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विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा चुनाव में भी BJP पर भारी पड़ेगी राजपूतों की नाराजगी?
Jaipur News in Hindi

sambrat chaturvedi | News18Hindi
Updated: May 2, 2019, 7:56 PM IST
विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा चुनाव में भी BJP पर भारी पड़ेगी राजपूतों की नाराजगी?
प्रतिकात्मक तस्वीर. (Image: Reuters)

राजस्थान के नागौर लोकसभा क्षेत्र में राजपूत समाज ने कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति मिर्धा को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है. ऐसे में क्या बीजेपी पर राजपूतों की ये नाराजगी भारी पड़ेगी?

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राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2018 में सत्ता से बाहर हुई बीजेपी को लोकसभा चुनाव 2019 में भी राजपूतों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है. बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा क्षेत्र में मानवेंद्र सिंह और जोधपुर लोकसभा क्षेत्र में गजेंद्र सिंह शेखावत के भाग्य का फैसला तो ईवीएम में कैद हो चुका है लेकिन अभी नागौर लोकसभा सीट पर बीजेपी राजपूतों की नाराजगी और बिगड़े माहौल के डेमेज कंट्रोल में जुटी हुई है. यहां 6 मई को मतदान होना है और दो दिन पहले ही राजपूत समाज ने कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति मिर्धा को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है. ऐसे में क्या बीजेपी पर राजपूतों की ये नाराजगी भारी पड़ेगी? यही सवाल सियासी गलियारों खासकर राजपूत हलको में चर्चा का विषय बना हुआ है.

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नागौर में 6 दिन पहले राजपूतों का ऐलान, कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति को समर्थन



नागौर लोकसभा सीट पर राजपूत संगठनों के कांग्रेस को एकतरफा समर्थन देने के ऐलान ने चुनावी घमासान को और दिलचस्प बना दिया है. यहां मतदान(6 मई) से ठीक 6 दिन पहले डीडवाना में राजपूत समाज की बैठक बुलाई. जिलेभर के विभिन्न इलाकों से इस बैठक में राजपूत समाज के लोग शामिल हुए और ऐलान किया गया कि राजपूत समाज कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति मिर्धा को समर्थन देगा.



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मकराना राजपूत समाज की बैठक. इसमें ज्योति मिर्धा के समर्थन का आह्वान किया गया.ये भी पढ़ें- मोदी की रैली में राज्यवर्धन की हुंकार, धारा 370 हटाकर रहेंगे

बता दें कि इससे कुछ दिन पहले ही चूरू विधायक और बीजेपी सरकार में मंत्री रहे राजेंद्र राठौड़ के नेतृत्व में कुचामन में ही एक बैठक में एनडीए प्रत्याशी को समर्थन करने का आह्वान किया था. लेकिन मतदान से पहले फिर से समाज की बैठक में बीजेपी के खिलाफ माहौल देखा गया. इस बैठक में बैठक के बाद पीसीसी सदस्य श्यामप्रताप सिंह ने दावा किया कि राजपूत समाज ज्योति मिर्धा को समर्थन करेगा.

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डेमेज कंट्रोल में जुटी बीजेपी

जोधपुर, बाड़मेर-जैसलमेर में मतदान के बाद अब बीजेपी और कांग्रेस ने अपना सारा दमखम नागौर लोकसभा सीट पर लगा दिया है. बीजेपी की ओर से यहां राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के हनुमान बेनीवाल चुनावी मैदान में है तो कांग्रेस की ओर से ज्योति मिर्धा. दो दिन पहले डीडवाना में राजपूत समाज ने ज्योति को समर्थन का ऐलान करने के बाद बीजेपी ने डेमेज कंट्रोल करने में जुटी. इसी क्रम में गुरुवार को योगी आदित्यनाथ की सभा डीडवाना में रखी गई. इसी सभा में जोधपुर से चुनाव लड़ रहे बीजेपी नेता गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी राजपूत समाज से हनुमान बेनीवाल को वोट देने की अपील की है.

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जोधपुर में मतदान से 20 दिन पहले हुए राजपूत एकजुट

जोधपुर लोकसभा सीट पर मतदान(29 अप्रैल) से 20 दिन पहले राजपूतों ने बड़ा चौंकाने वाला निर्णय लिया. मारवाड़ राजपूत सभा की ओर से कांग्रेस प्रत्याशी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत के समर्थन का ऐलान कर दिया. और इसी के साथ गहलोत के प्रचार में राजपूत नेता सक्रिय हो गए. वैभव के प्रचार में जुटे इन राजपूत नेताओं में मारवाड़ राजपूत सभा अध्यक्ष हनुमान सिंह खांगटा, पूर्व पार्षद राम सिंह सांजू, श्याम सिंह सांजू समेत कई नेता शामिल रहे.

यूं ही राजपूत नेता वैभव के समर्थन और प्रचार में एकजुट नहीं हुए. खुद सीएम अशोक गहलोत उनके साथ लगातार संपर्क में रहे. यही कारण रहा कि जोधपुर विवि छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष छोटू सिंह उदावत, केसर सिंह, घनश्याम सिंह राठौड़, सुरेन्द्र सिंह गागुड़ा और केसर सिंह नरुका प्रचार में जुटे रहे. राजपूतों के इस वैभव समर्थित खेमे की कमान बीज निगम के पूर्व अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ ने संभाली.

29 में से महज 5 सीटों पर सिमटी थी बीजेपी

विधानसभा चुनाव 2018 में बीजेपी ने कहा था कि पश्चिम राजस्थान में राजपूत वर्ग बीजेपी का साथ नहीं छोड़ेगा. हालांकि ऐसा नहीं हुआ, राजपूताें की बीजेपी से दूरी का नतीजा परिणामों में चौंकाने वाला था. पश्चिम राजस्थान की 29 सीटों (जोधपुर, बाड़मेर, नागौर, जैसलमेर) से महज 5 जगह बीजेपी प्रत्याशी जीत कर विधानसभा पहुंच पाए थे.

हालांकि इससे पहले राजस्थान में नाराज राजपूतों को साधने की कोशिश भी खूब की गई थी. बीजेपी की ओर से चुनाव प्रबंध समिति की जिम्मेदारी यानी समिति संयोजक पद पर राजपूत नेता और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को बैठाया गया. इससे  राजपूत समाज की नाराजगी को कम करने कोशिश की गई है लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

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First published: May 2, 2019, 7:33 PM IST
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