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Rajasthan: फसली ऋण को तरस रहे हैं लाखों किसानों, सहकारी बैंकों को सता रहा है यह डर

दो साल में किसान कई बार इस मसले को सहकारिता विभाग और राज्य सरकार के समक्ष उठा चुके हैं लेकिन इसका समाधान होने का अभी तक इंतजार है.
दो साल में किसान कई बार इस मसले को सहकारिता विभाग और राज्य सरकार के समक्ष उठा चुके हैं लेकिन इसका समाधान होने का अभी तक इंतजार है.

प्रदेश के लाखों किसान (Farmer) फसली ऋण की आस लगाये बैठे हैं, लेकिन सहकारी बैंक (Co-operative bank) उन्हें ऋण देने से कतरा रहे हैं. सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना का कहना है कि छोटी राशि से इन किसानों को फिर से ऋण (Loans) देने की शुरुआत करने पर विचार किया जा रहा है.

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जयपुर. कर्ज मुक्त होने के बावजूद प्रदेश के लाखों किसानों (Farmers) को नया ब्याज मुक्त फसली ऋण (Crop loans) नहीं मिल पा रहा है. राज्य सरकार अवधि पार हो चुके सहकारी ऋणों को माफ (Debt waiver) कर चुकी है और अब किसानों पर बैंकों की कोई देनदारी बकाया नहीं है लेकिन इसके बावजूद सहकारी बैंक किसानों को नया ऋण देने से कतरा रहे हैं.

प्रदेश के लाखों किसान सहकारी बैंकों के माध्यम से मिलने वाले ब्याज मुक्त फसली ऋण से वंचित है. खास बात ये है कि अब इन किसानों पर बैंकों की कोई देनदारी भी बकाया नहीं है. लेकिन बावजूद इसके बैंकों द्वारा किसानों को फसली कर्ज उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा है. प्रदेश में ऐसे किसानों की संख्या लाखों में बताई जा रही है जो करीब दो साल से फसली ऋण से वंचित हैं.

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- साल 2018 के पहले इन किसानों को सहकारी बैंकों से ऋण मिल रहा था.
- जून 2018 तक किसानों को अपने ऋण का चुकतारा करना था.
- समय पर ऋण जमा नहीं करवाने से इन्हें डिफॉल्टर की सूची में डाल दिया गया.
- उसके बाद किसानों की ऋणमाफी कर दी गई.
- ऋणमाफी में इन डिफॉल्टर किसानों का ऋण भी माफी के दायरे में आ गया.
- सरकार द्वारा सहकारी बैंकों को बकाया ऋणों की राशि का भुगतान कर दिया गया.
- इस तरह ये डिफॉल्टर किसान अब कर्ज से मुक्त हो चुके हैं.
- लेकिन इसके बावजूद किसानों सहकारी बैंकों द्वारा ऋण नहीं दिया जा रहा है.

अवधि पार खातों में मूलधन के साथ ब्याज भी जोड़ दिया था
डिफॉल्टर किसानों के कुछ मामले ऐसे भी हैं कि कर्जमाफी के दौरान सहकारी समितियों के व्यवस्थापकों ने उनके अवधि पार खातों में मूलधन के साथ ब्याज भी जोड़ दिया था. इन किसानों की कर्जमाफी तो हो गई लेकिन मूलधन के साथ ब्याज भी जुड़ने से किसानों के खातों को अवधि पार मान लिया गया. अब इन किसानों को दो साल से फसली ऋण नहीं मिल रहा है. खास बात यह है कि करीब 6 महीने पहले राज्य सरकार ने इन किसानों को फिर से ऋण देने की शुरुआत करने की घोषणा भी की थी लेकिन अभी तक भी वह व्यवस्था शुरू नहीं हो पाई है.

मंत्री बोले अब सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है
सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना का कहना है कि पूर्व में डिफॉल्टर होने के चलते सहकारी बैंक इन किसानों को ऋण देने में कतरा रहे हैं. बैंकों को डर है कि ये किसान फिर से ऋण चुकाने में कोताही करेंगे. लेकिन अब सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है और छोटी राशि से इन किसानों को फिर से ऋण देने की शुरुआत करने पर विचार किया जा रहा है.

ब्याज की राशि केन्द्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करते हैं
दो साल में किसान कई बार इस मसले को सहकारिता विभाग और राज्य सरकार के समक्ष उठा चुके हैं लेकिन मसले का समाधान होने का अभी तक इंतजार है. किसानों को सहकारी बैंकों से फसली ऋण बिना किसी ब्याज के मिलता है. इनके ब्याज की राशि केन्द्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करते हैं. लेकिन इन किसानों को फसली ऋण नहीं मिलने से साहूकारों से ऊंची ब्याज दरों से पर कर्ज लेना पड़ रहा है.
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