राजस्थान: सांसद और प्रतिनियुक्ति पर गए IAS ऑफिसर रुचि दिखाएं तो हो सकता है राज्य का भला

वर्तमान में राजस्थान कैडर के 18 आईएएस अधिकारी केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थापित हैं.

Many issues of rajasthan are stuck in center: केन्द्र में अटके राजस्थान के कई मुद्दों का समाधान नहीं हो पा रहा है. जबकि प्रदेश के करीब डेढ़ दर्जन आईएएस अधिकारी केन्द्र में प्रतिनियुक्ति पर तैनात है.

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    जयपुर. राजस्थान से केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर गये आला अधिकारी (Top executives) भी लंबे समय से अटकी प्रदेश की समस्याओं को सुलझाने के लिए कोई गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं. केन्द्र में अटके जिन बड़े मुद्दों के सुलझाने से राज्य के करोड़ों लोगों को फायदा हो सकता है उनमें न तो प्रतिनियुक्ति पर गए आईएएस अधिकारी और न ही हमारे सांसद (MP) रुचि दिखा रहे हैं. राजस्थान ने 25 सांसद लोकसभा को दिए हैं फिर भी राज्य हित के कई बड़े मुद्दे लंबित हैं. प्रदेश के 18 आईएएस अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में हैं. लेकिन उनकी दिलचस्पी केंद्र में अटके राज्य के मुद्दों को रफ्तार देकर सुलझाने में नहीं दिख रही है.

    प्रदेश से आईएएस अफसरों के दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर जाने से एक आस बंधती है कि वे अब राज्य हित के मुद्दों का दिल्ली स्तर पर निस्तारण करवायेंगे. उनकी दमदार पैरवी का फायदा राज्य की जनता को मिलेगा. वर्ष 2019-20 में नौ और 20-21 में 17 आईएएस अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में थे. इस समय 18 अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं. इनमें से कई मंत्रालय तो ऐसे हैं जहां राजस्थान से गए अधिकारी सीधे निर्णायक स्थिति में बैठे हैं.

    न तो भाखड़ा से पानी का आवंटन हुआ और न आवास का बकाया मिला
    राज्य से प्रतिनियुक्ति पर गए आईएएस अधिकारी संजय मल्होत्रा और तन्मय कुमार ऊर्जा मंत्रालय में अतिरिक्त और संयुक्त सचिव हैं. लेकिन भाखड़ा-नांगल प्रबंधन बोर्ड में राजस्थान के पूर्णकालिक सचिव की नियुक्ति, भाखड़ा नांगल मेन लाइन से रावी व्यास का 0.17 मिलियन एकड़ फीट पानी का आवंटन अभी तक अधर में है. इसी प्रकार ग्रामीण विकास मंत्रालय में रोहित कुमार संयुक्त सचिव हैं. इसके बावजूद प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के बीते दो वित्तीय वर्ष के बकाया 600 करोड़ से अधिक का आवंटन राजस्थान को नहीं हो पाया है.

    वित्त मंत्रालय से भी है कई वित्तीय इनायतों का इंतजार
    सबसे महत्वपूर्ण वित्त मंत्रालय में रजत कुमार मिश्रा अतिरिक्त सचिव हैं. इसके बावजूद हमारे कई मामले उनके मंत्रालय की हरी झंडी की राह देख रहे हैं. इनमें कोरोना को देखते हुए प्रदेश की विद्युत उत्पादन कंपनियों को 3 साल का ऋण मोरेटोरियम देना, को-ऑपरेटिव क्रेडिट संस्थानों को पूर्व की भांति आयकर से छूट का प्रावधान, खादी एवं खादी उत्पादों को जीरो प्रतिशत जीएसटी में शामिल करना और सूखा प्रभावित किसानों की सहायता करना आदि शामिल हैं.

    हरिके बैराज के पानी में प्रदूषण पर रोक नहीं लग पा रही है
    राज्य के एक और आईएएस अधिकारी नरेशपाल गंगवार वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में संयुक्त सचिव हैं. इसके बावजूद हरिके बैराज के पानी में प्रदूषण पर रोक, जिम्मेदार उद्योगों और पंजाब के निकायों पर कार्रवाई समेत गोडावण संरक्षण योजना में 223 करोड़ की सहायता अटकी हुई है. इतने आईएएस अधिकारियों के प्रतिनियुक्ति पर होने के बावजूद राज्य के बड़े मुद्दे ईस्टर्न कैनाल, नदी जल बंटवारा, कोविड वैक्सीनेशन, बिजली से लेकर स्वास्थ्य तक कई इश्यु मंत्रालयों की फाइलों में अटके पड़े हैं.

    विकास न होने के लिए दल लगा रहे परस्पर आरोप
    दरअसल, केंद्र और प्रदेश में अलग-अलग पार्टी की सरकारें होने का खामियाजा राज्य की जनता को भुगतना पड़ रहा है. केंद्र वर्सेज राज्य के चलते ही पिछले दिनों कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाते हुए बीजेपी सांसदों को घेरा था कि प्रदेश के इतने सांसद केंद्र में होते हुए भी वे कोई भला नहीं करा रहे हैं. हालांकि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार आपसी लड़ाई के चलते प्रदेश का विकास नहीं करा पा रही है और आरोप केंद्र पर मढ़ रही है.

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