स्मृति शेष: दिल में उतर जाये, ऐसा था मेरा दोस्त ऋषि कपूर !

वह दोस्ती निभाते थे. बस दिल मिलना चाहिए.

"आपको कोई यार दोस्त बहुत ही कम लोग ऐसे मिलते हैं, जिन्हें यह शुभ अवसर मिलता है. यू आर सो बलेस्ड एंड आई एम सो हैप्पी.. लेट अस आई एम ग्रीटिंग यू. भगवान करे कि आपकी हंड्रेडथ एनिवर्सरी हो और आप हमें बुलायें क्रूज में.

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जयपुर. अभी 22 दिसंबर को मेरी 50वीं एनिवर्सरी थी. ऋषि कपूर (Rishi Kapoor) ने मेरे लिए एक वीडियो सन्देश भेज कर जो कुछ कहा था, उसे मैं भूल ही नहीं सकता. उन्होंने वीडियो भेज कर कहा था -"आपको कोई यार दोस्त बहुत ही कम लोग ऐसे मिलते हैं, जिन्हें यह शुभ अवसर मिलता है. यू आर सो बलेस्ड एंड आई एम सो हैप्पी.. लेट अस आई एम ग्रीटिंग यू. भगवान करे कि आपकी हंड्रेडथ एनिवर्सरी हो और आप हमें बुलायें क्रूज में.

पापा के जमाने की ताल्लुकात हैं
सुना है अकेले घूम रहे हो क्रूज में. हमें बुलाया नहीं आपने, मेरी कंप्लेंट रहेगी आपके साथ. दीपक ने मुझे बताया कि आप दोनों ही जा रहे हैं, बेटे को भी नहीं ले गए साथ. मैं आपको ही नहीं, आपके यार दोस्त.. उनको भी यह कहना चाहता हूं कि हमारे ताल्लुकात कमल मुकुट जी के साथ बहुत पुराने हैं. पापा के जमाने की ताल्लुकात हैं. पापा बहुत प्यार करते थे उन्हें और इज्जत देते थे. खासियत यह है कि उनको समझ भी है सिनेमा की और पापा इसलिए उनसे मशविरा भी करते थे. और, उनकी बहुत अच्छी दोस्ती थी उनके साथ. इसलिए हम उन दिनों को याद करते हैं. मैंने भी इनके साथ कई पिक्चरें की है. हाल ही में मेरी तबीयत ठीक नहीं थी तो मैं अमेरिका में था. तो मेरा ख्याल पूछते थे... हमारे परिवार के सारे सदस्य आज आपको ग्रीट करना चाह रहे हैं... गॉड ब्लेस यू."

वह स्ट्रेट फॉरवर्ड था
ऋषि कपूर ने वीडियो संदेश में मुझे कुछ इस तरह ग्रीट किया था मैं उसे कैसे भूल सकता हूं. बीकानेर में हमने "लैला मजनूं" की शूटिंग की थी 1974-75 में. "लैला मजनूं" को हमने राजस्थान में शूट किया उससे तब से जुड़ा हुआ हूं मैं. उस फिल्म से एज एन एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर जुड़ा हुआ था मैं. बीकानेर में हमने रेत के धोरों में "लैला मजनूं" के सीन शूट किए थे. तब से अब तक मैंने ऋषि कपूर में एक ही बात देखी कि वह न चापलूस था और ना ही उसे चापलूसी पसंद थी. वह पांच मिनट में ही पहचान जाता था कि कौन सही है और कौन गलत है. वह स्ट्रेट फॉरवर्ड था, स्ट्रेट फॉरवार्ड बात करना उसे बहुत पसंद था.

वह दोस्ती निभाते थे. बस दिल मिलना चाहिए
अभी कोरोना के इस दौर में भी उसने बेझिझक कहा था की यार शराब क्यों बंद कर दी. दो दिन तो शराब ओपन कर दो. हमारा भी नुकसान कर रहे हो और अपना भी, गवर्नमेंट का भी नुकसान कर रहे हो. ऋषि कपूर को जो चीज अच्छी लगती थी वह साफ कहते थे. कोई रिजर्वेशन नहीं लगती थी कि मैं क्या बोल रहा हूं. गाली देनी है तो गाली में भी कोई परहेज नहीं. चापलूसी नहीं थी उनकी नजर में. वह दोस्ती निभाते थे. बस दिल मिलना चाहिए. मेरे साथ दिल मिला हुआ था ऋषि कपूर का. कोई भी उनको लेकर नेगेटिव नहीं बोल सकता. ही वाज वेरी रेयर मैन. दूसरे की कद्र जानते थे इस इंडस्ट्री में. देखिये ऋषि कपूर जिसे बोलते हैं ना ...ही वाज वेरी जॉली ..और, हर एक एक्टर का ईगो और कई सब बातें होती है. मगर ऋषि कपूर का दिल जिससे भी मिल जाता था, उसी वो इतना हंसाते थे कि बस कहना ही क्या. आज भी सोशल मीडिया पर, डिजिटल प्लेटफार्म पर ऋषि कपूर की सबसे ज्यादा फॉलोइंग थी तो इसलिए क्योंकि वह रिजर्वेशन नहीं रखते थे. जो चीज अच्छी लगती वही बोलते. उनकी बातचीत में..व्यवहार में चापलूसी नहीं थी और ना ही वह चापलूसी पसंद करते.

पैसा जाया हो जाने पर उन्हें दर्द होता था
ही वाज रेअर मेन. दूसरे के पैसे को अपने पैसे की तरह मानते थे. दूसरे का पैसा जाया हो जाने पर उन्हें दर्द होता था जो इस इंडस्ट्री में रेअर होता है. दूसरे का नुकसान होता तो ऐसे लगता है उन्हें जैसे उनका नुकसान हुआ. इंडस्ट्री में उनकी तरह सोचने वाला कोई नहीं. बचपन से ही हम लोग साथ रहे. आई एम द पार्ट ऑफ फैमिली. उनके परिवार के साथ काफी पुराना रिश्ता है. राज कपूर साहब हो चाहे रणबीर कपूर या ऋषि कपूर. सबसे परिवारिक रिलेशन रहे हैं हमारे. हम राजस्थान में उनके पार्टनर थे फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन में. "जयपुर फिल्म्स" के नाम से डिस्ट्रीब्यूशन की शुरुआत की थी हमने. आरके फिल्म्स के साथ हमारा लंबा जुड़ाव रहा है. कई फिल्में राम तेरी गंगा मैली, प्रेम रोग जैसी न जाने कितनी फिल्म हमारे पास थी डिस्ट्रीब्यूटर के बतौर.

ऋषि कपूर वाज जस्ट लाइक माय ब्रदर
ऋषि कपूर की लास्ट दोनों फिल्म भी मैंनें ही प्रोड्यूस की थी. 2018 में मेरी फिल्म "मुल्क" आई और 2019 में "झूठा कहीं का". कभी नहीं भूल सकता उन्हें. यह पता था कि उन्हें बीमारी है फिर भी वह फिल्म के, हमारे काम को कंप्लीट करके यूएसए गये. बोले मेरे घर की पिक्चर है. "झूठा कहीं का" की फाइनल डबिंग तक वह यहीं रहे और उसे पूरा करके अमेरिका गये. "ही वाज के वेरी नाइस पर्सन". ऋषि कपूर दिल में उतर जाता था. एक से बढ़कर एक्टर है, फिल्म इंडस्ट्री में. लेकिन, एक इंसान जो दिल में उतर जाता है ऐसे व्यक्ति थे ऋषि कपूर. "दोस्ती दुश्मनी" फिल्म में हम पार्टनर रहे. जब "राम तेरी गंगा मैली" का हमने राजमंदिर जयपुर में 50वें वीक का शो किया तो राज कपूर साहब ने ओपनली डिक्लेअर किया था कि मेरे चार बेटे हैं. सबको सरप्राइज़ हो रहा है था कि वो चौथा बेटा कौन है ? उन्होंने कहा की मेरा वो बेटा कमल मुकुट है. वह मुझे एज ए फोर्थ सन ही काउंट करते थे. और, ऋषि कपूर वाज जस्ट लाइक माय ब्रदर.

मैंने मेरा भाई खो दिया
किसी का भाई चला जाए, दोस्त चला जाए तो कैसा लगता है, आज मुझे वही महसूस हो रहा है. मैंने मेरा भाई खो दिया. एक अच्छा दोस्त खो दिया. एक ऐसा दोस्त जो दिल की बात करता था. दिल में उतर जाता था. हम लोग पार्ले स्कीम एक साथ रहे. मेरा फ्लैट ऊपर था और उसका नीचे. अभी 22 दिसंबर को उसने मुझे 'ग्रीट" किया तो कहा था कि मेरी 100 वीं एनिवर्सरी हो और वह भी क्रूज़ में मेरे साथ रहे. काश ! कुदरत ऐसा ही करती. मैं 19 मार्च को इधर जयपुर आ गया था और वापस मुंबई नहीं जा सका. कोरोना महामारी की वजह से उसकी अंतिम यात्रा में शरीक नहीं हो सकता. ये अफसोस भी हमेशा रहेगा .

(फ़िल्म निर्माता और ऋषिकपूर के करीबी मित्र कमल मुकुट से "न्यूज़ 18 राजस्थान" के वरिष्ठ संपादक श्रीपाल शक्तावत की बातचीत पर आधारित.)

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