लोकसभा चुनाव: झुंझुनूं सीट पर ये मुद्दा आज भी है अनसुलझा, पढ़ें- ताजा अपडेट
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लोकसभा चुनाव: झुंझुनूं सीट पर ये मुद्दा आज भी है अनसुलझा, पढ़ें- ताजा अपडेट
झुंझुनूं लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र.

झुंझुनूं लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में 6 मई को मतदान होना है. यहां से बीजेपी से नरेंद्र खीचड़ और कांग्रेस से श्रवण कुमार चुनाव लड़ रहे हैं.

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  • Last Updated: April 27, 2019, 4:13 PM IST
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राजस्थान की झुंझुनूं लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में 6 मई को मतदान होना है. यहां से बीजेपी से नरेंद्र खीचड़ और कांग्रेस से श्रवण कुमार चुनाव लड़ रहे हैं. दोनों ही ओर से चुनाव प्रचार परवान पर है लेकिन एक मुद्दा यहां आज भी अनसुलझा है. हम बात कर रहे हैं यमुना नदी पर प्रस्तावित लखवाड़ बहुद्देश्यीय अन्तरराज्यीय परियोजना का. इसके लिए राजस्थान सहित छह राज्यों के बीच दो दिन पहले एमओयू हो चुका है लेकिन झुंझुनूं के लोगों को पानी कब मिलेगा? कुछ कहा नहीं जा सकता.

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दरअसल, 24 साल से यमुना के पानी पर झुंझुनूं में सियासत होती आई, अब देखना है लोकसभा चुनाव में इस मुद्दे पर वोटर किसका ऐतबार करता है. बता दें कि 15 फरवरी 2018 को हुई अपर यमुना रिव्यू कमेटी की 7वीं बैठक में यमुना नदी पर प्रस्तावित 3 बांधों के विषय में विस्तार से चर्चा हुई थी. यमुना नदी पर प्रस्तावित बांधों (लखवाड़, रेणुका और किसाऊ) में से लखवाड़ बांध की वित्तीय स्वीकृति केंद्र द्वारा की जा चुकी थी. यमुना नदी जल समझौते में शामिल सभी राज्यों को 27 मार्च 2017 और 29 मार्च 2017 को इस बांध के निर्माण पर सहमति हेतु पत्र भेजे जा चुके थे. राजस्थान के अलावा सभी राज्यों ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कर भेज दिए, मगर राजस्थान ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किए थे.



राजस्थान की आपत्ति खारिज करने की 3 बड़ी वजह

  • बांध के डूब क्षेत्र राजस्थान का कोई हिस्सा नहीं आता

  • बांध के निर्माण के खर्च में राजस्थान की कोई भागीदारी नहीं है

  • बांध निर्माण के पश्चात बांध से बनने वाली बिजली में राजस्थान हिस्सा चाहता है तो इस बाबत उत्तराखंड से अलग से समझौता कर ले.


इससे पहले मामले में  10 अगस्त 2018 को राजस्थान उच्च न्यायालय में यशवर्धन की जनहित याचिका पर बहस के दौरान माननीय मुख्य न्यायाधीश द्वारा एडवोकेट जनरल से यही सवाल पूछा गया थी की हरियाणा समझौते पर हस्ताक्षर कब करेगा? जिसपर अनभिज्ञता ज़ाहिर की गई. अब कोर्ट द्वारा अगली तारीख पर सरकार से हरियाणा द्वारा समझौते पर हस्ताक्षर के विषय में जवाब मांगा गया है.

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इस मामले में 4 जनवरी को कोर्ट में सुनवाई हुई. इसमें कोर्ट ने राज्य सरकार से 24 जनवरी तक जवाब मांगा. इस बीच राज्य सरकार ने प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाकर 9 जनवरी को केंद्रीय जल आयोग (सीडब्लूसी) को भेज दी. 24 जनवरी को कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार ने डीपीआर केंद्रीय जल आयोग को भेजे जाना बताया. इस पर कोर्ट ने सीडब्लूसी को भी पार्टी बनाने के आदेश  दिए है.

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