अपना शहर चुनें

States

Makar Sankranti: इस बार परिंदों के लिए होगी ज्यादा दर्द भरी ! बेजुबानों को नहीं मिल पाएगा त्वरित उपचार

जयपुर में पतंगबाजी से घायल होने वाले पक्षियों की तादाद हजारों में होती है. इनकी सूचना मिलते ही संस्थाओं द्वारा तुरन्त उपचार की व्यवस्था की जाती है. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पायेगा. (सांकेतिक तस्वीर)
जयपुर में पतंगबाजी से घायल होने वाले पक्षियों की तादाद हजारों में होती है. इनकी सूचना मिलते ही संस्थाओं द्वारा तुरन्त उपचार की व्यवस्था की जाती है. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पायेगा. (सांकेतिक तस्वीर)

Makar Sankranti: इस बेजुबान परिदों के लिये पंतगबाजी दर्दभरी (Painful) होने वाली है. कोरोना और बर्ड फ्लू (Bird flu) के चलते इस बार पंतगबाजी में घायल होने वाले परिंदों को त्वरित इलाज मिलना मुश्किल होगा.

  • Share this:
जयपुर. बेजुबान परिंदों (Birds) पर इस बार दोहरी शामत आई है. एक ओर जहां बर्ड फ्लू (Bird flu) का खतरा पैर पसार रहा है तो दूसरी ओर पतंगबाजी (Kite flying) भी इस बार पक्षियों को ज्यादा दर्द देने वाली है. दरअसल मकर संक्रांति (Makar Sankranti) पर उड़ने वाली पतंगों के मांझे से बड़ी संख्या में पक्षी घायल होते हैं. इन घायल परिंदों के उपचार के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा शिविरों का आयोजन किया जाता है. लेकिन इस बार इन संस्थाओं को शिविर लगाने की अनुमति आसानी से नहीं मिल पा रही है.

कोरोना और बर्ड फ्लू के बढ़ते खतरे के चलते संस्थाओं को शिविरों के आयोजन की अनुमति नहीं दी जा रही है. जो संस्थाएं पहले जगह - जगह कैम्प लगाकर घायल पक्षियों के उपचार का जिम्मा संभालती थीं वो अब अपने निर्धारित चुनिंदा स्थानों पर ही पक्षियों का उपचार कर पाएंगी. हर साल पक्षियों के उपचार के लिए कैम्प लगाने वाले रक्षा संस्थान के पदाधिकारियों का कहना है कि उनके द्वारा जयपुर शहर में चार स्थानों पर कैंप लगाया जाता था लेकिन इस बार इसकी परमिशन नहीं दी गई है. इस बार संस्था अपने शेल्टर में सीमित संख्या में ही पक्षियों का उपचार करेगी. इसमें भी बर्ड फ्लू और कोरोना की गाइडलाइन का ध्यान रखा जाएगा.

घायल होने वाले पक्षियों की तादाद हजारों में होती है
जयपुर में पतंगबाजी से घायल होने वाले पक्षियों की तादाद हजारों में होती है. इनकी सूचना मिलते ही संस्थाओं द्वारा तुरन्त उपचार की व्यवस्था की जाती है. इस बार यह काम बहुत सीमित स्तर पर हो पाएगा. रक्षा संस्थान के मैनेजिंग ट्रस्टी रोहित गंगवाल के मुताबिक अकेले उनके शिविरों में ही हर बार इलाज के लिए करीब 1200 से 1500 पक्षी आते हैं. घायल होने वाले पक्षियों में 95 प्रतिशत संख्या कबूतरों की होती है. इसके अलावा चील, बाज और कार्मोरेंट्स जैसे पक्षी भी घायल होते हैं. लेकिन इस बार वन विभाग द्वारा शिविर आयोजन की परमिशन नहीं दिए जाने से वो अपनी 30 प्रतिशत क्षमता के साथ ही काम कर पाएंगे.
इलाज खुशनसीबों को ही मिल पाएगा


यानि इस बार पक्षी घायल तो उतनी ही तादाद में होंगे लेकिन इलाज खुशनसीबों को ही मिल पाएगा. हालांकि वन विभाग और पशुपालन विभाग द्वारा पक्षियों के इलाज के लिए इस बार भी पिछले बरसों की तरह ही इंतजाम किये गए हैं. पशुपालन विभाग के चिकित्सालय संक्रांति के दिन सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक खोलने के निर्देश दिए गए हैं जहां घायल परिंदों का उपचार हो पाएगा. वहीं विभाग ने मकर संक्रांति के दिन अधिकारियों - कर्मचारियों के अवकाश पर भी रोक लगा दी है.

बड़ी संख्या में पक्षियों की मौतें भी होती हैं
मांझे से कटने से हर साल बड़ी संख्या में पक्षियों की मौतें भी होती हैं. जो पक्षी घायल अवस्था में मिलते हैं उन्हें स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा तुरन्त इलाज मुहैया करवाया जाता है. वन विभाग और पशुपालन विभाग द्वारा अपने स्तर पर इलाज की व्यवस्था तो की जा रही है लेकिन उनके द्वारा घायल पक्षियों को ढूंढकर लाने की व्यवस्था ज्यादा मजबूत नहीं है. कुल मिलाकर पक्षियों के लिए इस बार की संक्रांति ज्यादा दर्द देने वाली साबित होने वाली है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज