयास लगाए जाने लगे की वसुंधरा को अब ये मौका नहीं दिया जाएगा. हुआ भी ऐसा ही बीजेपी के वरिष्ठ नेता गुलाबचंद कटारिया को 13 जनवरी को राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बना दिया गया. लेकिन इससे पहले 10 जनवरी को ही राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को पार्टी ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दे दी.

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बाएं से राज्यवर्धन सिंह राठौड, ओमप्रकाश माथुर, भूपेंद्र यादव और गजेंद्र सिंह शेखावत.


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इन नामों पर लगाए जा रहे कयास

राजस्थान में पिछले कई सालों से वसुंधरा राजे का मतलब बीजेपी और बीजेपी का मतलब वसुंधरा राजे कहा जाता रहा है. ऐसा इसलिए भी कहा जाता है क्यों कि मौजूदा समय में राज्य में वसुंधरा के कद का बीजेपी में कोई दूसरा चेहरा नहीं रहा. हालांकि पार्टी में ओम माथुर, भूपेंद्र यादव जैसे कई दिग्गज नेता हैं, लेकिन इनके पास जनाधार नहीं है. गजेंद्र सिंह शेखावत और राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के रूप में भी कुछ लोग भावी नेतृत्व तलाश रहे हैं लेकिन विधानसभा चुनाव में अपने दम पर 2008 में 78 और 2018 में 73 सीटें जीतकर विरोध में उठने वाले सवालों को करार जवाब दिया. हालांकि अगले विधानसभा चुनाव में अभी पांच साल शेष हैं और अभी प्रदेश नेतृत्व पर कयास लगाना जल्दबाजी होगी.

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