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मकर संक्रांति पर पतंगबाजी: जयपुर में शौक बना जानलेवा, अब तक कई जिंदगियां छिनी

Deepak Vyas | News18 Rajasthan
Updated: January 13, 2020, 2:44 PM IST
मकर संक्रांति पर पतंगबाजी: जयपुर में शौक बना जानलेवा, अब तक कई जिंदगियां छिनी
साढ़े 4 साल के फैज की गला कटने से मौत के बाद मां फरहा की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं लेते हैं.

जयपुर (jaipur) में बीते कुछ सालों में पतंगबाजी (kite flying) के लिए काम में लिया जाने वाला मांझा लोगों की जान ले रहा हैं. दरअसल, चाइनीज मांझा (kite-flying threads | Chinese manja) भी बाजार में तेजी से बिकने लगा हैं.

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जयपुर. जयपुर (jaipur) में बीते कुछ सालों में एक शौक जानलेवा बन चुका हैं. हम बात कर रहे हैं पतंगबाजी (kite flying) की, जिसके उपयोग के लिए काम में लिया जाने वाला मांझा अब लोगों की जान ले रहा हैं. दरअसल, बीते कुछ सालों में मकर सक्रांति के दौरान होने वाली पतंगबाजी के लिए चाइनीज मांझा (kite-flying threads | Chinese manja) भी बाजार में तेजी से बिकने लगा हैं. प्लास्टिक की डोर पर धातु एवं कांच के मिश्रण से तैयार किया जाने वाला चाइनीज मांझा किसी धारदार हथियार से कम नही हैं. पतंग कटने के बाद जब ये चाइनीज मांझा किसी दुपहिया वाहन चालक से आकर टकराता हैं तो लोगों की गर्दन तक कट जाती हैं और उसके बाद मौत भी हो जाती हैं.

साढ़े 4 साल का फैज हुआ शिकार
22 दिसम्बर 2019 को जयपुर के ईदगाह के पास रहने वाला साढ़े 4 साल का फैज अपने पिता अजीज के साथ बाइक पर सवार होकर निकला था. बड़ी चौपड़ के पास इस दौरान बाइक पर सवाल फैज से मांझा आकर टकराया और गला कटने से उसकी मौत हो गई. हादसे के बाद से पूरे परिवार का रो- रोकर हाल बुरा हैं. मां फरहा की आंखों से आंसू थमने का नाम नही लेते और रोते- रोते वो सिर्फ मांझे पर रोक की मांग करती हैं, जिससे किसी दूसरी मां की गोद सूनी ना हो. साढ़े 4 साल के बेटे को खोने के बाद पिता अज़ीज़ भी अंदर से टूट चुके हैं. लेकिन, पत्नी फरहा को हौंसला देते- देते अपने दर्द को दिल में दबा लेते हैं. लेकिन, प्रशासन से मांग जरूर कर रहे हैं कि चाईनीज मांझा खरीदने और बेचने वालों पर कार्रवाई हो. यही नहीं लोग भी अपना और अपने परिजनों का ख्याल रखने के लिए ... बचाव जरूर करें.

kite flying
5 साल पहले 8 साल की मासूम चंचल की जान ऐसे हादसे में चली गई थी.


चंचल की हुई थी मौत
14 जनवरी 2014 को 8 साल की मासूम चंचल भी अपने परिवार के साथ बाइक पर निकली थी. इसी दौरान टोंक रोड पर अचानक पतंग कटने के बाद आया मांझा उसके गले से टकराया और उसका गला काट दिया. दर्द से परेशान चंचल ने पिता को बाइक रोकने के लिए कहा. लेकिन, बाद में हाॅस्पिटल पहुंचने के दौरान उसकी मौत हो गई. बेटी के साथ हुए हादसे के बाद मां सीता देवी हर रोज भगवान को हाथ जोड़कर प्रार्थना करती हैं कि किसी दूसरे के बच्चे के साथ ऐसा हादसा न हो. लेकिन, एक टीस भी दिल में रहती हैं कि आज भी मांझे का बदस्तूर उपयोग जारी हैं. बहन को खोने के 6 साल बाद भी भाई प्रद्युमन पतंग नहीं उड़ाता हैं. क्योंकि, उसे डर लगता हैं किसी दूसरे के साथ ये हादसा न हो जाए. वहीं, बड़ी बहन दीपा अंकुर बहन को याद करते हुए ज्यादा कुछ बोल भी नहीं पाती.

kite flying
सुरेश अमरवाल के परिवार के साथ 2008 में यह हादसा हुआ.
बेटे की याद में पिता ने किया प्रयोग
निजी एयरलाइन कंपनी में मैनेजर सुरेश अमरवाल सन 2008 में अपने परिवार के साथ बाइक पर न्यू सांगानेर रोड की तरफ से निकल रहे थे. 5 साल का बेटा पार्थ बाइक पर आगे बैठा था. इस दौरान चाइनीज मांझा पार्थ की गर्दन से टकराया और उसका गला कट गया, जिससे पार्थ की मौत हो गई. बेटे पार्थ की याद में उसके पिता सुरेश अमरवाल ने कुछ नया करने का सोचा, जिससे कोई दूसरा अपना बच्चा न खोए. सुरेश अमरवाल ने वर्ष 2009 में अपनी बाइक पर गोलाकार तरीके से एक मोटा तार लगाया, जिसका एक हिस्सा हैंडल पर तो दूसरा पिछले हिस्से पर लगा हैं. ये तार बाइक पर बैठने वालों को कवर करता हैं. बाइक चलाने के दौरान पतंग कटने के बाद कोई मांझा आए भी तो वो तार से टकरा कर रह जाता हैं. बाइक सवार लोगों को इससे कोई नुकसान नहीं होता. सुरेश अमरवाल इस प्रयोग के बाद लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं. जयपुर एयरपोर्ट पर कई बाइक चालकों ने इस प्रयोग को अपनाया भी हैं.

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First published: January 13, 2020, 2:10 PM IST
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