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Jodhpur News: कोरोना की दवा फेविपीरावीर निकली पाउडर, प्रदेश में बिक गईं लाखों नकली टैबलेट

गुजरात में इस साल्ट की दवा की जांच में फेविपीरावीर साल्ट शून्य पाया गया. इसके बाद सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन ने सभी राज्यों को जून के दूसरे सप्ताह में अलर्ट जारी किया. . (सांकेतिक तस्वीर)

गुजरात में इस साल्ट की दवा की जांच में फेविपीरावीर साल्ट शून्य पाया गया. इसके बाद सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन ने सभी राज्यों को जून के दूसरे सप्ताह में अलर्ट जारी किया. . (सांकेतिक तस्वीर)

Jodhpur News: कोरोना काल में लाखों नकली फेविपीरावीर टैबलेट्स (Fake favipiravir drug) बेच दी गई. मरीज ठीक होने की आस में इस दवा को लेते रहे, जबकि इसमें वह साल्ट ही नहीं था जो कोरोना संक्रमण को खत्म करता है.

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जोधपुर. दवा निर्माताओं ने कोरोना संक्रमण खत्म करने वाली दवा फेविपीरावीर ( favipiravir drug) में नकली पाउडर मिलाकर मरीजों की जान से खिलवाड़ करने से गुरेज नहीं किया. राज्य के औषधि नियंत्रण विभाग के मुस्तैद होने के पहले ही लाखों टैबलेट बाजार में बिक चुकी थी. केंद्र के चेताने के बाद राज्य का औषधि विभाग सक्रिय हुआ और . इस टैबलेट की खरीद फरोख्त की जांच शुरू की गई.

दरअसल गुजरात में इस साल्ट की दवा की जांच में फेविपीरावीर साल्ट शून्य पाया गया था . इसके बाद सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन ने सभी राज्यों को जून के दूसरे सप्ताह में अलर्ट जारी किया. उसके बाद राज्य औषधि नियंत्रण विभाग पिछले सप्ताह सक्रिय हुआ.

बिकी लाखों नकली टैबलेट
पिछले सप्ताह राज्य औषधि नियंत्रण विभाग ने सभी बड़े शहरों से फेविपीरावीर साल्ट की दवा के सेम्पल लिए . इसके साथ ही इस दवा का पूरा स्टॉक सीज कर दिया गया. जांच रिपोर्ट में फेविपीरावीर साल्ट नकली पाया गया . जांच में सामने आया कि इस टैबलेट के निर्माता का पता हिमाचल प्रदेश के सोनल जिले के अंजी गांव में है. लेकिन वहां मैक्स रिलीफ हेल्थकेयर कंपनी नाम का अस्तित्व ही नहीं मिला. दवा की मार्केटिंग कोलकाता की फर्म कोवाकोल हेल्थकेयर के जरिए हुई थी.

कोरोना संक्रमित को पहले दिन लेनी होती थी 18 टैबलेट
कोरोना संक्रमण खत्म करने के लिए पीड़ित को दी जाने वाली दवाओं में फेविपीरावीर भी शामिल थी. इलाज के दौरान पीड़ित को पहले दिन फेविपीरावीर की 18 टैबलेट लेनी होती थी. इनमें 9 टेबलेट सुबह और 9 टेबलेट शाम को दी जाती थीं. उसके बाद प्रतिदिन इसकी संख्या में कमी होती जाती थी . इस टेबलेट की कीमत भी बहुत ज्यादा थी. फेविपीरावीर साल्ट का एक पैकेट 900 से 1300 रुपए तक बाजार में बेचा जाता था.

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